By विनय मिश्रा नई दिल्ली : दिनांक 7 अगस्त 2026:रामायण रिसर्च काउंसिल की ओर से शुक्रवार को नई दिल्ली स्थित नेशनल स्पोर्ट्स क्लब ऑफ इंडिया (NSCI), प्रगति मैदान में एक महत्वपूर्ण प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित की गई। इस दौरान आगामी ‘रामायणी सम्मान 2026’ सहित रामायण, भारतीय संस्कृति और उससे जुड़े विभिन्न महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तार से जानकारी साझा की गई।
प्रेस कॉन्फ्रेंस में प्रमुख रूप से अजय भट्ट, सांसद नैनीताल एवं पूर्व रक्षा राज्य मंत्री; देव दत्त शर्मा, सेवानिवृत्त IAS; सुप्रीम कोर्ट अधिवक्ता डॉ. भारत नागर; कुमार सुशांत; पितांबर मिश्रा एवं साध्वी प्रज्ञा भारती उपस्थित रहे। काउंसिल ने बताया कि ‘रामायणी सम्मान 2026’ का आयोजन आगामी 19 अगस्त 2026 को काशी स्थित बनारस हिंदू विश्वविद्यालय (BHU) में गोस्वामी तुलसीदास जी की जयंती के अवसर पर किया जाएगा। इस अवसर पर देशभर से चयनित 28 विशिष्ट व्यक्तित्वों को सम्मानित किया जाएगा।
काउंसिल के अनुसार, बिहार सरकार ने सीतामढ़ी में 12 एकड़ भूमि आवंटित की है, जहां मां सीता (शक्ति स्थल) मंदिर का निर्माण प्रस्तावित है। इस महत्वाकांक्षी परियोजना का भूमि पूजन अप्रैल 2026 में बिहार के मुख्यमंत्री द्वारा किया जा चुका है। प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान मीडिया के सवालों का जवाब देते हुए सुप्रीम कोर्ट अधिवक्ता डॉ. भारत नागर ने हाल ही में जारी ‘रामायण’ फिल्म के ट्रेलर को लेकर अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त की। उन्होंने कहा कि ट्रेलर देखने के बाद उनके मन में यह सवाल उठा कि “यह रामायण है या महाभारत?” उनके अनुसार, ट्रेलर में भगवान श्रीराम का चित्रण पारंपरिक मर्यादा, गरिमा और सौम्यता के अनुरूप स्पष्ट रूप से दिखाई नहीं देता।
डॉ. भारत नागर ने मांग की कि फिल्म को प्रमाणित किए जाने से पहले सेंसर बोर्ड को रामायण रिसर्च काउंसिल के विद्वानों को फिल्म दिखानी चाहिए, ताकि यदि किसी प्रकार की ऐतिहासिक, धार्मिक या सांस्कृतिक त्रुटि हो तो उसे समय रहते सुधारा जा सके। उन्होंने ‘आदिपुरुष’ फिल्म का उदाहरण देते हुए कहा कि धार्मिक और ऐतिहासिक पात्रों के चित्रण में सावधानी बेहद जरूरी है, क्योंकि ऐसी गलतियों का प्रभाव नई पीढ़ी की समझ पर पड़ सकता है और धार्मिक भावनाएं भी आहत हो सकती हैं।
वहीं अजय भट्ट, सांसद नैनीताल एवं पूर्व रक्षा राज्य मंत्री, ने कहा कि रामायण रिसर्च काउंसिल की स्थापना का उद्देश्य रामायण से जुड़ी प्रमाणिक और सही जानकारियों को समाज तक पहुंचाना है। उन्होंने कहा कि फिल्म निर्माताओं को रामायण जैसे विषयों पर फिल्म बनाने से पहले व्यापक और तथ्यपरक शोध करना चाहिए, ताकि किसी भी प्रकार की गलत जानकारी लोगों तक न पहुंचे। उन्होंने ‘रामायणी सम्मान 2026’ के 28 सम्मानित व्यक्तित्वों के नामों की घोषणा भी की, जिनमें प्रमुख रूप से अनूप जलोटा, अनुराधा पौडवाल, आर.के. सिंह एवं स्वर्गीय किशोर कुणाल शामिल हैं।
साध्वी प्रज्ञा भारती ने भी फिल्मों और अन्य माध्यमों में माता सीता के चरित्र चित्रण को लेकर अपने विचार रखे। उन्होंने कहा कि माता सीता को केवल कमजोर या अबला नारी के रूप में प्रस्तुत करना उचित नहीं है। उनके अनुसार, माता सीता शक्ति, त्याग, धैर्य, आत्मसम्मान और आदर्श नारीत्व की प्रतीक हैं और उनके चरित्र को इसी गरिमा एवं सशक्त स्वरूप के साथ प्रस्तुत किया जाना चाहिए।
प्रेस कॉन्फ्रेंस के समापन पर काउंसिल के पदाधिकारियों ने कहा कि ‘रामायणी सम्मान’ का उद्देश्य भारतीय संस्कृति, रामायण की समृद्ध परंपरा और उससे जुड़े नैतिक एवं सांस्कृतिक मूल्यों को समाज में और अधिक मजबूती से स्थापित करना है। साथ ही, आने वाली पीढ़ियों तक रामायण से संबंधित प्रमाणिक और सही जानकारी पहुंचाना भी इस पहल का महत्वपूर्ण उद्देश्य है।

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