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Shri Keshav Ramlila 2026: पीतमपुरा में रावण-कुंभकर्ण के साथ जला विशाल कॉकरोच का पुतला, दशहरा महोत्सव बना आकर्षण का केंद्र

By विनय मिश्रा नई दिल्ली : दिनांक 20 अक्टूबर 2026, राजधानी दिल्ली के पीतमपुरा में आयोजित श्री केशव रामलीला कमेटी के भव्य दशहरा महोत्सव में इस बार एक अनोखा नजारा देखने को मिला। यहां पारंपरिक रूप से रावण और कुंभकर्ण के पुतलों के दहन के साथ विशाल कॉकरोच का पुतला भी जलाया गया, जो पूरे आयोजन के प्रमुख आकर्षणों में शामिल रहा। दशहरे के इस अनूठे दृश्य ने लोगों का ध्यान अपनी ओर खींचा और कार्यक्रम को एक अलग पहचान दी। जहां रावण और कुंभकर्ण के पुतले बुराई पर अच्छाई की विजय के प्रतीक बने, वहीं कॉकरोच के विशाल पुतले ने आयोजन में एक अलग तरह का आकर्षण पैदा किया।

Shri Keshav Ramlila 2026 Pitampura Delhi Dussehra festival में रावण, कुंभकर्ण और विशाल कॉकरोच के पुतले का दहन।

रावण-कुंभकर्ण के साथ कॉकरोच का पुतला बना चर्चा का केंद्र

दशहरा आते ही देशभर में रावण दहन के भव्य आयोजन देखने को मिलते हैं, लेकिन पीतमपुरा में श्री केशव रामलीला कमेटी के महोत्सव ने अपने अनोखे अंदाज से लोगों का ध्यान खींचा। रावण और कुंभकर्ण के विशाल पुतलों के साथ कॉकरोच के पुतले को भी दहन के लिए शामिल किया गया। इस अनूठे संयोजन ने आयोजन को सामान्य दशहरा कार्यक्रमों से अलग बना दिया। पुतला दहन के दौरान लोगों के बीच उत्साह का माहौल रहा और इस विशेष आकर्षण ने महोत्सव को यादगार बनाने में अहम भूमिका निभाई।

भव्य पुतला दहन के साथ गूंजे जय श्रीराम के जयकारे

दशहरा भारतीय संस्कृति और धार्मिक परंपराओं का महत्वपूर्ण पर्व है, जो अधर्म पर धर्म, असत्य पर सत्य और बुराई पर अच्छाई की जीत का संदेश देता है। पीतमपुरा में आयोजित महोत्सव में भी इसी भावना की झलक देखने को मिली। पुतला दहन के अवसर पर उत्सव का माहौल बना रहा और भगवान श्रीराम के जयकारों से परिसर गूंज उठा। रावण और कुंभकर्ण के पुतलों का दहन लोगों को रामायण के उस प्रसंग की याद दिलाता रहा, जिसमें भगवान श्रीराम ने धर्म और न्याय की स्थापना के लिए रावण का अंत किया था। इस आयोजन ने धार्मिक आस्था के साथ भारतीय परंपराओं के प्रति लोगों के उत्साह को भी प्रदर्शित किया।

दशहरा महोत्सव में दिग्गजों की गरिमामयी मौजूदगी

श्री केशव रामलीला कमेटी, पीतमपुरा की ओर से आयोजित इस भव्य कार्यक्रम में दिल्ली सरकार के पर्यटन मंत्री कपिल मिश्रा, राज्यसभा सांसद एवं भाजपा के पूर्व राष्ट्रीय महामंत्री अरुण सिंह और विश्व हिंदू परिषद के कपिल खन्ना की गरिमामयी उपस्थिति रही। इन गणमान्य हस्तियों की मौजूदगी ने आयोजन की शोभा बढ़ाई। धार्मिक और सांस्कृतिक आयोजनों में जनप्रतिनिधियों तथा सामाजिक संगठनों से जुड़े प्रमुख लोगों की भागीदारी भारतीय परंपराओं के प्रति जनसमर्थन को भी दर्शाती है। पीतमपुरा का यह महोत्सव धार्मिक आस्था, सांस्कृतिक विरासत और सामाजिक सहभागिता का संगम बना।

