Published by : BST News Desk
दिल्ली, 29 अक्टूबर 2026 : आध्यात्मिकता, प्रेम, सादगी और सामाजिक समानता की अनुपम मिसाल पेश करते हुए 79वें निरंकारी संत समागम के समापन के उपरांत समालखा के पावन मैदानों में निरंकारी सामूहिक सादा विवाह समारोह का भव्य आयोजन किया गया। सतगुरु माता सुदीक्षा जी महाराज एवं निरंकारी राजपिता रमित जी की दिव्य उपस्थिति और पावन आशीर्वाद के बीच आयोजित इस मंगलमय समारोह में 126 नवयुगलों ने एक-दूसरे का जीवनसाथी बनकर अपने नए जीवन की शुरुआत की। यह आयोजन केवल विवाह संस्कार तक सीमित नहीं रहा, बल्कि प्रेम, विश्वास, त्याग, समर्पण और मानवीय एकता का ऐसा प्रेरणादायक संदेश दे गया, जिसने उपस्थित श्रद्धालुओं और परिवारों को भावविभोर कर दिया। सतगुरु के सान्निध्य में नवदंपतियों ने अपने वैवाहिक जीवन को प्रेम, सम्मान और आध्यात्मिक मूल्यों के आधार पर आगे बढ़ाने का आशीर्वाद प्राप्त किया।
परंपरागत रस्मों के साथ निरंकारी सांझा-हार ने दिया एकता और समानता का संदेश
समारोह का शुभारंभ पारंपरिक जयमाला और निरंकारी सांझा-हार की मंगलमय रस्मों के साथ हुआ। मिशन की प्रधान आदरणीय राजकुमारी जी एवं अन्य कार्यकारिणी सदस्यों ने सभी नवविवाहित जोड़ों को सांझा-हार पहनाकर उनके सुखद और उज्ज्वल भविष्य की मंगलकामनाएं कीं। इस अवसर पर विवाह की पारंपरिक खुशियों के साथ मिशन की सादगीपूर्ण और समानतापूर्ण परंपरा की सुंदर झलक भी देखने को मिली। इसके पश्चात हिंदी में भक्तिमय निरंकारी लावों का गायन किया गया, जिनमें पति-पत्नी के बीच अटूट विश्वास, आपसी सम्मान, प्रेम और समर्पण के साथ गृहस्थ जीवन की जिम्मेदारियां निभाने की प्रेरणादायक शिक्षाएं समाहित थीं। समारोह के अंतिम चरण में सतगुरु माता जी एवं निरंकारी राजपिता जी ने नवविवाहित जोड़ों पर पुष्पवृष्टि कर उन्हें सुख, शांति, प्रेम और आनंद से परिपूर्ण दांपत्य जीवन का आशीर्वाद प्रदान किया।
पति-पत्नी एक-दूसरे के बनें दो पंख, प्रेम और तालमेल से निभाएं जीवन की जिम्मेदारियां: सतगुरु माता सुदीक्षा जी महाराज
इस अवसर पर सतगुरु माता सुदीक्षा जी महाराज ने अपने प्रेरणादायक आशीर्वचनों में नवविवाहित जोड़ों को वैवाहिक जीवन की वास्तविक भावना से अवगत कराते हुए कहा कि सामूहिक विवाह का उद्देश्य केवल एक आयोजन तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि इसकी सादगी, समानता और एक-दूसरे के प्रति सम्मान का भाव जीवनभर व्यवहार में दिखाई देना चाहिए। पति-पत्नी एक-दूसरे की जिम्मेदारियों को समान रूप से समझें और निभाएं तथा प्रेम, विश्वास और आपसी तालमेल के साथ जीवन की हर परिस्थिति का सामना करें। उन्होंने प्रेरित किया कि दोनों एक-दूसरे के दो पंख बनकर आगे बढ़ें, क्योंकि जीवन की उड़ान तभी सुंदर और सफल बनती है, जब दोनों का सहयोग और विश्वास एक-दूसरे के साथ बना रहता है।
सेवा, सुमिरन और सत्संग के मार्ग पर साथ चलने से मजबूत होंगे वैवाहिक रिश्ते
सतगुरु माता जी ने अपने संदेश में सेवा, सुमिरन और सत्संग के महत्व को रेखांकित करते हुए कहा कि पति-पत्नी को जीवन के प्रत्येक पड़ाव पर एक-दूसरे का सहयोगी बनना चाहिए। एक-दूसरे की उन्नति में सहायक बनना, कठिन परिस्थितियों में हौसला देना और परिवार की खुशियों को मिलकर संजोना ही सफल दांपत्य जीवन की महत्वपूर्ण आधारशिला है। उन्होंने नवदंपतियों को प्रेरित किया कि वे एक-दूसरे की कमियों को सहजता से स्वीकार करें तथा क्षमा, विनम्रता, धैर्य और समझदारी को अपने व्यवहार का हिस्सा बनाएं। विवाह केवल दो व्यक्तियों का संबंध नहीं, बल्कि दो परिवारों के बीच प्रेम, सम्मान और आत्मीयता का भी पवित्र बंधन है। इसे जीवनभर निभाने के लिए आपसी विश्वास और समर्पण आवश्यक है। इस समारोह का एक विशेष भावनात्मक पक्ष यह भी रहा कि सतगुरु माता जी के परिवार के एक सदस्य का शुभ विवाह भी इसी सामूहिक सादा विवाह समारोह में सम्पन्न हुआ, जो सादगी और समानता की भावना का प्रेरक उदाहरण बना।
