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Sri Guru Hargobind Sahib Ji Prakash Purab: दिल्ली के गुरुद्वारों में भव्य समागम, कालका-काहलों ने दिया न्याय और शस्त्र धारण का संदेश

By प्रदीप कुमार नई दिल्ली:  दिनांक 30 जून 2026, छठे पातशाह श्री गुरु हरगोबिंद साहिब जी का प्रकाश पर्व पूर्ण श्रद्धा और सम्मान के साथ मनाया गया। इस अवसर पर दिल्ली सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के प्रबंधाधीन विभिन्न गुरुद्वारों में गुरमत समागम आयोजित किए गए, जिनमें हजारों श्रद्धालुओं ने गुरु साहिब का आशीर्वाद प्राप्त किया। मुख्य समागम गुरुद्वारा मजनूं का टीला में आयोजित हुआ, जहां रागी जत्थों ने गुरु की इलाही बाणी का मधुर कीर्तन कर संगत को निहाल किया।

दिल्ली के गुरुद्वारा मजनूं का टीला में श्री गुरु हरगोबिंद साहिब जी के प्रकाश पर्व पर आयोजित गुरमत समागम में कीर्तन करते रागी जत्थे और उपस्थित संगत।

समागम को संबोधित करते हुए कमेटी के अध्यक्ष सरदार हरमीत सिंह कालका और महासचिव सरदार जगदीप सिंह काहलों ने संगत को गुरु साहिब के प्रकाश पर्व की लख-लख बधाई दी। उन्होंने कहा कि श्री गुरु हरगोबिंद साहिब जी ने सिख कौम को मीरी और पीरी का सिद्धांत देकर आध्यात्मिक और सांसारिक दोनों प्रकार की शक्ति प्रदान की।

उन्होंने कहा कि आज श्री अकाल तख्त साहिब दुनिया का एकमात्र ऐसा तख्त है, जो गुरु साहिब की कृपा से न्याय का प्रतीक माना जाता है और सिख कौम की शक्ति का सबसे बड़ा स्रोत है। उन्होंने कहा कि श्री अकाल तख्त साहिब से लिए जाने वाले फैसले पूरी सिख कौम के लिए अत्यंत सम्माननीय हैं और समस्त सिख समाज श्रद्धा के साथ इसके चरणों में नतमस्तक होता है।

कालका और काहलों ने कहा कि गुरु हरगोबिंद साहिब जी ने सदैव न्याय और इंसाफ का संदेश दिया। इसी सिद्धांत के तहत उन्होंने ग्वालियर किले से 52 राजाओं को भी अपने साथ मुक्त करवाया, जिसे आज भी बंदी छोड़ दिवस के रूप में याद किया जाता है।

उन्होंने कहा कि गुरु साहिब ने सिखों को एक ओर भक्ति और सिमरन का मार्ग अपनाने तथा दूसरी ओर अत्याचार के विरुद्ध खड़े होने के लिए शस्त्र धारण करने का आदेश दिया। इसी कारण आज पूरी दुनिया में सिख कौम वीर, न्यायप्रिय और मानवता की रक्षा करने वाली कौम के रूप में जानी जाती है।

उत्तराखंड में हाल की घटना का ज़िक्र करते हुए उन्होंने कहा कि यदि सिखों के पास गुरु साहिब की आज्ञा के अनुसार शस्त्र न होते, तो वे आत्मरक्षा और वहां मौजूद संगत की रक्षा नहीं कर पाते। उन्होंने कहा कि गुरु साहिब की शिक्षाओं के अनुसार जहां गुरबाणी का सिमरन और बंदगी आवश्यक है, वहीं शस्त्र धारण करना भी उतना ही आवश्यक है।

उन्होंने संगत से अधिक से अधिक संख्या में अमृत छककर गुरु के सच्चे सिख बनने और गुरमत अनुसार जीवन व्यतीत करने की अपील की। इस अवसर पर जसबीर सिंह जस्सी (एमसी), रमिंदर सिंह स्वीटा, सतनाम सिंह जग्गा (चेयरमैन), अमरजीत सिंह पिंकी तथा बाबा सतनाम सिंह कार सेवा वाले सहित अनेक गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे।

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