By विनय मिश्रा नई दिल्ली : राजधानी दिल्ली के ऐतिहासिक लालकिला मैदान स्थित माधवदास पार्क में श्री धार्मिक लीला कमेटी की रामलीला में राम-रावण युद्ध के रोमांचक प्रसंगों ने दर्शकों को भावविभोर कर दिया। कुंभकरण वध, मेघनाद वध, सुलोचना प्रसंग और अहिरावण वध के प्रभावशाली मंचन ने धर्म और अधर्म के बीच निर्णायक संघर्ष को जीवंत कर दिया। युद्ध के दृश्यों, भावनात्मक संवादों और कलाकारों के सशक्त अभिनय ने रामलीला के वातावरण को भक्तिमय और रोमांचक बना दिया। इस दौरान दर्शकों को भगवान श्रीराम की विजयगाथा के साथ त्याग, साहस, निष्ठा और धर्म के मार्ग पर चलने का संदेश भी मिला।
अमित शाह, मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता और सांसद प्रवीण खंडेलवाल की मौजूदगी रही खास
श्री धार्मिक लीला कमेटी की रामलीला में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता और लोकसभा सांसद प्रवीण खंडेलवाल सहित अन्य अतिथियों की मौजूदगी ने आयोजन की गरिमा बढ़ाई। लालकिला मैदान में आयोजित इस ऐतिहासिक रामलीला के प्रति लोगों का उत्साह और धार्मिक आस्था देखने को मिली। रामलीला का मंचन न केवल भारतीय संस्कृति और धार्मिक परंपराओं को आगे बढ़ाता है, बल्कि नई पीढ़ी को भगवान श्रीराम के आदर्शों, कर्तव्यनिष्ठा और सत्य की राह पर चलने की प्रेरणा भी देता है।
103 वर्षों की गौरवशाली परंपरा, इतिहास और संस्कृति का संगम
कमेटी के महासचिव धीरज भर गुप्ता ने बताया कि श्री धार्मिक लीला कमेटी इस वर्ष अपनी स्थापना के 103 वर्ष पूरे होने के गौरवशाली पड़ाव पर पहुंची है। एक सदी से अधिक समय से चली आ रही यह परंपरा दिल्ली की सांस्कृतिक और धार्मिक पहचान का महत्वपूर्ण हिस्सा है। उन्होंने कहा कि कमेटी हर वर्ष रामायण के प्रमुख प्रसंगों को भव्यता और परंपरागत गरिमा के साथ प्रस्तुत करने का प्रयास करती है। इस वर्ष भी मंचन की तैयारियों, कलाकारों के अभिनय और तकनीकी व्यवस्थाओं पर विशेष ध्यान दिया गया है, ताकि दर्शकों को रामायण की घटनाओं का जीवंत अनुभव मिल सके।
कुंभकरण को जगाने से लेकर युद्धभूमि में वीरगति तक का प्रभावशाली मंचन
रामलीला में कुंभकरण प्रसंग ने दर्शकों के सामने लंका के युद्ध की भयावहता और रावण के अहंकार के परिणामों को प्रस्तुत किया। मंचन में लक्ष्मण के पुनः जीवित होने की सूचना रावण दरबार तक पहुंचने के बाद युद्ध की परिस्थितियों को दिखाया गया। इसके बाद कुंभकरण के महल में उसे जगाने का दृश्य प्रस्तुत हुआ। कुंभकरण युद्धभूमि में पहुंचा और भीषण युद्ध के बाद वीरगति को प्राप्त हुआ। कुंभकरण की मृत्यु का समाचार जब रावण के दरबार में पहुंचा, तो लंका की सेना और रावण के लिए यह एक बड़ा आघात बनकर सामने आया। इस प्रसंग ने दर्शाया कि अधर्म के पक्ष में खड़ी विशाल शक्ति भी अंततः सत्य और धर्म के सामने टिक नहीं सकती।
मेघनाद के यज्ञ से लक्ष्मण के साथ निर्णायक युद्ध तक दिखा रोमांच
कुंभकरण वध के बाद मेघनाद ने युद्ध में जाने की आज्ञा ली और रामदल के विरुद्ध अपनी मायावी शक्तियों का इस्तेमाल किया। मंचन में विभीषण ने भगवान श्रीराम की सेना को मेघनाद के निकुंभला देवी यज्ञ के बारे में बताया। इस यज्ञ को भंग करने की रणनीति के साथ युद्ध का घटनाक्रम आगे बढ़ा। मेघनाद के अदृश्य होकर युद्ध करने के प्रसंग ने कथा में रोमांच पैदा किया। इसके बाद लक्ष्मण और मेघनाद के बीच निर्णायक युद्ध का मंचन हुआ, जिसमें लक्ष्मण ने मेघनाद का वध कर दिया। यह प्रसंग अधर्म की शक्तियों के पतन और धर्म की विजय की दिशा में एक महत्वपूर्ण मोड़ के रूप में प्रस्तुत किया गया।
