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कर्तव्य पथ से केवीआईसी तक गूंजा कारीगरों का सम्मान, ‘चाय पर चर्चा’ में मनोज कुमार का बड़ा संदेश: आत्मनिर्भर भारत की रीढ़ हैं कारीगर, 2 लाख करोड़ का महासंकल्प

By विनय मिश्रा नई दिल्ली77वें गणतंत्र दिवस के अवसर पर कर्तव्य पथ पर आयोजित भव्य परेड के साक्षी बनने देशभर से नई दिल्ली आए खादी और ग्रामोद्योग आयोग तथा कॉयर बोर्ड से जुड़े कारीगरों के सम्मान में शनिवार को खादी और ग्रामोद्योग आयोग (केवीआईसी), सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्रालय (एमएसएमई), भारत सरकार के राजघाट स्थित कार्यालय परिसर में एक विशेष ‘चाय पर चर्चा’ कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस अवसर पर खादी और ग्रामोद्योग आयोग के अध्यक्ष मनोज कुमार मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। कार्यक्रम में कॉयर बोर्ड के चेयरमैन व एमएसएमई मंत्रालय के संयुक्त सचिव (एआरई), केवीआईसी की सीईओ, एमएसएमई मंत्रालय की आर्थिक सलाहकार व केवीआईसी की वित्तीय सलाहकार के साथ-साथ देश के विभिन्न राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों से आए लगभग 300 से अधिक कारीगरों, जिनमें बड़ी संख्या में महिला कारीगर शामिल थीं, ने सहभागिता की।

कर्तव्य पथ से केवीआईसी तक गूंजा कारीगरों का सम्मान, ‘चाय पर चर्चा’ में मनोज कुमार का बड़ा संदेश: आत्मनिर्भर भारत की रीढ़ हैं कारीगर, 2 लाख करोड़ का महासंकल्प

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए केवीआईसी अध्यक्ष मनोज कुमार ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में कारीगर आज आत्मनिर्भर भारत की शक्ति, ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़ और राष्ट्र निर्माण के सक्रिय सहभागी बनकर उभरे हैं। उन्होंने आगे कहा कि ‘जॉब-सीकर से जॉब-क्रिएटर’, ‘वोकल फॉर लोकल’, ‘लोकल टू ग्लोबल’ तथा ‘हर घर स्वदेशी’ जैसे स्पष्ट और दूरदर्शी विज़न ने खादी और ग्रामोद्योग क्षेत्र को नई दिशा और गति प्रदान की है।

अध्यक्ष ने कहा कि आज खादी और ग्रामोद्योग केवल आजीविका का माध्यम नहीं, बल्कि Enterprise-Driven, Market-Linked और रोजगार सृजन करने वाला एक सशक्त इकोसिस्टम बन चुका है। प्रधानमंत्री के मार्गदर्शन में केवीआईसी द्वारा उत्पादन, विपणन, डिजाइन, नवाचार और डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से किए गए सुधारों के परिणामस्वरूप खादी-ग्रामोद्योग का वार्षिक कारोबार 1.70 लाख करोड़ रुपये से अधिक हो चुका है और 2 करोड़ से अधिक लोगों को रोजगार प्राप्त हो रहा है।

कर्तव्य पथ से केवीआईसी तक गूंजा कारीगरों का सम्मान, ‘चाय पर चर्चा’ में मनोज कुमार का बड़ा संदेश: आत्मनिर्भर भारत की रीढ़ हैं कारीगर, 2 लाख करोड़ का महासंकल्प

उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि खादी कारीगरों के पारिश्रमिक में ऐतिहासिक वृद्धि दर्ज की गई है। कारीगरों का पारिश्रमिक 4 रुपये प्रति हैंक से बढ़कर 15 रुपये प्रति हैंक तक पहुँच चुका है, जो इस बात का स्पष्ट प्रमाण है कि सरकार कारीगरों की आय, सम्मान और जीवन-स्तर में निरंतर सुधार के लिए प्रतिबद्ध है। केवीआईसी अध्यक्ष ने कारीगरों से आह्वान किया कि वे आगामी दो महीनों के दौरान समर्पण और परिश्रम के साथ अधिकतम उत्पादन सुनिश्चित करें, ताकि चालू वित्त वर्ष में खादी एवं ग्रामोद्योग के उत्पादों का कारोबार 2 लाख करोड़ रुपये के लक्ष्य को पार कर सके। उन्होंने कारीगरों को आश्वस्त किया कि केवीआईसी उनके पारिश्रमिक को 15 रुपये प्रति हैंक से बढ़ाकर 20 रुपये प्रति हैंक करने के संबंध में कार्य-योजना पर सक्रिय रूप से कार्य कर रहा है।

कार्यक्रम के दौरान विभिन्न राज्यों से आए कारीगरों ने अध्यक्ष केवीआईसी के साथ अपने अनुभव साझा किए और बताया कि किस प्रकार केवीआईसी की योजनाओं और प्रशिक्षण कार्यक्रमों से उन्हें आर्थिक सशक्तिकरण, आत्मनिर्भरता और सामाजिक सम्मान प्राप्त हुआ है। महिला कारीगरों ने विशेष रूप से स्वरोजगार और आत्मविश्वास में आई वृद्धि को रेखांकित किया।

इस अवसर पर एमएसएमई मंत्रालय, केवीआईसी के वरिष्ठ अधिकारी, खादी संस्थाओं के प्रतिनिधि, कॉयर बोर्ड से जुड़े कारीगर, कर्मचारीगण एवं अन्य गणमान्य अतिथि उपस्थित रहे। कार्यक्रम का उद्देश्य गणतंत्र दिवस के अवसर पर कारीगरों के योगदान को सम्मान देना और उनसे सीधा संवाद स्थापित करना रहा।

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