By विनय मिश्रा नई दिल्ली : दिल्ली के लाजपत भवन ऑडिटोरियम में शनिवार को भारतीय कला और संस्कृति का रंग उस समय और गहरा हो गया, जब मंच पर युवा कलाकारों ने शास्त्रीय एवं पारंपरिक नृत्य की मनमोहक प्रस्तुतियों से दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। मौका था ‘राष्ट्रीय कला महोत्सव 2026’ का, जहां नृत्य, संगीत, भाव-भंगिमा और भारतीय सांस्कृतिक परंपराओं का खूबसूरत संगम देखने को मिला।
‘राष्ट्रीय कला महोत्सव 2026’ का आयोजन कथक नृत्यांगना, बॉलीवुड कोरियोग्राफर एवं अमायरा डांस एंड जिम्नास्टिक एकेडमी की संस्थापक मिस्टी आनंद के मार्गदर्शन में किया गया। उनके निर्देशन में आयोजित इस महोत्सव ने युवा कलाकारों को अपनी प्रतिभा को बड़े मंच पर प्रदर्शित करने के साथ भारतीय नृत्य परंपराओं से जुड़ने का अवसर प्रदान किया।
महोत्सव में विभिन्न नृत्य अकादमियों से जुड़े विद्यार्थियों, गुरुओं, कलाकारों और उभरती युवा प्रतिभाओं ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। मंच पर दिखाई दी कलाकारों की ऊर्जा और आत्मविश्वास ने यह संदेश दिया कि नई पीढ़ी भारतीय शास्त्रीय एवं पारंपरिक कलाओं को सीखने और आगे बढ़ाने के लिए लगातार रुचि दिखा रही है।
कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य भारतीय शास्त्रीय एवं पारंपरिक प्रदर्शन कलाओं को बढ़ावा देना और विभिन्न नृत्य विधाओं की मौलिकता, अनुशासन तथा भारतीय सांस्कृतिक परंपराओं के संरक्षण के प्रति युवाओं में जागरूकता पैदा करना रहा। महोत्सव ने कला को केवल मंचीय प्रदर्शन तक सीमित न रखते हुए उसे संस्कृति और विरासत से जोड़ने का प्रयास किया।
महोत्सव के दौरान युवा प्रतिभागियों ने अलग-अलग भारतीय नृत्य शैलियों पर आधारित प्रस्तुतियां पेश कीं। कलाकारों की ताल, लय, भाव-भंगिमा और मंचीय प्रस्तुति ने दर्शकों का ध्यान अपनी ओर खींचा। जैसे-जैसे प्रस्तुतियां आगे बढ़ीं, पूरा सभागार भारतीय संस्कृति की विविध और समृद्ध कलात्मक परंपराओं से जीवंत होता नजर आया।
प्रतियोगिता और प्रस्तुतियों का मूल्यांकन नृत्य एवं प्रदर्शन कला के विभिन्न क्षेत्रों से जुड़े प्रतिष्ठित और अनुभवी निर्णायकों के पैनल ने किया। निर्णायकों ने प्रतिभागियों की तकनीक, प्रस्तुति, अनुशासन, भाव-भंगिमा और संबंधित नृत्य शैली की प्रामाणिकता जैसे विभिन्न पहलुओं को ध्यान में रखते हुए उनका मूल्यांकन किया।
आयोजक मिस्टी आनंद ने कहा कि भारतीय शास्त्रीय और पारंपरिक कलाएं महज मनोरंजन का माध्यम नहीं हैं, बल्कि वे देश की सांस्कृतिक पहचान और समृद्ध विरासत का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। उनके अनुसार, ऐसे आयोजनों के जरिए युवा कलाकारों को अपनी प्रतिभा सामने लाने के साथ-साथ कला की मूल परंपराओं, तकनीक और अनुशासन को समझने का अवसर मिलता है।
राष्ट्रीय कला महोत्सव 2026 में कलाकारों और प्रतिभागियों का उत्साह पूरे आयोजन की खास पहचान रहा। मंच पर युवा प्रतिभाओं की शानदार प्रस्तुतियों ने भारतीय नृत्य एवं प्रदर्शन कलाओं के प्रति नई पीढ़ी की बढ़ती रुचि और जुड़ाव को सामने रखा। लाजपत भवन में आयोजित यह महोत्सव कला, संस्कृति और युवा प्रतिभा के संगम के रूप में यादगार रहा।

0 टिप्पणियाँ