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77वें गणतंत्र दिवस पर कच्छ बना राष्ट्रगौरव का केंद्र: नमक के रेगिस्तान में लहराया भारत का सबसे विशाल खादी तिरंगा 🇮🇳

Published by : BST News Desk

भुज /गुजरात : 77वें गणतंत्र दिवस के अवसर पर गुजरात के सीमावर्ती भुज जिले के ‘ग्रेट रन ऑफ कच्छ’ के धोरडो में सोमवार को देशभक्ति और स्वदेशी शक्ति का ऐतिहासिक संगम देखने को मिला, जब यशस्वी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी के नेतृत्व में पूज्य बापू की विरासत खादी से निर्मित दुनिया का सबसे विशाल स्मारकीय राष्ट्रीय ध्वज को पूरे सम्मान और गौरव के साथ में भव्य एवं दिव्य रूप में प्रदर्शित किया गया। खादी एवं ग्रामोद्योग आयोग (केवीआईसी), सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्रालय (एमएसएमई), भारत सरकार द्वारा इस विशेष प्रदर्शन का आयोजन किया गया। ‘सफेद नमक के रेगिस्तान’ के ऊपर आलोकित यह ऐतिहासिक तिरंगा राष्ट्रभक्ति, स्वदेशी भावना एवं भारत की सांस्कृतिक विरासत का भव्य प्रतीक बना।

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इस अवसर पर उपस्थित जनसमूह ने देश की एकता, अखंडता और गौरवशाली परंपरा को साकार होते हुए देखा। देशभर के खादी कारीगरों ने वीडियो संदेश के माध्यम से कच्छ में लगे दुनिया के सबसे विशाल तिरंगे को सैल्यूट करके नया कीर्तिमान बनाया। इस अवसर पर भारतीय सेना तथा सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) के जवानों द्वारा विश्व के इस सबसे विशाल खादी से निर्मित राष्ट्रीय ध्वज को पूर्ण सैन्य सम्मान के साथ स्थापित किया गया तथा गणतंत्र दिवस के अवसर पर उसे सलामी दी गई। राष्ट्रीयता से ओत-प्रोत इस कार्यक्रम के दौरान भावुक क्षण तब देखने को मिला, जब केवीआईसी अध्यक्ष ने मंच से भारतीय सेना के वीर शहीद सार्जेंट मुरलीधर की पत्नी श्रीमती राजकुमारी को सम्मानित कर उनके त्याग, बलिदान और राष्ट्रसेवा को नमन किया।

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कार्यक्रम के मुख्य अतिथि खादी एवं ग्रामोद्योग आयोग के अध्यक्ष मनोज कुमार रहे। समारोह में भारतीय सेना और सीमा सुरक्षा बल के वरिष्ठ अधिकारी एवं जवान, स्थानीय जनप्रतिनिधि, गुजरात सरकार एवं केवीआईसी के वरिष्ठ अधिकारी, तथा खादी से जुड़े कारीगर उपस्थित रहे। राष्ट्रीय पर्व गणतंत्र दिवस के अवसर पर ग्रामोद्योग विकास योजना के अंतर्गत गुजरात के कारीगरों को उपकरण और टूलकिट का वितरण किया गया। 

यह संयोग भी उल्लेखनीय रहा कि 26 जनवरी 2026 को वर्ष 2001 में आए भुज भूकंप के 25 वर्ष पूर्ण हुए। इस पृष्ठभूमि में कार्यक्रम के दौरान भूकंप से प्रभावित नागरिकों का स्मरण करते हुए कच्छ की अदम्य जिजीविषा, पुनर्निर्माण क्षमता तथा विकास की ऐतिहासिक यात्रा को रेखांकित किया गया।

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इस अवसर पर केवीआईसी अध्यक्ष मनोज कुमार ने अपने संबोधन में कहा:

“77वें गणतंत्र दिवस के पावन अवसर पर कच्छ के रन में दुनिया के सबसे विशाल खादी तिरंगे का भव्य प्रदर्शन किया जाना राष्ट्र के लिए अत्यंत गौरवपूर्ण क्षण है। यह कार्यक्रम ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के वीर जवानों को समर्पित है। इस ऐतिहासिक उपलब्धि के लिए मैं माननीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी के प्रेरणादायी नेतृत्व को श्रेय देता हूँ, जिनके मार्गदर्शन में खादी आंदोलन को राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान मिली है।”

