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Satluj Movie Ban Controversy | Delhi Gurudwara Committee बोली- History की सच्चाई सामने आनी चाहिए: कालका, काहलों

By प्रदीप कुमार नई दिल्ली: दिल्ली सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी ने मानवाधिकार कार्यकर्ता भाई जसवंत सिंह खालड़ा के जीवन पर आधारित फिल्म 'सतलुज' पर रिलीज़ के दो दिन बाद लगाए गए प्रतिबंध की कड़ी निंदा की है। कमेटी का कहना है कि ऐतिहासिक तथ्यों और सच्चाई को जनता के सामने लाना बेहद आवश्यक है। मीडिया से बातचीत के दौरान कमेटी के अध्यक्ष सरदार हरमीत सिंह कालका और महासचिव सरदार जगदीप सिंह काहलों ने कहा कि इस फिल्म का पहले नाम 'पंजाब 95' था और बाद में बदलकर 'सतलुज' रखा गया। इसे जब ओटीटी प्लेटफॉर्म पर रिलीज़ किया गया, तब संगत में इस बात की संतुष्टि थी कि एक सच्ची घटना पर आधारित फिल्म लोगों तक पहुंची है। उन्होंने कहा कि रिलीज़ के केवल दो दिन के भीतर ही फिल्म पर प्रतिबंध लगाए जाने के फैसले से हर न्यायप्रिय व्यक्ति हैरान और परेशान है।

Satluj Movie Ban Controversy पर Delhi Gurudwara Committee की प्रेस कॉन्फ्रेंस, हरमीत सिंह कालका और जगदीप सिंह काहलों का बयान।

उन्होंने कहा कि यह फिल्म केवल मनोरंजन के उद्देश्य से नहीं बनाई गई थी, बल्कि इसका उद्देश्य 1990 के दशक में पंजाब के कठिन दौर के एक महत्वपूर्ण पक्ष भाई जसवंत सिंह खालड़ा के जीवन को लोगों के सामने लाना था। उन्होंने कहा कि भाई खालड़ा ने जिन मामलों में सिख युवाओं के शवों को लावारिस बताकर अंतिम संस्कार किए जाने के दस्तावेज़ी प्रमाण एकत्र कर सार्वजनिक किए, उन्हें देखकर पूरा समाज स्तब्ध रह गया था।

उन्होंने कहा कि ये सभी तथ्य दस्तावेज़ी साक्ष्यों पर आधारित ऐतिहासिक प्रमाण हैं। चार वर्षों के लंबे संघर्ष के बाद यह फिल्म ओटीटी प्लेटफॉर्म पर रिलीज़ हुई थी, जिसे दुनिया भर में बड़ी संख्या में लोगों ने देखा और इसकी व्यापक सराहना भी की।

उन्होंने कहा कि ऐसे समय में फिल्म पर प्रतिबंध लगाने का निर्णय न केवल फिल्म प्रेमियों बल्कि पूरे सिख समुदाय के लिए भी बड़ा झटका है। उन्होंने सरकार और संबंधित पक्षों से अपील की कि फिल्म को दोबारा उपलब्ध कराया जाए, ताकि पंजाब के उस दुखद दौर और उससे जुड़े ऐतिहासिक तथ्यों से नई पीढ़ी सही तरीके से परिचित हो सके।

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