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फोर्टिस मानेसर ने रचा मेडिकल इतिहास: 300 जटिल कार्डियाक सर्जरी सफल, देश-विदेश के हाई-रिस्क मरीजों को मिली नई ज़िंदगी

By चंदन शर्मा नई दिल्ली 

मानेसर/गुरुग्राम : दिनांक 28 जनवरी 2026, फोर्टिस हॉस्पीटल मानेसर ने 300 कार्डियाक सर्जरी सफलतापूर्वक पूरी कर क्षेत्र में एडल्ट एवं पिडियाट्रिक कार्डियाक केयर के अग्रणी तथा उन्नत केंद्र के तौर पर अपनी पहचान बना ली है। इस उपलब्धि ने हाइ रिस्क और जटिल तथा दुर्लभ कार्डियाक कंडीशन समेत रीडू सर्जरी, मिनीमली इन्वेसिव प्रक्रियाओं, स्कारलेस एंडोस्कोपिक सर्जरी और हृदय विकारों को दुरुस्त करने वाली करेक्शन प्रक्रियाओं के मामले में अस्पताल की लगातार बढ़ रही साख को एक बार फिर मजबूती दी है।

फोर्टिस मानेसर ने रचा मेडिकल इतिहास: 300 जटिल कार्डियाक सर्जरी सफल, देश-विदेश के हाई-रिस्क मरीजों को मिली नई ज़िंदगी

पिछले एक वर्ष के दौरान, फोर्टिस मानेसर की कार्डियाक टीम ने देशभर के अलावा पड़ोसी देशों से यहां उपचार के लिए रेफर किए गए कुछ बेहद चुनौतीपूर्ण मामलों में दक्षता का परिचय देते हुए ऐसे शानदार क्लीनिकल परिणामों को साकार कर दिखाया जो अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप थे।

ऐसा ही एक मामला 14-वर्षीय किशोरी का था जो जन्मजात हृदय विकार से पीड़ित थी। फोर्टिस मानेसर में दुर्लभ इंटरवेंशनल फोंटन प्रक्रिया से मरीज का इलाज किया गया, जो कि ओपन हार्ट सर्जरी की तुलना में मिनीमली इन्वेसिव विकल्प था। इसमें शरीर के निचले भागों से, हृदय के हिस्से को बायपास करते हुए, सीधे फेफड़ों को रक्त पहुंचाने के लिए एक स्पेशल स्टेंट लगाया जाता है। यह प्रक्रिया काफी इनोवेटिव है क्योंकि इसमें डॉक्टरों ने ऐसी खास तकनीक का इस्तेमाल किया जिसने नियंत्रित इलेक्ट्रोसर्जिकल तकनीक की मदद से पल्मोनेरी आर्टरी में एक छोटे आकार का छेद किया गया, जिससे स्टेंट लगाया गया और ऐसा बिना ओपन-हार्ट सर्जरी के ही करना संभव हो सका।

एक अन्य महत्वपूर्ण उपलब्धि अपने नाम दर्ज कराते हुए, अस्पताल की टीम ने 47-वर्षीय महिला मरीज की डबल वाल्व रिप्लेसमेंट सर्जरी को सफलतापूर्वक पूरा किया। मरीज काफी गंभीर हृदय रोग से ग्रस्त थीं, और इस वजह से उनका जीवन बिस्तर तक सिमटकर रह गया था। वह व्हील-चेयर तक सीमित हो गईं थीं और उन्हें घर पर भी लगातार ऑक्सीजन सपोर्ट पर रखना जरूरी था। उन्हें पूर्व में स्ट्रोक और हार्ट फेल होने की शिकायत भी थी और डॉक्टरी जांच में उन्हें एडवांस रियूमेटिक हार्ट रोग से ग्रस्त पाया गया जिसकी गिरफ्त में मल्टीपल वाल्व भी आ चुके थे और उनकी अनियमित हृदय गति ने काफी हद तक हार्ट फंक्शन को कमजोर कर दिया था। मरीज की सर्जरी में काफी रिस्क था और शुरू में उनके परिजन भी इस बारे में काफी चिंतित थे, लेकिन इसके बावजूद डॉक्टरों ने जटिल डबल वाल्व रिप्लेसमेंट प्रक्रिया को अंजाम दिया, और उनके दोनों एओर्टिक तथा मिट्रल वाल्वों को बदला और अतिरिक्त प्रक्रियाओं को भी किया ताकि भविष्य में किसी भी प्रकार की जटिलताओं से मरीज का बचाव हो सके।

ऐसा ही एक अन्य असाधारण मामला बांग्लादेश से इलाज के लिए आए 60-वर्षीय मरीज का था, जिन्हें उनकी पिछली बायपास सर्जरी तथा अन्य कई रोगों के चलते ऑपरेशन के अयोग्य घोषित किया गया था। लेकिन फोर्टिस मानेसर की टीम ने उनकी दुर्लभ ‘बीटिंग हार्ट’ रीडू मिनीमली इन्वेसिव मिट्रल वाल्व रिस्पेलसमेंट सर्जरी की। उल्लेखनीय है कि यह प्रक्रिया इतनी दुर्लभ है कि दुनियाभर में ऐसे कुछ सैंकड़ों मामले ही सामने आए हैं। अस्पताल में कुछ ऐसाी एडवांस सर्जिकल तकनीकों की मदद से इसे किया गया जो डॉक्टरों को हृदय को रोके बगैर ही मिट्रल वाल्व को बदलने का विकल्प देती हैं, यहां तक कि ऐसे मरीजों के मामले में भी जिन्होंने पहले भी हार्ट सर्जरी हो चुकी हैं। उक्त मरीज को स्वास्थ्यलाभ के बाद स्थिर अवस्था में अस्पताल से छुट्टी दे दी गई है।

