By चंदन शर्मा नई दिल्ली : दिनांक 21 अगस्त 2026, एडवांस और एंड-स्टेज लंग डिजीज से जूझ रहे मरीजों के लिए फोर्टिस हॉस्पिटल शालीमार बाग और फोर्टिस हॉस्पिटल वसंत कुंज ने Lung Failure Clinics लॉन्च किए हैं। इन क्लीनिकों के जरिए गंभीर फेफड़ों की बीमारी से पीड़ित मरीजों को मल्टी-डिसिप्लीनरी और एंड-टू-एंड रेस्पिरेटरी केयर उपलब्ध कराने की पहल की गई है।
इन क्लीनिकों में लंग फेलियर के प्रबंधन के साथ-साथ लंग ट्रांसप्लांटेशन, ट्रांसप्लांट मूल्यांकन, पल्मोनरी रिहेबिलिटेशन और फॉलो-अप केयर से जुड़ी सेवाएं उपलब्ध होंगी। मरीजों की स्थिति के अनुसार मेडिकल थेरेपी को बेहतर करने से लेकर ट्रांसप्लांट की उपयुक्तता का आकलन तक विशेषज्ञों की टीम द्वारा किया जाएगा।
फोर्टिस शालीमार बाग में सप्ताह में दो दिन क्लीनिक
फोर्टिस हॉस्पिटल शालीमार बाग का Lung Failure Clinic हर मंगलवार और शुक्रवार दोपहर 12 बजे से 2 बजे तक संचालित होगा। वहीं फोर्टिस हॉस्पिटल वसंत कुंज के क्लीनिक के संचालन से जुड़ा शेड्यूल जल्द घोषित किया जाएगा।
दोनों केंद्रों पर गंभीर फेफड़ों की बीमारी से संबंधित मरीजों की जरूरत के अनुसार अलग-अलग विशेषज्ञताओं को एक साथ लाने पर जोर दिया गया है। इससे मरीजों को बीमारी की जांच और आगे की उपचार योजना के लिए समन्वित विशेषज्ञ देखभाल मिल सकेगी।
विशेषज्ञों की टीम संभालेगी Lung Failure Clinics
इन क्लीनिकों का संचालन डॉ. गोविनी बालासुब्रमणि, डायरेक्टर–लंग ट्रांसप्लांट एंड एडवांस लंग फेलियर, ग्लेनीगल्स हॉस्पिटल, चेन्नई; डॉ. विकास मौर्या, सीनियर डायरेक्टर एवं एचओडी, रेस्पिरेटरी मेडिसिन एंड रेस्पिरेटरी क्रिटिकल केयर, फोर्टिस हॉस्पिटल शालीमार बाग; और डॉ. प्रशांत सक्सेना, प्रिंसिपल डायरेक्टर एवं हेड, पल्मोनोलॉजी, क्रिटिकल केयर एंड स्लीप मेडिसिन, फोर्टिस हॉस्पिटल वसंत कुंज करेंगे।
इस क्लीनिक में पल्मोनोलॉजिस्ट, ट्रांसप्लांट स्पेशलिस्ट, रिहेबिलिटेशन एक्सपर्ट और अन्य संबंधित हेल्थकेयर प्रोफेशनल्स की भागीदारी रहेगी। इसका उद्देश्य गंभीर रेस्पिरेटरी रोगों से पीड़ित मरीजों के क्लीनिकल परिणाम और जीवन की गुणवत्ता बेहतर करने के साथ निरंतर देखभाल उपलब्ध कराना है।
ट्रांसप्लांट से पहले और बाद की देखभाल पर भी जोर
Lung Failure Clinics में एडवांस लंग फेलियर से पीड़ित मरीजों का विस्तृत मूल्यांकन किया जाएगा। इसके साथ उनकी मेडिकल थेरेपी को ऑप्टिमाइज करने और लंग ट्रांसप्लांट के लिए उनकी उपयुक्तता पर विशेषज्ञ परामर्श दिया जाएगा।
जो मरीज ट्रांसप्लांट के लिए उपयुक्त पाए जाएंगे, उनके लिए प्री-ट्रांसप्लांट काउंसलिंग और विस्तृत क्लीनिकल जांच की जाएगी। ट्रांसप्लांट के बाद भी विशेषज्ञों के सहयोग से फॉलो-अप सेवाएं उपलब्ध कराई जाएंगी।
कई एडवांस मेडिकल सुविधाएं होंगी उपलब्ध
