By प्रदीप कुमार नई दिल्ली: शेर-ए-पंजाब महाराजा रणजीत सिंह जी की 187वीं बरसी के अवसर पर उन्हें श्रद्धासुमन अर्पित किए गए। इस अवसर पर दिल्ली सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के अध्यक्ष सरदार हरमीत सिंह कालका और महासचिव सरदार जगदीप सिंह काहलों के नेतृत्व में कमेटी के सलाहकार परमजीत सिंह चंडोक, मीडिया सलाहकार सुदीप सिंह, विरासत सिखिज्म के राजिंदर सिंह सहित अन्य गणमान्य व्यक्तियों ने बाराखंभा रोड स्थित महाराजा रणजीत सिंह की प्रतिमा पर पुष्पमाला अर्पित कर उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि दी। इस अवसर पर सरदार हरमीत सिंह कालका और सरदार जगदीप सिंह काहलों ने कहा कि महाराजा रणजीत सिंह ने सामाजिक समानता पर आधारित सिख शासन स्थापित कर इतिहास में अनूठी मिसाल कायम की। उन्होंने कहा कि उनका शासन ऐसा पहला शासन था, जिसमें विभिन्न धर्मों के वीर सैनिक और अलग-अलग समुदायों के लोग उच्च प्रशासनिक पदों एवं मंत्री पदों पर कार्यरत थे।
उन्होंने कहा कि महाराजा रणजीत सिंह की दूरदर्शी सोच के कारण ही उनका साम्राज्य खैबर पख्तूनख्वा तक फैला। उनकी सेना के महान सेनापति सरदार हरी सिंह नलवा जैसे वीर योद्धाओं ने सिख साम्राज्य को अभूतपूर्व शक्ति प्रदान की।
महाराजा रणजीत सिंह ने मात्र 19 वर्ष की आयु में लाहौर पर विजय प्राप्त कर ली थी और 20 वर्ष की आयु में सिख साम्राज्य की स्थापना की। उन्होंने कहा कि उनके दरबार में अनेक अंग्रेज अधिकारी भी सेवाएं देते थे। महाराजा रणजीत सिंह के अद्वितीय नेतृत्व और पराक्रम का ही परिणाम था कि उनके जीवनकाल में अंग्रेज पंजाब पर कब्जा नहीं कर सके।
महाराजा रणजीत सिंह के शासनकाल में धर्म, जाति या किसी भी प्रकार के भेदभाव के लिए कोई स्थान नहीं था। सभी नागरिकों को समान सम्मान, अधिकार और न्याय प्राप्त था। उन्होंने कहा कि महाराजा रणजीत सिंह ने दुनिया के सामने ऐसे धर्मनिरपेक्ष और जनकल्याणकारी शासन का उदाहरण प्रस्तुत किया, जो सभी वर्गों के हितों के लिए कार्य करता था। सदियां बीत जाने के बावजूद महाराजा रणजीत सिंह का शासन आज भी वर्तमान सरकारों के लिए आदर्श प्रशासन का प्रतीक है। आज भी देश के लोग चाहते हैं कि महाराजा रणजीत सिंह के शासन जैसी न्यायपूर्ण, समानतापूर्ण और जनहितकारी व्यवस्था स्थापित हो। महाराजा साहिब के आदर्श, उनके सिद्धांत और उनकी दूरदर्शी सोच आज भी समाज का मार्गदर्शन कर रही है और भविष्य में भी करती रहेगी।

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