सुलोचना प्रसंग ने दर्शकों को किया भावुक
मेघनाद वध के बाद सुलोचना प्रसंग का मंचन रामलीला का भावनात्मक पक्ष सामने लेकर आया। सखी द्वारा मेघनाद की भुजा के बारे में जानकारी दिए जाने के बाद सुलोचना का रावण के दरबार में पहुंचना दिखाया गया। इसके बाद वह अपने पति के शीश को प्राप्त करने के लिए रामदल की ओर जाती है। इस प्रसंग में युद्ध की वीरता के साथ व्यक्तिगत पीड़ा, पति के प्रति निष्ठा और पारिवारिक संबंधों की संवेदनशीलता को भी दर्शाया गया। सुलोचना की व्यथा ने दर्शकों को यह संदेश दिया कि युद्ध का प्रभाव केवल रणभूमि तक सीमित नहीं रहता, बल्कि परिवारों और रिश्तों को भी गहरे रूप से प्रभावित करता है।
रावण और अहिरावण संवाद से आगे बढ़ी रामलीला की कथा
रामलीला के मंचन में रावण और अहिरावण के बीच संवाद भी प्रस्तुत किया गया। इस प्रसंग ने आगे आने वाले घटनाक्रम के लिए कथा की पृष्ठभूमि तैयार की। रामायण के इन पारंपरिक दृश्यों के माध्यम से दर्शकों को लंका के युद्ध की जटिल परिस्थितियों, रावण की रणनीतियों और भगवान श्रीराम की सेना के संघर्ष से परिचित कराया गया। कुंभकरण, मेघनाद और अहिरावण जैसे प्रमुख पात्रों के प्रसंगों ने रामलीला को विविधता प्रदान की और दर्शकों की उत्सुकता बनाए रखी।
परंपरा के साथ आधुनिक तकनीक पर भी विशेष जोर
श्री धार्मिक लीला कमेटी के पदाधिकारियों ने बताया कि इस वर्ष रामलीला के मंचन में पारंपरिक प्रसंगों की प्रामाणिकता के साथ आधुनिक तकनीकी प्रयोगों का भी विशेष ध्यान रखा गया है। मंच सज्जा, दृश्य संयोजन, प्रकाश व्यवस्था और ध्वनि के प्रभावों के माध्यम से प्रसंगों को अधिक आकर्षक और जीवंत बनाने का प्रयास किया गया है। कमेटी का उद्देश्य दर्शकों को ऐसा अनुभव देना है, जिसमें वे रामायण की कथा को केवल देखें ही नहीं, बल्कि उसके भावनात्मक और आध्यात्मिक संदेशों से भी जुड़ सकें।
पदाधिकारियों, सदस्यों और कलाकारों के सामूहिक प्रयास से भव्य आयोजन
इस आयोजन को सफल बनाने में श्री धार्मिक लीला कमेटी (रजि.), लालकिला मैदान के पदाधिकारियों, सदस्यों और कलाकारों ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। कमेटी की ओर से उपलब्ध कराई गई सूची में धीरज भर गुप्ता, सुरेश गोवल, प्रदीप सरन, महेश गुप्ता, राकेश गुप्ता, रजत गुप्ता, अतुल गुप्ता, कमलकांत जैन, सतीश गर्ग, ब्रह्म सोनी, मनीष गुप्ता, सुनील गुप्ता, मोहम्मद उस्मान, राजेश गुप्ता, सुशील जैन, ओम किशन गुप्ता, अभिषेक यीगल, सोनल गुप्ता, शिवम गुप्ता, विकास गुप्ता, विनय शर्मा, चमन शर्मा, उत्सव शर्मा और प्रवक्ता रुचि जैन सहित अन्य सदस्यों के नाम शामिल हैं। सभी ने अपनी जिम्मेदारियों और योगदान के माध्यम से इस ऐतिहासिक आयोजन की परंपरा को आगे बढ़ाने में सहयोग दिया।
श्री धार्मिक लीला कमेटी की 103 वर्षों की विरासत एक बार फिर यह संदेश देती है कि रामलीला केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति, सामाजिक मूल्यों और सांस्कृतिक एकता का सशक्त माध्यम है। भगवान श्रीराम के आदर्शों, लक्ष्मण के साहस, विभीषण की सत्यनिष्ठा और अधर्म के अंत की कथा के जरिए यह आयोजन दर्शकों को सत्य, कर्तव्य और धर्म के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देता है।

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