एक अन्य मामले में, कार्डियाक टीम ने 43-वर्षीय एक प्रोफेशनल स्कूबा डाइवर की अवरुद्ध धमनियों, हार्ट वाल्व से रिसाव और हृदय की कमजोर मांसपेशियों का इलाज सिंगल सर्जरी से ही करने का शानदार उदाहरण पेश किया। सर्जरी के बाद, मरीज के हार्ट फंक्शन में काफी सुधार दिखायी दिया है और अब मरीज सक्रिय लाइफस्टाइल में वापसी कर चुका है।

एक अन्य महत्वपूर्ण सर्जरी एबसटीन विसंगति से ग्रस्त 6-वर्षीय मरीज की थी। यह बच्ची अत्यंत दुर्लभ किस्म के जन्मजात हृदय विकार से पीड़ित थी। हालांकि इस बच्ची को अन्य मेडिकल केंद्रों पर ऑपरेशन के अयोग्य करार दिया गया था, लेकिन फोर्टिस मानेसर के सर्जनों ने इस बच्ची के ही शरीर से टिश्यू लेकर उसके वाल्व को रिपेयर किया, और इस प्रकार कृत्रिम वाल्व लगाने से बचाव हुआ, तथा मरीज की रिकवरी भी जल्द हुई।

अस्पताल की इन शानदार उपलब्धियों के बारे में, डॉ महेश वाधवानी, चीफ कार्डियाक सर्जन एवं एचओडी, सीटीवीएस, फोर्टिस हॉस्पीटल मानेसर ने कहा, “अस्पताल में 300 सर्जरी करने का मतलब है हमारे प्रति मरीजों का भरोसा और साथ ही, हमारी मल्टीडिसीप्लीनरी टीम के बीच अत्यधिक तालमेल होना। इनमें से कई मामलों को तो अन्य अस्पतालों द्वारा सर्जरी करने लायक भी नहीं माना जा रहा था, या इनमें काफी अधिक रिस्क था। लेकिन हमारा पूरा जोर हमेशा से ही, उन्नत तथा साक्ष्य-आधारित कार्डियाक केयर प्रदान करने और अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप परिणाम उपलब्ध कराने का रहा है।”

पिडियाट्रिक और नियोनेटल मामलों में अत्यधिक सर्जिकल प्रिसीजन की जरूरत के बारे में, डॉ श्यामवीर सिंह खंगरोट, सीनियर कंसल्टेंट, नियोनेटल एंड पिडियाट्रिक कार्डियाक सर्जरी, फोर्टिस हॉस्पीटल मानेसर ने कहा, “जटिल जन्मजात हृदय विकारों के उपचार के लिए ऐसी रणनीतियां बनाना जरूरी होता है जो जहां तक संभव हो बच्चे की अपनी हृदय संरचनाओं को सुरक्षित रख सकें। इन मामलों में प्रोस्थेटिक इंप्लांट्स से बचने और त्वरित रिकवरी की जरूरत होती है ताकि बच्चे की आगे चलकर लंबे समय तक के लिए जीवन गुणवत्ता को बेहतर बनाकर रखा जा सके।

इन सफल परिणामों ने यह साबित कर दिखाया है कि किस तरह से फोर्टिस मानेसर जैसे स्पेश्यलाइज़्ड सेंटर में इन उन्नत और नाजुक प्रक्रियाओं को सुरक्षित तथा कारगर तरीके से अंजाम दिया जा सकता है।”

दीपक ठाकुर, सीनियर कंसल्टेंट, पिडियाट्रिक कार्डियोलॉजी, फोर्टिस हॉस्पीटल मानेसर ने कहा, “शीघ्र निदान, समय पर रेफरल और पिडियाट्रिक कार्डियोलॉजी, सर्जरी एवं क्रिटिकल केयर के बीच भरपूर तालमेल से इस प्रकार के परिणामों को प्राप्त किया जा सकता है। नवजात से लेकर किशोरों तक के मामले में, अब हम जटिल जन्मजात हृदय रोगों के उपचार के लिए मिनीमली इन्वेसिव और सुनिश्चित उपचार उपलब्ध कराने में सक्षम हैं।”

डॉ आलोक रंजन साहू, एडिशनल डायरेक्टर, कार्डियाक एनेस्थीसिया, फोर्टिस हॉस्पीटल मानेसर ने कहा, “इन हाइ रिस्क रीडू सर्जरी और पिडियाट्रिक मामलों में मिली सफलता वास्तव में, हमारे एडवांस पेरीऑपरेटिव मैनेजमेंट तथा प्रिसाइज़ एनेस्थीटिक केयर का प्रमाण है। हमारी प्राथमिकता सर्वाधिक नाजुक प्रकियाओं के दौरान मरीजों को स्थिर और सुरक्षित बनाए रखने की होती है, जो कि आज दिखायी देने वाले वर्ल्ड-क्लास क्लीनिकल परिणामों का आधार है।”

अभिजीत सिंह, फैसिलटी डायरेक्टर, फोर्टिस हॉस्पीटल मानेसर ने कहा, “मिनीमली इन्वेसिव तकनीकों, रीडू सर्जरी, जन्जात हृदय विकारों को दूर करने के लिए हार्ट रिपेयर तथा जटिल वाल्व प्रक्रियाओं पर जोर देते हुए, फोर्टिस हॉस्पीटल मानेसर ने कार्डियाक केयर के क्षेत्र में नए मानक रचे हैं। अस्पताल में 300 कार्डियाक सर्जरी होना भी इस बात का पुख्ता सबूत है कि अब वर्ल्ड-क्लास, मरीज-केंद्रित हार्ट केयर की सुविधा आपके नज़दीक उपलब्ध है।”

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