By विनय मिश्रा नई दिल्ली : श्री रामलीला महासंघ के प्रेसिडेंट श्री अर्जुन कुमार ने इस दिवाली देश-विदेश में रिलीज होने जा रही रणबीर कपूर, सनी देओल और यश स्टारर निर्देशक नितेश तिवारी की मेगा बजट फिल्म 'रामायण' के मेकर्स को पत्र लिखकर मांग की है कि फिल्म को सिनेमाघरों में रिलीज करने से पहले श्री रामलीला महासंघ के प्रतिनिधिमंडल को विशेष प्रदर्शन (स्पेशल स्क्रीनिंग) के माध्यम से दिखाई जाए।
महासंघ का कहना है कि भगवान श्रीराम से जुड़े विषय करोड़ों लोगों की आस्था का केंद्र हैं। ऐसे में किसी भी प्रकार की तथ्यात्मक या धार्मिक विवाद की आशंका को रिलीज से पहले ही दूर करना आवश्यक है, ताकि फिल्म बिना किसी विवाद के दर्शकों तक पहुंचे।
नितेश तिवारी और फिल्म की प्रोडक्शन कंपनी को लिखे पत्र में अर्जुन कुमार ने याद दिलाया कि इससे पहले भूषण कुमार की मेगा बजट फिल्म 'आदिपुरुष' को लेकर भी कई दृश्यों पर सनातनी संगठनों और रामलीला मंचन से जुड़े लोगों ने कड़ा विरोध दर्ज कराया था। उन्होंने कहा कि फिल्म में सोने की लंका को काला दिखाना, महाज्ञानी रावण की प्रस्तुति और कई अन्य दृश्य धार्मिक भावनाओं के अनुरूप नहीं थे। उनका दावा है कि इन्हीं विवादों का असर फिल्म के बॉक्स ऑफिस प्रदर्शन पर भी पड़ा।
महासंघ ने इस उदाहरण का हवाला देते हुए कहा कि धार्मिक और सांस्कृतिक विषयों पर आधारित फिल्मों में ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और धार्मिक मर्यादाओं का विशेष ध्यान रखा जाना चाहिए, जिससे किसी भी प्रकार का सामाजिक विवाद उत्पन्न न हो।
अर्जुन कुमार ने पत्र में आगे कहा कि उन्हें मिली अधिकृत जानकारी के अनुसार फिल्म 'रामायण' में कुछ ऐसे दृश्य शामिल हो सकते हैं, जो देश और विदेश में बसे हिंदू समाज की धार्मिक भावनाओं को प्रभावित कर सकते हैं। इसी कारण श्री रामलीला महासंघ रिलीज से पहले फिल्म का विशेष शो देखना चाहता है, ताकि यदि कोई विवादास्पद दृश्य या संवाद हो तो उसे समय रहते हटाया जा सके।
महासंघ का कहना है कि उसका उद्देश्य फिल्म का विरोध करना नहीं, बल्कि यह सुनिश्चित करना है कि भगवान श्रीराम के जीवन पर आधारित इस महत्वाकांक्षी फिल्म में धार्मिक आस्था, सांस्कृतिक मूल्यों और परंपराओं का सम्मान पूरी गंभीरता के साथ किया जाए।
उन्होंने फिल्म के मेकर्स को चेतावनी देते हुए कहा कि यदि रिलीज से पहले विशेष स्क्रीनिंग नहीं कराई गई और आपत्तिजनक सामग्री पाई गई, तो दिल्ली सहित देश के विभिन्न राज्यों में हिंदू संगठनों के साथ मिलकर सिनेमाघरों के बाहर बड़े स्तर पर विरोध प्रदर्शन और धरना आयोजित किया जाएगा।
अब सभी की निगाहें फिल्म के निर्माताओं के अगले कदम पर टिकी हैं। यदि मेकर्स महासंघ की मांग पर विचार करते हैं तो संभावित विवाद को पहले ही टाला जा सकता है, जबकि ऐसा न होने पर फिल्म की रिलीज के दौरान विरोध-प्रदर्शन तेज होने की संभावना जताई जा रही है।

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