भारत के विभिन्न राज्यों से लेकर ऑस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड और कनाडा तक के नवयुगल बने एकता के प्रतीक
संत निरंकारी मंडल के सचिव आदरणीय जोगिन्दर सुखीजा जी ने समारोह की जानकारी देते हुए बताया कि समाज कल्याण विभाग के सहयोग से आयोजित इस सामूहिक विवाह समारोह में भारत के विभिन्न राज्यों के साथ-साथ विदेशों से भी नवयुगलों ने उत्साहपूर्वक सहभागिता की। बिहार, चंडीगढ़, छत्तीसगढ़, दिल्ली, गुजरात, हिमाचल प्रदेश, हरियाणा, जम्मू-कश्मीर, झारखंड, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, पंजाब, राजस्थान, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड और पश्चिम बंगाल सहित ऑस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड तथा कनाडा से आए कुल 126 नवयुगल इस मंगलमय आयोजन का हिस्सा बने। अलग-अलग भाषाओं, क्षेत्रों, परंपराओं और सांस्कृतिक पृष्ठभूमियों से आए इन जोड़ों का एक ही मंच पर परिणय सूत्र में बंधना वैश्विक भाईचारे, सामाजिक समरसता और मानवीय एकता की अनूठी तस्वीर प्रस्तुत करता नजर आया। इस आयोजन ने यह संदेश दिया कि प्रेम और मानवता के रिश्ते किसी भाषा, क्षेत्र या संस्कृति की सीमाओं में बंधे नहीं होते, बल्कि आपसी सद्भाव और समानता से पूरी दुनिया को एक सूत्र में पिरोया जा सकता है।
दहेज और आडंबर से दूर सादगीपूर्ण विवाह की प्रेरणा, समाज को मिला मानवीय मूल्यों का संदेश
निरंकारी सामूहिक सादा विवाह समारोह की सबसे महत्वपूर्ण विशेषता इसकी सादगी और आध्यात्मिक भावना रही। समारोह ने विवाह जैसे पवित्र संस्कार को अनावश्यक आडंबर के बजाय प्रेम, विश्वास, समानता और पारिवारिक जिम्मेदारियों से जोड़ने की प्रेरणा दी। ऐसे आयोजन समाज में सादगीपूर्ण विवाह की सोच को प्रोत्साहित करने के साथ-साथ परिवारों को मानवीय मूल्यों और आपसी सहयोग का महत्व भी समझाते हैं। 126 नवयुगलों का एक साथ नए जीवन की शुरुआत करना इस बात का प्रतीक बना कि विवाह की वास्तविक सुंदरता भव्य सजावट या दिखावे में नहीं, बल्कि दो लोगों के बीच अटूट विश्वास, सम्मान और जीवनभर साथ निभाने के संकल्प में निहित है।
प्रेम, सादगी और एकत्व की प्रेरणा के साथ सम्पन्न हुआ मंगलमय समारोह
इस प्रकार समालखा की पावन धरती पर सम्पन्न हुआ निरंकारी सामूहिक सादा विवाह समारोह प्रेम, सादगी, आध्यात्मिकता और एकत्व का यादगार उदाहरण बन गया। 79वें निरंकारी संत समागम के बाद आयोजित इस विशेष समारोह ने एक बार फिर यह संदेश दिया कि सच्चे रिश्तों की नींव विश्वास, समर्पण, विनम्रता और एक-दूसरे के प्रति सम्मान से मजबूत होती है। सतगुरु माता सुदीक्षा जी महाराज एवं निरंकारी राजपिता रमित जी के पावन आशीर्वाद के साथ नई जीवनयात्रा शुरू करने वाले सभी 126 नवदंपतियों के लिए यह अवसर जीवनभर यादगार रहेगा। निश्चित रूप से यह आयोजन नवयुगलों के लिए मंगलमय शुरुआत होने के साथ-साथ समाज को सादगीपूर्ण विवाह, पारिवारिक एकता और मानवता के मूल्यों को अपनाने की प्रेरणा भी देता रहेगा।

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