By विनय मिश्रा नई दिल्ली : दिनांक 31 जुलाई। भारत में जटिल हृदय रोगों के उपचार के क्षेत्र में एक और महत्वपूर्ण उपलब्धि दर्ज करते हुए फोर्टिस मेमोरियल रिसर्च इंस्टीट्यूट (एफएमआरआई), गुरुग्राम ने दिल्ली-एनसीआर की पहली तथा देश की तीसरी Pivot Extend System इम्प्लांटेशन प्रक्रिया को सफलतापूर्वक पूरा किया है। यह अत्याधुनिक प्रक्रिया त्रिनिदाद एवं टोबेगो से इलाज के लिए आई 35 वर्षीय महिला मरीज पर की गई, जो एंड-स्टेज वाल्व्युलर हार्ट डिजीज और गंभीर ट्राइकस्पिड रीगर्जिटेशन (टीआर) से पीड़ित थीं।
डॉक्टरों के अनुसार मरीज लंबे समय से सांस लेने में तकलीफ, पैरों और पेट में सूजन तथा शरीर में लगातार तरल पदार्थ जमा होने जैसी गंभीर समस्याओं से जूझ रही थीं। उनका हृदय पहले से कमजोर था और कई वर्ष पहले विशेष पेसमेकर भी लगाया जा चुका था। इस वर्ष हृदय के आसपास जमा तरल पदार्थ निकालने की प्रक्रिया भी की गई थी, लेकिन स्वास्थ्य में अपेक्षित सुधार नहीं हो पाया।
मेडिकल जांच में स्पष्ट हुआ कि ट्राइकस्पिड वाल्व से अत्यधिक रक्त रिसाव के कारण हृदय के दाहिने हिस्से पर लगातार दबाव बढ़ रहा था। इससे लिवर और शरीर के अन्य अंग भी प्रभावित होने लगे थे। पारंपरिक उपचार और सामान्य मिनिमली इनवेसिव तकनीकें मरीज की जटिल शारीरिक संरचना के कारण कारगर नहीं थीं।
विशेषज्ञों की मल्टीडिसिप्लिनरी टीम ने विस्तृत मूल्यांकन के बाद Pivot Extend System लगाने का निर्णय लिया। इसके लिए भारत सरकार से विशेष अनुमति लेकर डिवाइस मंगाई गई। 22 जुलाई 2026 को मरीज के पेसमेकर पल्स जेनरेटर को बदला गया और दो दिन बाद 24 जुलाई को सफलतापूर्वक Pivot Extend System प्रत्यारोपित किया गया।
यह डिवाइस वाल्व के रिसाव वाले हिस्से में विशेष बैलून स्पेसर स्थापित कर रक्त के उल्टे प्रवाह को कम करती है। हालांकि इसे स्थायी इलाज नहीं माना जाता, लेकिन जिन मरीजों के पास उपचार के अन्य विकल्प नहीं होते, उनके लिए यह जीवन की गुणवत्ता बेहतर बनाने वाली महत्वपूर्ण तकनीक साबित हो रही है।
प्रक्रिया के अगले दिन किए गए इकोकार्डियोग्राम में वाल्व से होने वाले रिसाव में उल्लेखनीय कमी दर्ज की गई। मेडिकल टीम की निगरानी में मरीज की स्थिति लगातार बेहतर हुई और स्वास्थ्य स्थिर होने के बाद उन्हें अस्पताल से छुट्टी दे दी गई। डॉक्टरों ने नियमित फॉलो-अप और दवाओं के पालन की सलाह दी है।
प्रिंसिपल डायरेक्टर कार्डियोलॉजी डॉ. (कर्नल) मंजिन्दर सिंह संधू ने बताया कि मरीज की स्थिति बेहद गंभीर थी और हार्ट ट्रांसप्लांट ही एकमात्र विकल्प दिखाई दे रहा था। लेकिन हृदय की विशेष संरचना के कारण सामान्य प्रक्रियाएं संभव नहीं थीं। ऐसे में विशेष अनुमति लेकर इस नई तकनीक का उपयोग किया गया, जिसके सकारात्मक परिणाम सामने आए।
फोर्टिस मेमोरियल रिसर्च इंस्टीट्यूट के सीनियर वाइस प्रेसिडेंट एवं फैसिलिटी डायरेक्टर यश रावत ने कहा कि यह उपलब्धि भारत की उन्नत कार्डियक विशेषज्ञता और मल्टीडिसिप्लिनरी मेडिकल टीम की क्षमता को दर्शाती है। उनका कहना है कि अत्याधुनिक तकनीकों के माध्यम से उन मरीजों को भी नया उपचार विकल्प मिल रहा है, जिनके लिए पहले संभावनाएं बेहद सीमित थीं।
विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले वर्षों में ऐसी ट्रांसकैथेटर तकनीकें एडवांस हार्ट फेलियर और जटिल वाल्व रोगों के उपचार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी। इससे न केवल मरीजों की जीवन गुणवत्ता बेहतर होगी बल्कि भारत मेडिकल टूरिज्म और अत्याधुनिक कार्डियक केयर के क्षेत्र में भी अपनी मजबूत पहचान बना सकेगा।

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