By प्रदीप कुमार नई दिल्ली : बड़े सपने देखना और उन्हें साकार करने के लिए निरंतर अनुसंधान नोवो नॉर्डिस्क की पहचान है। नोवो नॉर्डिस्क इंडिया के प्रबंध निदेशक विक्रांत श्रोत्रिय ने दुनिया की पहली साप्ताहिक बेसल इंसुलिन जारी करते हुए यह बात कही। उन्होंने कहा कि करीब सौ वर्ष पहले किसने सोचा होगा कि मधुमेह के इलाज के लिए इंसुलिन जैसी कोई चीज़ उपलब्ध होगी। इसी तरह हर रोज़ इंसुलिन का इंजेक्शन लेने वाले लोगों ने करीब बीस वर्ष पहले यह नहीं सोचा होगा कि कभी हफ्ते में एक बार लेने वाली इंसुलिन भी बाज़ार में उपलब्ध होगी। नोवो नॉर्डिस्क इंडिया ने आज भारत में अविक्ली (इंसुलिन आइकोडेक) लॉन्ब करने की घोषणा की। यह टाइप 1 या टाइप 2 मधुमेह से जूझ रहे वयस्कों के लिए दुनिया की पहली साप्ताहिक बेसल इंसुलिन है। यह मधुमेह के साथ जी रहे लोगों के इंसुलिन उपचार को पूरी तरह बदलने जा रही है। अब रोज़ाना इंसुलिन लिए जाने की आवश्यकता से घटाकर हफ्ते में सिर्फ एक इंजेक्शन तक करने जा रही है, जिससे सालाना इंजेक्शन का बोझ 365 से घटकर केवल 52 रह जाएगा। यह कोई छोटा सा बदलाव नहीं है, बल्कि यह इस बात की बुनियादी पुनर्कल्पना है कि इंसुलिन लोगों की जिंदगी में किस तरह फिट होती है।
नोवो नॉर्डिस्क इंडिया के प्रबंध निदेशक विक्रांत श्रोत्रिय ने कहा: "अविक्ली का लॉन्च भारत में मधुमेह की देखभाल के लिए ऐतिहासिक पल है। एक सदी से भी ज्यादा समय से नोवो नॉर्डिस्क का एक ही सपना रहा है, इंसुलिन थेरेपी को मरीज़ों के लिए आसान, सुरक्षित और ज्यादा सुलभ बनाना। साप्ताहिक खुराक लंबे समय से हमारा सपना रही है। आज यह भारत के लिए हकीकत बन चुका है। हमें भरोसा है कि अविक्ली इंसुलिन शुरू करने की राह में आने वाली मानसिक और शारीरिक बाधाओं को कम करेगी, और आखिर में ज़्यादा से ज़्यादा लोगों को बेहतर नियंत्रण और बेहतर जीवन गुणवत्ता हासिल करने में मदद करेगी।"
इंद्रप्रस्थ अपोलो हॉस्पिटल्स, नई दिल्ली के सीनियर कंसल्टेंट एंडोक्राइनोलॉजिस्ट और डायबेटोलॉजिस्ट, अपोलो सेंटर फॉर ओबेसिटी, डायबिटीज़ एंड एंडोक्राइनोलॉजी (एकोड), डॉ. एस. के. वांगनू, ने कहा: 'बहुत से मरीजों के लिए मधुमेह प्रबंधन की नींव आज भी इंसुलिन ही है, लेकिन इसे शुरू करने में देरी करना और इसे नियमित रूप से न लेना, क्लिनिकल प्रैक्टिस में नतीजों को कमज़ोर करता रहा है। यह नवाचार उपचार के अनुभव को सचमुच आसान बना देते हैं, वे मरीजों के व्यवहार में बदलाव लाने की क्षमता रखते हैं। साप्ताहिक बेसल इंसुलिन, इंसुलिन शुरू करने से जुड़े डर को कम कर सकती है, और डॉक्टरों को समय पर उपचार के बारे में मरीज़ों से ज्यादा असरदार बातचीत करने में मदद कर सकती है।"
भारत में 10 करोड़ से ज्यादा लोग मधुमेह के साथ जी रहे हैं, जो दुनिया में सबसे ज्यादा बोझ वाले देशों में से एक है। इसके अलावा 13.6 करोड़ लोगों को प्रीडायबिटीज़ है। ऐसे में अविक्ली इस स्थिति में तेज़ी से सुधार में काफी मदद कर सकती है।
भारत में इंसुलिन शुरू करने में औसतन 7 से 9 साल की देरी होती है, जिसकी वजह इंजेक्शन का डर, दर्द की आशंका और खर्च से जुड़ी चिंताएं हैं। साप्ताहिक खुराक से यह स्थिति भी बदलने की आशा है।
⚠️ जरूरी सूचना:
हालांकि, Avikli डॉक्टर की सलाह पर दी जाने वाली प्रिस्क्रिप्शन बेसल इंसुलिन है। इसका उपयोग केवल योग्य चिकित्सक की सलाह और निगरानी में ही किया जाना चाहिए। मरीज बिना डॉक्टर की सलाह के इस दवा का इस्तेमाल न करें।

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