By प्रदीप कुमार नई दिल्ली: नेशनल बैंक फॉर एग्रीकल्चर एंड रूरल डेवलपमेंट (नाबार्ड) और महाराष्ट्र सरकार की कंपनी महात्मा फुले रिन्यूएबल एनर्जी एंड इंफ्रास्ट्रक्चर टेक्नोलॉजी लिमिटेड (महाप्रीत) ने ग्रामीण भारत में ग्रीन, जलवायु-अनुकूल और टिकाऊ इंफ्रास्ट्रक्चर को फाइनेंस करने और बढ़ावा देने के लिए समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं। इसमें महाराष्ट्र में गांवों, पंचायती राज संस्थानों और कम्युनिटी-लेवल इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने पर खास ध्यान दिया जाएगा।
यह समझौता नाबार्ड की ग्रामीण विकास फाइनेंसिंग, क्लाइमेट फाइनेंसिंग और ग्रीन इंफ्रास्ट्रक्चर फाइनेंसिंग में विशेषज्ञता को महाप्रीत के जलवायु-केंद्रित इंफ्रास्ट्रक्चर विकास के अनुभव के साथ जोड़ता है। इस सहयोग का मकसद ऐसे टिकाऊ प्रोजेक्ट्स की पहचान, विकास, संरचना और फाइनेंसिंग को आसान बनाना है, जो ग्रामीण समृद्धि, जलवायु-अनुकूलता और भारत भर के गांवों में जीवन की बेहतर गुणवत्ता का समर्थन करते हैं।
इस साझेदारी के बारे में बात करते हुए, नाबार्ड के चेयरमैन डॉ. शाजी कृष्णन वी ने कहा, "नाबार्ड स्वच्छ और हरित ग्रामीण भारत को आगे बढ़ाने के लिए सभी समान विचारधारा वाले संबंधित पक्षों के साथ काम करने के लिए प्रतिबद्ध है। हम महाप्रीत के साथ इस साझेदारी को इस दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानते हैं।"
विशेष: विशेषज्ञों का मानना है कि जलवायु परिवर्तन के बढ़ते प्रभावों के बीच ग्रामीण क्षेत्रों में ग्रीन इंफ्रास्ट्रक्चर की आवश्यकता तेजी से बढ़ रही है। ऐसे समय में स्वच्छ ऊर्जा, सौर परियोजनाएं, बायोगैस संयंत्र, ऊर्जा दक्ष सरकारी भवन और आधुनिक ग्रामीण सुविधाएं केवल पर्यावरण संरक्षण तक सीमित नहीं हैं, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी नई दिशा देने का काम करेंगी। इन पहलों से स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर बढ़ेंगे, ऊर्जा लागत में कमी आएगी और किसानों के लिए आय के अतिरिक्त स्रोत विकसित होने की संभावना मजबूत होगी। यही कारण है कि इस तरह की साझेदारियों को भारत के सतत विकास लक्ष्यों की दिशा में महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है।
शुरुआत में, दोनों संगठनों ने ग्रीन एनर्जी, सरकारी इमारतों के लिए डीकार्बोनाइज़ेशन पहल, ग्राम पंचायत इंफ्रास्ट्रक्चर, ग्रामीण सार्वजनिक संस्थानों और वॉटर पंपिंग योजनाओं जैसे प्राथमिकता वाले क्षेत्रों की पहचान की है। ग्रामीण समुदायों की सेवा करने वाले डायरेक्टरेट ऑफ टेक्निकल एजुकेशन संस्थानों, सरकारी अस्पतालों, जिला अस्पतालों और अन्य सार्वजनिक सेवा संस्थानों के लिए स्वच्छ ऊर्जा समाधान लागू करना भी संयुक्त कार्य योजना का हिस्सा है।
बायोगैस और बायोएनर्जी उत्पादन, कृषि अवशेषों और अन्य बायोमास संसाधनों को बढ़ावा देना, किसानों के लिए अतिरिक्त आय के अवसर पैदा करना तथा सर्कुलर इकोनॉमी को मजबूत करना भी इस साझेदारी का महत्वपूर्ण उद्देश्य रहेगा। इसके अलावा ग्राम-स्तरीय निकायों के लिए सोलर-पावर्ड माइक्रो कोल्ड स्टोरेज इंफ्रास्ट्रक्चर विकसित करने की दिशा में भी दोनों संस्थाएं संयुक्त रूप से वित्तीय सहयोग उपलब्ध कराएंगी, जिससे कृषि उत्पादों के संरक्षण और ग्रामीण आपूर्ति श्रृंखला को मजबूती मिलेगी।
नेशनल बैंक फॉर एग्रीकल्चर एंड रूरल डेवलपमेंट (नाबार्ड) भारत का प्रमुख विकास वित्तीय संस्थान है। 12 जुलाई 1982 को स्थापित और मुंबई मुख्यालय वाला नाबार्ड प्रभावी क्रेडिट सहायता, संस्थागत विकास और नवाचार आधारित पहलों के माध्यम से टिकाऊ एवं समावेशी कृषि तथा ग्रामीण समृद्धि को बढ़ावा देने के मिशन के साथ कार्य करता है। नाबार्ड किसानों को सशक्त बनाने, ग्रामीण विकास को गति देने और देश की ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता रहा है।
निष्कर्ष: नाबार्ड और महाप्रीत की यह साझेदारी केवल एक वित्तीय समझौता नहीं, बल्कि ग्रामीण भारत को हरित, ऊर्जा-सक्षम और जलवायु-अनुकूल बनाने की दिशा में एक दूरदर्शी पहल है। यदि इन परियोजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन होता है, तो आने वाले वर्षों में हजारों गांव स्वच्छ ऊर्जा, आधुनिक बुनियादी सुविधाओं और टिकाऊ विकास के नए मॉडल के रूप में उभर सकते हैं। इससे ग्रामीण भारत की आर्थिक मजबूती के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण को भी नई गति मिलने की उम्मीद है।

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