By प्रदीप कुमार नई दिल्ली: दिल्ली सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी ने सिख कौम के महान सेनानायक बाबा बंदा सिंह बहादुर जी का शहीदी दिवस अत्यंत श्रद्धा और सम्मान के साथ मनाया। इस अवसर पर मुख्य समागम गुरुद्वारा बाबा बंदा सिंह बहादुर जी, महरौली में आयोजित किया गया, जहां हजारों की संख्या में संगत ने माथा टेका और महान योद्धा को श्रद्धांजलि अर्पित की। समागम को संबोधित करते हुए दिल्ली गुरुद्वारा कमेटी के अध्यक्ष सरदार हरमीत सिंह कालका तथा महासचिव सरदार जगदीप सिंह काहलों ने कहा कि बाबा बंदा सिंह बहादुर ने सिख कौम को शक्तिशाली योद्धा समुदाय के रूप में संगठित किया और सरहिंद की ईंट से ईंट बजाकर दशम पातशाह श्री गुरु गोबिंद सिंह जी के साहिबज़ादों की शहादत का बदला लिया।
उन्होंने कहा कि गुरु साहिब ने सिख कौम को निशान साहिब, नगाड़ा और जयकारे की बख्शीश दी, जिसके बल पर सिख समुदाय सदैव चढ़दी कला में रहा, बड़े से बड़े संकटों का सामना किया और विजय प्राप्त की। उन्होंने कहा कि आज भी जब भी अवसर मिलता है, सबसे पहले निशान साहिब लहराया जाता है, विजय के प्रतीक के रूप में नगाड़ा बजाया जाता है और बुलंद जयकारे लगाए जाते हैं।
उन्होंने कहा कि खालसा पंथ में कभी तानाशाही नहीं चली। जिनको गुरु साहिब ने राज बख्शा, वही राज करने के अधिकारी बने। श्री गुरु गोबिंद सिंह जी के आदेशानुसार ही बाबा बंदा सिंह बहादुर ने मुगल सेना का सामना किया और स्वयं को पूरी तरह गुरु साहिब को समर्पित कर दिया।
उन्होंने कहा कि यह हमारे लिए दुर्भाग्य की बात है कि हम अपने बच्चों को सरहिंद के गौरवशाली इतिहास से परिचित नहीं करा रहे। यदि बच्चों को अपना इतिहास पढ़ाया जाए तो शायद ही कोई बच्चा अपने धर्म से विमुख होगा।
उन्होंने कहा कि गुरु साहिब के आशीर्वाद से बाबा बंदा सिंह बहादुर ने अपने धर्म का पालन किया और इसी कारण आज पूरी कौम उन्हें महान सेनानायक के रूप में नमन करती है।
उन्होंने चिंता प्रकट की कि आज धर्म परिवर्तन, नशाखोरी और अन्य सामाजिक बुराइयों के माध्यम से सिख धर्म पर लगातार हमले हो रहे हैं। उन्होंने उत्तराखंड में निहंग सिंहों पर अत्याचार का विशेष उल्लेख करते हुए बताया कि दिल्ली गुरुद्वारा कमेटी ने उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से मुलाकात कर दोषी पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई की मांग की थी, जिस पर मुख्यमंत्री ने तुरंत कार्रवाई के निर्देश दिए।
उन्होंने बताया कि सरकार ने मामले की जांच चमोली से हरिद्वार के एसएसपी को सौंप दी है तथा डीआईजी रैंक के अधिकारी को जांच की जिम्मेदारी दी गई है। साथ ही दो स्थानों पर नोडल अधिकारियों की नियुक्ति कर श्री हेमकुंट साहिब यात्रा को सुरक्षित और सुचारु बनाने के लिए आवश्यक कदम उठाए गए हैं।
उन्होंने कहा कि आज प्रत्येक सिख का कर्तव्य है कि वह अपने बच्चों को संस्कारवान बनाए, उन्हें अपने समृद्ध इतिहास और विरासत से जोड़े, ताकि आने वाली पीढ़ियां अपने धर्म और संस्कृति पर गर्व कर सकें।
उन्होंने कहा कि श्री गुरु गोबिंद सिंह जी के आशीर्वाद से सिख कौम को पातशाहियां प्राप्त हुईं, लेकिन आज उन्हें संभालने की आवश्यकता है। यदि हम सभी आपसी मतभेद भुलाकर कौम की उन्नति के लिए मिलकर कार्य करें, तभी पूरी सिख कौम चढ़दी कला की ओर अग्रसर होगी।
अंत में उन्होंने कहा कि गुरबाणी और गुरसिखी जीवन से जुड़कर ही व्यक्ति जीवन में वास्तविक सफलता और आध्यात्मिक उन्नति प्राप्त कर सकता है।


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