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इस अवसर पर उन्होंने देश के नागरिकों से अपील की वो खादी भवनों से खादी से बने ध्वज खरीदें और उसे अपने घरों पर फहराएं। अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि 26 जनवरी भुज भूकंप की 25वीं स्मृति का भी दिन है। उन्होंने कहा कि वर्ष 2001 की वह विनाशकारी त्रासदी, जिसने हजारों परिवारों को प्रभावित किया था, उसी के बाद भुज ने पुनर्निर्माण, साहस और संकल्प की असाधारण मिसाल प्रस्तुत की।

उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी के विज़न का उल्लेख करते हुए कहा कि आज जो नया, सुरक्षित और सुव्यवस्थित भुज खड़ा है, वह किसी संयोग का परिणाम नहीं, बल्कि तत्कालीन मुख्यमंत्री के रूप में उनके दूरदर्शी नेतृत्व, अथक परिश्रम और विकासपरक सोच का प्रतिफल है। भुज को भविष्य के लिए एक आत्मनिर्भर और नियोजित नगर के रूप में विकसित किया गया। 

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केवीआईसी अध्यक्ष ने यह भी कहा कि आज भुज, सीमा क्षेत्र के निकट स्थित होने के कारण, हमारे वीर सैनिकों की सशक्त उपस्थिति के साथ राष्ट्र की सुरक्षा का एक महत्वपूर्ण स्तंभ बन चुका है। यह शहर नए भारत की सुरक्षा, संकल्प और सामर्थ्य का प्रतीक है। उन्होंने भुज में स्थापित ‘स्मृति वन’ का उल्लेख करते हुए कहा कि यह केवल एक स्मारक नहीं, बल्कि 2001 की त्रासदी में दिवंगत नागरिकों को समर्पित एक जीवंत प्रतीक है, जो यह दर्शाता है कि किस प्रकार शोक को शक्ति, स्मृति को संकल्प और आपदा को राष्ट्रनिर्माण की प्रेरणा में बदला जा सकता है।

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उन्होंने आगे कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी के मार्गदर्शन में खादी एवं ग्रामोद्योग क्षेत्र ने अभूतपूर्व प्रगति की है तथा देश के लाखों कारीगरों को आत्मनिर्भर बनने का अवसर प्राप्त हुआ है। बीते 11 वर्षों में केवीआईसी ने उत्पादन, विपणन, डिजाइन और तकनीक के क्षेत्र में बड़े सुधार किए हैं, जिसका व्यापक असर हुआ है। खादी-ग्रामोद्योग का कारोबार 1 लाख 70 हजार करोड़ रुपये के आंकड़े को पार कर गया है, जबकि 2 करोड़ से अधिक लोगों को रोजगार मिला है। खादी उद्योग में क्रांतिकारी बदलाव की वजह से कारीगरों की आय में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। खादी कारीगरों की पारिश्रमिक 4 रुपये प्रति हैंक से बढ़कर 15 रुपये प्रति हैंक तक पहुंचना इस बदलाव का सशक्त प्रमाण है। यह केवल आय में वृद्धि नहीं, बल्कि कारीगरों के सम्मान, आत्मविश्वास और जीवन-स्तर में सकारात्मक परिवर्तन को दर्शाता है।

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स्‍मारक राष्ट्रीय तिरंगा ध्वज भारतीयता की सामूहिक भावना और खादी की विरासत शिल्पकला का प्रतीक है। इस ध्वज को खादी और ग्रामोद्योग आयोग (केवीआईसी) द्वारा स्वतंत्रता के 75 साल के उपलक्ष्य में 'आजादी का अमृत महोत्सव' मनाने के लिए तैयार किया गया था। पहले भी कई अवसरों पर इसे प्रदर्शित किया जा चुका है। ये ध्वज 225 फीट लंबा, 150 फीट चौड़ा है और इसका भार (लगभग) 1400 किलोग्राम है। इस स्मारकीय राष्ट्रीय ध्वज को बनाने के लिए खादी कारीगरों और संबद्ध श्रमिकों ने लगभग 3500 घंटे का अतिरिक्त कार्य किया है। झंडा बनाने में हाथ से काते एवं हाथ से ही बुने हुए खादी कॉटन ध्वज पट्ट का उपयोग किया गया है जिसकी लंबाई 4500 मीटर है, जो हैरान कर देने वाली है। यह 33,750 वर्ग फुट के कुल क्षेत्रफल को कवर करता है। ध्वज में अशोक चक्र का व्यास 30 फीट है और इस झंडे को तैयार करने में 70 खादी कारीगरों को 49 दिन लगे थे।

‘ग्रेट रन ऑफ कच्छ’ जैसे विशिष्ट स्थल पर इस विशाल तिरंगे का प्रदर्शन देशभर के नागरिकों के लिए प्रेरणास्रोत बना और खादी के गौरवशाली अतीत तथा उज्ज्वल भविष्य को रेखांकित करता है।

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