क्लीनिक के तहत मरीजों को एडवांस पल्मोनरी फंक्शन टेस्टिंग, ब्रॉन्कोस्कोपी और इंटरवेंशनल पल्मोनोलॉजी प्रक्रियाओं जैसी सुविधाएं भी उपलब्ध होंगी। इसके अलावा पल्मोनरी रिहेबिलिटेशन प्रोग्राम मरीज की उपचार प्रक्रिया का अहम हिस्सा होंगे।
मरीजों की अन्य जरूरतों को देखते हुए पोषण संबंधी परामर्श, नींद का मूल्यांकन और नॉन-इनवेसिव वेंटिलेशन सपोर्ट भी उपलब्ध कराया जाएगा। मरीजों और उनके केयरगिवर्स को व्यक्तिगत शिक्षा देकर बीमारी और देखभाल से जुड़ी जानकारी भी दी जाएगी।
29 वर्षीय फिजियोथेरेपिस्ट का हुआ सफल डबल-लंग ट्रांसप्लांट
Lung Failure Clinics की शुरुआत के साथ फोर्टिस शालीमार बाग में हाल ही में किए गए एक सफल डबल-लंग ट्रांसप्लांट का मामला भी सामने आया है। 29 वर्षीय फिजियोथेरेपिस्ट का मई 2026 में सफल डबल-लंग ट्रांसप्लांट किया गया।
इस मरीज को 2021 में इंटरस्टिशियल लंग डिजीज (ILD) का पता चला था। यह गंभीर स्थिति धीरे-धीरे फेफड़ों को नुकसान पहुंचाती है। उपचार जारी रहने के बावजूद मरीज की सांस संबंधी परेशानी लगातार बढ़ती रही।
2023 में उन्हें गंभीर फेफड़ों के संक्रमण और सेप्सिस के कारण अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा। इसके बाद बीमारी बढ़ती गई और 2025 के अंत तक उनकी लंग फंक्शन क्षमता काफी खराब हो चुकी थी। उन्हें लगातार ऑक्सीजन सपोर्ट की जरूरत पड़ने लगी।
मरीज की बिगड़ती स्थिति को देखते हुए मल्टी-डिसिप्लीनरी टीम ने लंग ट्रांसप्लांटेशन के लिए उनका मूल्यांकन किया। इसके बाद मई 2026 में फोर्टिस हॉस्पिटल शालीमार बाग में उनका डबल-लंग ट्रांसप्लांट सफलतापूर्वक किया गया।
यह मामला गंभीर लंग फेलियर से पीड़ित मरीजों में समय पर विशेषज्ञ मूल्यांकन और उपचार के महत्व को रेखांकित करता है।
डॉ. गोविनी बालासुब्रमणि ने समय पर रेफरल को बताया अहम
डॉ. गोविनी बालासुब्रमणि ने कहा कि हाल के समय में गंभीर फेफड़ों की बीमारियों से पीड़ित मरीजों की संख्या में बढ़ोतरी देखी जा रही है। उन्होंने इसके पीछे वायु प्रदूषण, तंबाकू सेवन या संपर्क, पेशे से जुड़े जोखिम, संक्रमण और उम्रदराज होती आबादी सहित कई कारकों का उल्लेख किया।
उन्होंने कहा कि कई मरीज विशेषज्ञों के पास तब पहुंचते हैं जब उनके फेफड़ों की स्थिति काफी बिगड़ चुकी होती है। ऐसे में समय पर रोग की पहचान, सही समय पर रेफरल और स्पेशलाइज्ड मल्टी-डिसिप्लीनरी केयर उपचार के परिणामों को बेहतर करने में मदद कर सकती है।
उनके अनुसार Lung Failure Clinics में मरीजों के मूल्यांकन, उचित मेडिकल थेरेपी, पल्मोनरी रिहेबिलिटेशन और जरूरत के अनुसार लंग ट्रांसप्लांटेशन संबंधी जांच की व्यवस्था की गई है।
डॉ. विकास मौर्या: एडवांस लंग डिजीज रोजमर्रा की जिंदगी को करती है प्रभावित
डॉ. विकास मौर्या ने कहा कि एडवांस लंग डिजीज के कारण मरीज की सांस लेने की क्षमता धीरे-धीरे सीमित होती जाती है। इसके चलते उपचार के बावजूद मरीजों को अपनी रोजमर्रा की गतिविधियां करने में परेशानी महसूस हो सकती है।
