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Cancer Treatment in India: 18 महीने तक कैंसर से लड़ने के बाद ऑस्ट्रेलियाई मरीज को मिली नई जिंदगी, Fortis Manesar ने बिना चीरे हटाया ट्यूमर

By विनय मिश्रा नई दिल्लीदिनांक 24 जून, 2026, कोलोरेक्टल कैंसर केयर में हाल के वर्षों में हुई प्रगति का परिचय देते हुए, फोर्टिस हॉस्पीटल मानेसर में 45-वर्षीय आस्ट्रेलियाई मरीज की, जो कि प्रारंभिक चरण के रेक्टल कैंसर से ग्रस्त थे, एडवांस रोबोटिक ट्रांसएनल मिनीमैली इन्वेसिव सर्जरी (टीएएमआईएस) की है। यह पारंपरिक बड़ी सर्जरी की तुलना में चुनींदा मरीजों के लिए स्पेश्लाइज़्ड सर्जरी है जिससे अंगों को सुरक्षित रखने में भी मदद मिलती है। इस प्रक्रिया को डॉ विनय सैमुअल गायकवाड़, सीनियर डायरेक्टर – सर्जिकल ओंकोलॉजी, फोर्टिस हॉस्पीटल मानेसर के नेतृत्व में डॉक्टरों की कुशल टीम ने पूरा किया और मरीज को दो दिन बाद ही अस्पताल से छुट्टी भी मिल गई।

Fortis Manesar में डॉक्टरों की टीम के साथ ऑस्ट्रेलियाई कैंसर मरीज, जिसकी रोबोटिक TAMIS सर्जरी से बिना चीरे ट्यूमर सफलतापूर्वक हटाया गया।

उक्त मरीज सैमी पिछले करीब 18 महीनों से रेक्टल कैंसर की समस्या से जूझ रहे थे और उन्होंने आस्ट्रेलिया में कीमोथेरेपी तथा रेडिएशन थेरेपी ली थी। इस उपचार के परिणामस्वरूप, शुरू में ट्यूमर सिकुड़ गया था लेकिन कुछ ही दिनों में इसके दोबारा उभरने के लक्षण दिखायी देने लगे थे। आस्ट्रेलिया में कैंसर सर्जनों ने मरीज को सर्जरी की सलाह दी जिसके लिए पेट में चीरा लगाने और शरीर से उत्पन्न होने वाला अपशिष्ट एकत्र करने के लिए अस्थायी तौर पर स्टोमा बैग लगाने की आवश्यकता हो सकती है। चूंकि यह उन्नत प्रक्रिया आस्ट्रेलिया में उपलब्ध नहीं थी, इसलिए उन्होंने भारत में फोर्टिस हॉस्पीटल मानेसर से संपर्क किया और इलाज के लिए यहां आए। 

अस्पताल में विस्तृत जांच के बाद, टीम ने उन्हें रोबोटिक टीएएमआईएस (Robotic TAMIS) के लिए उपयुक्त पाया, और उनके प्राकृतिक मल-मार्ग से ही एडवांस मिनीमैली इन्वेसिव प्रक्रिया को पूरा किया गया। इस सर्जरी के लिए पेट में चीरा लगाने की जरूरत नहीं पड़ी और ट्यूमर को पूरी तरह से निकाल दिया गया, मरीज के शरीर पर भी कोई निशान नहीं बने और न ही उन्हें बाहरी स्टोमा बैग लगाना पड़ा, जिससे मरीज को तेजी से स्वास्थ्यलाभ करने तथा सामान्य मलत्याग प्रक्रियाओं को ही जारी रखने में मदद मिली।

इस मामले की जानकारी देते हुए, डॉ विनय सैमुअल गायकवाड़, सीनियर डायरेक्टर – सर्जिकल ओंकोलॉजी, फोर्टिस हॉस्पीटल मानेसर ने कहा, “मरीज दोबारा उभरने वाले आरंभिक चरण के कैंसर (रेकरेंट अर्ली-स्टेज कैंसर) से ग्रस्त थे और उन्हें इलाज के लिए ऐसी सर्जरी करवानी पड़ती जिसमें पेट में चीरा और अस्थायी रूप से स्टोमा की आवश्यकता होती है। लेकिन मरीज की विस्तृत रूप से जांच के बाद हमने उन्हें रोबोटिक टीएएमआईएस (Robotic TAMIS) के लिए उपयुक्त पाया, जिसमें मिनिमैली इन्वेसिव तकनीक का इस्तेमाल किया जाता है, इस प्रकार पेट में चीरे लगाने और बाहरी बैग लगाने की आवश्यकता नहीं रह जाती। सर्जरी के बाद उनकी रिकवरी देखते हुए दो ही दिनों के बाद उन्हें अस्पताल से छुट्टी भी मिल गई। इस मामले ने एक बार फिर साबित किया कि किस प्रकार एडवांस रोबोटिक तकनीकों की मदद से मरीज की लाइफ क्वालिटी को बेहतर बनाए रखने में मदद मिलती है और कुछ चुनींदा मरीजों के मामले में तो शानदार क्लीनिक परिणाम भी मिलते हैं।”

मरीज सैमी का कहना है, “जब मुझे आस्ट्रेलिया में बताया गया कि मुझे बड़ी सर्जरी और अस्थायी स्टोमा बैग लगाने की आवश्यकता है, तो मुझे यह काफी चुनौतीपूर्ण लगा। उससे पहले करीब एक साल से रेक्टल कैंसर की वजह से मैं काफी परेशान था, और अब स्वास्थ्यलाभ के लिए इस लंबी प्रक्रिया से गुजरने के ख्याल ने ही मुझे चिंता में डाल दिया था, उस पर लाइफ क्वालिटी पर भी गंभीर असर पड़ने का खतरा था। लेकिन फोर्टिस मानेसर और डॉ गायकवाड़ तक पहुंचने के बाद हालात बदल गए। इस एडवांस रोबोटिक सर्जरी की मदद से पेट में चीरा लगवाए बगैर ही ट्यूमर को पूरी तरह निकालना और सर्जरी के दो दिन बाद ही अस्पताल से छुट्टी मिलना, वाकई किसी चमत्कार से कम नहीं था। मैं अब कैंसर-मुक्त होकर आस्ट्रेलिया लौट रहा हूं, मुझे कोई बाहरी बैग भी नहीं लगाया गया है, और मेरा सामान्य जीवन वापस मिल गया है। मैं अपनी पिछली रोगमुक्त जिंदगी लौटाने के लिए फोर्टिस मानेसर के डॉक्टरों का हृइय से आभारी हूं।”

इंद्रजीत कुमार सिंह, फेसिलिटी डायरेक्टर, फोर्टिस हॉस्पीटल मानेसर ने कहा, “इस सफल उपचार ने देश-विदेश के मरीजों के लिए वर्ल्ड क्लास, टेक्नोलॉजी आधारित हेल्थकेयर सॉल्यूशंस को उपलब्ध कराने की फोर्टिस हॉस्पीटल मानेसर की प्रतिबद्धता एक बार फिर दोहरायी है। जैसे-जैसे हेल्थकेयर टेक्नोलॉजी में विस्तार हो रहा है, हमारा जोर अत्याधुनिक तथा साक्ष्य-आधारित प्रक्रियाओं को अपनाने पर है जिससे मरीजों के लिए बेहतर परिणाम सुनिश्चित करने के साथ-साथ, कैंसर के जटिल उपचार के मानकों को भी नए सिरे से परिभाषित किया जा सके।”

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