By प्रदीप कुमार नई दिल्ली: सरदार तेजा सिंह समुंदरी के 100वें शहीदी दिवस पर उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की गई। भारत के चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया जस्टिस सूर्यकांत, पूर्व राष्ट्रपति राम नाथ कोविंद, दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता, पूर्व राष्ट्रपति डॉ. मनमोहन सिंह की धर्मपत्नी गुरशरण कौर, दिल्ली विधानसभा के अध्यक्ष विजेंद्र गुप्ता, दिल्ली सरकार के मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा और प्रवेश वर्मा, बॉलीवुड अभिनेता अनुपम खेर, शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (एसजीपीसी) के अध्यक्ष हरजिंदर सिंह धामी, दिल्ली सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (डीएसजीएमसी) के अध्यक्ष हरमीत सिंह कालका, महासचिव जगदीप सिंह काहलों तथा हरियाणा सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के अध्यक्ष जगदीश सिंह झींडा सहित हजारों संगतों ने महान सिख नेता सरदार तेजा सिंह समुंदरी को श्रद्धासुमन अर्पित किए।
सरदार तेजा सिंह समुंदरी के पौत्र एवं दिल्ली के उपराज्यपाल तरनजीत सिंह संधू द्वारा दिल्ली सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के सहयोग से गुरुद्वारा रकाब गंज साहिब स्थित भाई लखी शाह वंजारा हॉल में उनकी 100वीं शहादत वर्षगांठ के अवसर पर एक विशेष स्मृति समारोह का आयोजन किया गया।
इस अवसर पर पंजाब विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष प्रताप सिंह बाजवा, दमदमी टकसाल के प्रमुख बाबा हरनाम सिंह धुम्मा, गुरु नानक देव विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. करमजीत सिंह, अकाली नेता बिक्रम सिंह मजीठिया, बलविंदर सिंह भूंदड़, डॉ. दलजीत सिंह चीमा, परमजीत सिंह सरना, सांसद गुरजीत सिंह औजला, भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता आर.पी. सिंह, पूर्व सांसद तरलोचन सिंह, वरिष्ठ पत्रकार बलजीत बल्ली, चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू, प्रसिद्ध गायक जसबीर जस्सी तथा कनाडा से पहुंचे तरनजीत सिंह संधू के भाई जसजीत सिंह संधू के परिवार के सदस्य भी उपस्थित रहे।
समारोह में तरनजीत सिंह संधू ने अपने दादा सरदार तेजा सिंह समुंदरी के अद्वितीय योगदान और बलिदानों का विस्तार से उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि 17 जुलाई 1926 को उनकी सर्वोच्च शहादत के एक शताब्दी बाद भी सरदार तेजा सिंह समुंदरी का जीवन निस्वार्थ सेवा, नैतिक साहस, न्याय, धर्म और सिद्धांतों के प्रति अटूट प्रतिबद्धता की अमिट प्रेरणा बना हुआ है।
समारोह को संबोधित करते हुए तरनजीत सिंह संधू ने कहा कि सरदार तेजा सिंह समुंदरी का जीवन केवल सिख इतिहास का गौरवशाली अध्याय नहीं, बल्कि सेवा, त्याग, न्याय और सिद्धांतों के प्रति अटूट निष्ठा की अमर मिसाल है। उन्होंने कहा कि गुरुद्वारा सुधार आंदोलन में उनका योगदान आने वाली पीढ़ियों के लिए सदैव प्रेरणास्रोत रहेगा। शिक्षा, सामाजिक समानता और धार्मिक मूल्यों की रक्षा के लिए उनके द्वारा किया गया संघर्ष आज भी उतना ही प्रासंगिक है। उन्होंने कहा कि सरदार तेजा सिंह समुंदरी के आदर्श केवल इतिहास का हिस्सा नहीं, बल्कि वर्तमान और भविष्य की पीढ़ियों के लिए मार्गदर्शक हैं। उनकी 100वीं शहादत वर्षगांठ केवल श्रद्धांजलि का अवसर नहीं, बल्कि सेवा, समर्पण और मानवता के मार्ग पर चलने का संकल्प लेने का भी अवसर है।
तरनजीत सिंह संधू ने संगत का धन्यवाद करते हुए कहा, "हमारा परिवार स्वयं को अत्यंत गौरवान्वित और सम्मानित महसूस करता है कि देश की अनेक प्रतिष्ठित हस्तियों और बड़ी संख्या में संगतों ने उनके प्रेरणादायी जीवन और अमर विरासत को श्रद्धांजलि देने के लिए अपनी उपस्थिति दर्ज कराई।"
इस अवसर पर दिल्ली सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के अध्यक्ष हरमीत सिंह कालका और महासचिव जगदीप सिंह काहलों ने कहा कि सरदार तेजा सिंह समुंदरी अकाली आंदोलन (1914–1926) के महान नेता तथा गुरुद्वारा सुधार आंदोलन के प्रमुख शिल्पकारों में से एक थे। उन्होंने पंथक सिद्धांतों के साथ-साथ शिक्षा, सामाजिक समानता और धार्मिक मूल्यों को मजबूत करने में ऐतिहासिक भूमिका निभाई, जिसे सिख समाज सदैव सम्मान के साथ याद रखेगा।
समारोह के दौरान वक्ताओं ने कहा कि सरदार तेजा सिंह समुंदरी का जीवन समाज को एकता, सेवा, त्याग और न्याय का संदेश देता है। उनकी 100वीं शहादत वर्षगांठ का यह ऐतिहासिक आयोजन नई पीढ़ी को उनके आदर्शों से जोड़ने का महत्वपूर्ण अवसर बना। श्रद्धांजलि समारोह के अंत में संगत ने उनके अमर बलिदान को नमन करते हुए समाज में भाईचारे, मानवता और सेवा की भावना को आगे बढ़ाने का संकल्प लिया।


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