उन्होंने कहा कि समर्पित Lung Failure Clinic में बीमारी के हर चरण पर अनुभवी विशेषज्ञों की सहायता उपलब्ध रहेगी। इससे मरीजों को मल्टी-डिसिप्लीनरी और समन्वित देखभाल के साथ लंग ट्रांसप्लांटेशन जैसे एडवांस उपचारों के लिए समय पर मूल्यांकन और उपचार विकल्प मिल सकेंगे।
डॉ. प्रशांत सक्सेना: इलाज का दायरा सिर्फ लक्षणों तक सीमित नहीं
डॉ. प्रशांत सक्सेना ने कहा कि एडवांस रेस्पिरेटरी रोगों का प्रबंधन केवल व्यक्तिगत लक्षणों तक सीमित नहीं होना चाहिए। पल्मोनोलॉजी, क्रिटिकल केयर, रिहेबिलिटेशन, न्यूट्रिशन और ट्रांसप्लांटेशन की विशेषज्ञता को साथ लेकर मरीज की जरूरत के अनुसार देखभाल की योजना तैयार करना जरूरी है।
उन्होंने कहा कि इस दृष्टिकोण के जरिए मरीज की क्लीनिकल जरूरतों के साथ-साथ लंबे समय तक उसकी जीवन गुणवत्ता को भी ध्यान में रखा जा सकता है।
डॉ. ऋतु गर्ग: अत्याधुनिक विज्ञान और विशेषज्ञता को एक साथ लाने की पहल
फोर्टिस हेल्थकेयर की चीफ ग्रोथ एंड इनोवेशन ऑफिसर डॉ. ऋतु गर्ग ने कहा कि Fortis Lung Failure Clinics का लॉन्च ऐसे सेंटर ऑफ एक्सीलेंस तैयार करने की प्रतिबद्धता को दर्शाता है, जहां अत्याधुनिक विज्ञान, मल्टी-डिसिप्लीनरी विशेषज्ञता और जटिल स्थितियों से जूझ रहे मरीजों के लिए देखभाल को एक साथ उपलब्ध कराया जा सके।
उन्होंने कहा कि इस एकीकृत कार्यक्रम के जरिए गंभीर फेफड़ों की बीमारी से जूझ रहे मरीजों के लिए उम्मीद की एक नई संभावना तैयार हुई है।
डॉ. ऋतु गर्ग ने डॉ. गोविनी बालासुब्रमणि के अनुभव का भी उल्लेख किया। उनके अनुसार डॉ. गोविनी ने भारत के लंग ट्रांसप्लांट प्रोग्राम को स्थापित करने में अहम भूमिका निभाई है और उन्हें 350 से अधिक हार्ट एवं लंग ट्रांसप्लांट का अनुभव है।
उन्होंने 17 से 74 वर्ष की उम्र के कई मरीजों का सफल उपचार किया है और देश में लिविंग-डोनर लंग ट्रांसप्लांटेशन के क्षेत्र में अग्रणी विशेषज्ञ के तौर पर अनुभव रखते हैं। उनके नेतृत्व में फोर्टिस की एडवांस लंग डिजीज से पीड़ित मरीजों को वर्ल्ड-क्लास केयर उपलब्ध कराने की पहल को मजबूती मिलने की बात कही गई।
गंभीर लंग डिजीज के मरीजों को मिलेगी एंड-टू-एंड केयर
फोर्टिस के अनुसार इन Lung Failure Clinics के जरिए एडवांस और एंड-स्टेज लंग डिजीज से पीड़ित मरीजों के लिए बीमारी के मूल्यांकन से लेकर उपचार, रिहेबिलिटेशन, ट्रांसप्लांट मूल्यांकन और पोस्ट-ट्रांसप्लांट फॉलो-अप तक की सेवाओं को एकीकृत किया गया है।
इस पहल के माध्यम से गंभीर फेफड़ों की बीमारी से जूझ रहे मरीजों को विशेषज्ञों की संयुक्त देखभाल और उनकी स्थिति के अनुरूप उपचार विकल्प उपलब्ध कराने पर जोर दिया गया है।

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