अशोक गोयल के नेतृत्व में हुआ भव्य आयोजन

श्री केशव रामलीला कमेटी के प्रमुख अशोक गोयल के नेतृत्व में आयोजित दशहरा महोत्सव में भव्य तैयारियों और अलग-अलग पुतलों के दहन ने विशेष आकर्षण पैदा किया। रावण, कुंभकर्ण और कॉकरोच के पुतलों को शामिल कर आयोजन को विशिष्ट रूप दिया गया। दशहरा जैसे पर्वों के आयोजन में रामायण की कथाओं, धार्मिक मान्यताओं और सांस्कृतिक मूल्यों को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का महत्वपूर्ण अवसर मिलता है। ऐसे कार्यक्रम परिवारों और स्थानीय नागरिकों को एक साथ लाकर सामूहिक उत्सव की भावना को भी मजबूत करते हैं।

कॉकरोच के पुतले ने दिया आयोजन को अलग अंदाज

इस दशहरा महोत्सव की सबसे खास बात कॉकरोच के विशाल पुतले का दहन रहा। आमतौर पर दशहरा कार्यक्रमों में रावण, कुंभकर्ण और मेघनाद के पुतलों का दहन किया जाता है, लेकिन पीतमपुरा में कॉकरोच के पुतले को शामिल करने से कार्यक्रम को एक नया और अनोखा रूप मिला। इस विशेष आकर्षण ने पारंपरिक आयोजन के बीच लोगों के लिए उत्सुकता का विषय पैदा किया। हालांकि, कॉकरोच के पुतले को शामिल करने के पीछे कमेटी का कोई विशिष्ट संदेश या उद्देश्य अलग से घोषित नहीं किया गया, लेकिन इसकी मौजूदगी ने महोत्सव की चर्चा को और बढ़ाया।

दशहरा केवल पुतला दहन नहीं, बुराइयों को त्यागने की प्रेरणा भी

दशहरे का वास्तविक महत्व केवल पुतलों को जलाने तक सीमित नहीं है। यह पर्व मनुष्य को अपने भीतर मौजूद अहंकार, क्रोध, अन्याय, लालच और नकारात्मक प्रवृत्तियों को समाप्त करने की प्रेरणा देता है। रामायण में रावण विद्वान और शक्तिशाली होने के बावजूद अपने अहंकार और अधर्म के कारण विनाश को प्राप्त हुआ। भगवान श्रीराम की विजय इस बात का प्रतीक है कि अंततः सत्य, न्याय और धर्म की ही जीत होती है। पीतमपुरा में आयोजित श्री केशव रामलीला कमेटी के दशहरा महोत्सव ने इसी पारंपरिक संदेश के साथ लोगों को पर्व की सांस्कृतिक और आध्यात्मिक महत्ता से जोड़ने का अवसर प्रदान किया।

भारतीय संस्कृति और धार्मिक परंपराओं का उत्सव

दिल्ली जैसे महानगर में दशहरा महोत्सव लोगों को अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जोड़ने का महत्वपूर्ण माध्यम हैं। रामलीला मंचन और रावण दहन के जरिए भगवान श्रीराम के आदर्शों, मर्यादा, कर्तव्य और धर्म के महत्व को जन-जन तक पहुंचाया जाता है। पीतमपुरा में आयोजित इस भव्य महोत्सव ने धार्मिक आस्था और उत्सव के माहौल के बीच दशहरे की परंपरा को जीवंत किया। रावण और कुंभकर्ण के पुतलों के साथ विशाल कॉकरोच के पुतले का दहन इस आयोजन की विशेष पहचान बना, जिसने इसे अन्य पारंपरिक दशहरा कार्यक्रमों से अलग रखा।

कुल मिलाकर, श्री केशव रामलीला कमेटी का पीतमपुरा दशहरा महोत्सव धार्मिक उत्साह, भव्य पुतला दहन और गणमान्य अतिथियों की मौजूदगी के कारण खास रहा। इस आयोजन ने जहां लोगों को उत्सव के रंग में रंगा, वहीं दशहरे के मूल संदेश—बुराई पर अच्छाई की विजय—को भी एक बार फिर सामने रखा।

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