By प्रदीप कुमार नई दिल्ली : दिनांक 18 जून 2026, दिल्ली सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी ने शहीदों के सिरताज पंचम पातशाह गुरु अर्जन देव जी का शहीदी दिवस श्रद्धा एवं सम्मान के साथ मनाया। इस अवसर पर दिल्ली गुरुद्वारा कमेटी के अधीन विभिन्न गुरुद्वारों में गुरमति समागम आयोजित किए गए। मुख्य समागम भाई लखी शाह वंजारा हॉल, गुरुद्वारा रकाबगंज साहिब में आयोजित हुआ, जहां रागी सिंहों के जत्थों ने गुरु की दिव्य वाणी के रसपूर्ण कीर्तन से संगत को निहाल किया।
इस अवसर पर संगत को संबोधित करते हुए कमेटी के अध्यक्ष सरदार हरमीत सिंह कालका और महासचिव सरदार जगदीप सिंह काहलों ने कहा कि सिख पंथ में गुरु साहिबानों, जर्नैलों और श्रद्धालुओं ने अनेक शहादतें दी हैं, लेकिन गुरु अर्जन देव जी को शहीदों का सिरताज इसलिए कहा जाता है क्योंकि शहादतों की परंपरा की शुरुआत उन्हीं से हुई।
उन्होंने कहा कि गुरु अर्जन देव जी की अमूल्य देन आदि ग्रंथ का संपादन था, जिसमें उन्होंने पहले चार गुरु साहिबानों, भट्टों और भक्तों की वाणी को संकलित किया। उन्होंने हमेशा आदि ग्रंथ का अत्यंत सम्मान किया। स्वयं नीचे विश्राम करते थे और आदि ग्रंथ को ऊंचे स्थान पर विराजमान रखते थे।
बाद में दसवें गुरु, गुरु गोबिंद सिंह जी ने नांदेड़ साहिब की पवित्र धरती पर श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी को गुरुगद्दी प्रदान की। उन्होंने कहा कि आज हम सभी गुरु साहिब के समक्ष श्रद्धा अर्पित करते हैं और गुरु ग्रंथ साहिब जी की शिक्षाओं के अनुसार जीवन जीने का प्रयास करते हैं।
गुरु गोबिंद सिंह जी ने खालसा पंथ के रूप में गुरु ग्रंथ साहिब का वारिस तैयार किया और जिम्मेदारी सौंपी कि हम सभी गुरु ग्रंथ साहिब की सेवा, संरक्षण, प्रचार और प्रसार का दायित्व निभाएं। गुरु साहिब ने हमें "अव्वल अल्लाह नूर उपाया" का संदेश दिया और सभी मनुष्यों को समान समझने की शिक्षा दी। आज भी अनेक ऐसे तत्व हैं जो गुरु साहिब के नाम पर अपने स्वार्थ और व्यवसाय चला रहे हैं।
गुरु अर्जन देव जी के शहीदी पर्व पर हमें संकल्प लेना चाहिए कि हम अपने घरों में लगातार सहज पाठ का आयोजन करेंगे। उन्होंने बताया कि दिल्ली गुरुद्वारा कमेटी के धर्म प्रचार विंग ने गर्मियों की छुट्टियों में गुरमति कैंप आयोजित करने शुरू किए हैं और ये कैंप हर वर्ष लगाए जाते हैं। इस वर्ष भी इन कैंपों का समापन 20 और 21 जून को भाई लखी शाह वंजारा हॉल में होगा। उन्होंने संगत से इन कार्यक्रमों में बढ़-चढ़कर भाग लेने की अपील की।
पहले वर्ष इन कैंपों में 4 हजार विद्यार्थी पहुंचे थे, अगले वर्ष 9 हजार, फिर 14 हजार और अब इस वर्ष लगभग 20 हजार बच्चे गुरमति की शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं।
बाबा हरबंस सिंह जी कार सेवा वालों का उल्लेख करते हुए उन्होंने बताया कि उनकी संप्रदाय को दिल्ली में सेवा करते हुए 50 वर्ष पूरे हो चुके हैं। दिल्ली, उत्तर प्रदेश और पंजाब में शायद ही कोई गुरुद्वारा होगा जहां उनकी संप्रदाय की कार सेवा नहीं चल रही हो। उन्होंने कहा कि वर्तमान में इस सेवा की अगुवाई बाबा बचन सिंह जी कर रहे हैं।
बाबा हरबंस सिंह जी की स्मृति में 20 जून की शाम को विशेष दीवान सजाए जाएंगे। उन्होंने संगत से इन कार्यक्रमों में बढ़-चढ़कर भाग लेने और बाबा जी की संप्रदाय द्वारा दिल्ली में की जा रही कार सेवा में योगदान देने की भी अपील की।

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