By प्रदीप कुमार नई दिल्ली: दिल्ली सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के अध्यक्ष सरदार हरमीत सिंह कालका ने पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान से कहा है कि वे श्री अकाल तख्त साहिब के साथ टकराव पैदा करने के बजाय निमाने सिख के रूप में श्री अकाल तख्त साहिब के समक्ष उपस्थित हों और जारी किए गए हुक्मनामे का पालन करें।
मीडिया से बातचीत में बुधवार को सरदार हरमीत सिंह कालका ने कहा कि सिख कौम के लिए श्री अकाल तख्त साहिब सर्वोच्च संस्था है और जत्थेदार साहिब द्वारा जारी किया गया हुक्मनामा ईश्वरीय आदेश के समान माना जाता है। उन्होंने कहा कि दुनिया भर के सिख श्री अकाल तख्त साहिब के आगे विनम्र होकर नतमस्तक होते हैं और तख्त से जारी आदेशों का पालन करते हैं, चाहे वे कितने भी बड़े पद पर क्यों न आसीन हों।
उन्होंने कहा कि भगवंत मान के वैचारिक और राजनीतिक मतभेद हो सकते हैं तथा उन्हें अपनी बात रखने का पूरा अधिकार है, लेकिन श्री अकाल तख्त साहिब के साथ टकराव पैदा करना किसी भी दृष्टि से उचित नहीं है। उन्होंने मुख्यमंत्री को सलाह दी कि वे जत्थेदार साहिब से समय लेकर मुलाकात करें और सभी मुद्दों के समाधान का प्रयास करें, ताकि कौम के भीतर किसी प्रकार का भ्रम या विवाद उत्पन्न न हो।
मुख्यमंत्री द्वारा जत्थेदार पर राजनीतिक दबाव में काम करने के लगाए गए आरोपों पर प्रतिक्रिया देते हुए कालका ने कहा कि यदि हम इतिहास पर नजर डालें तो ऐसे आरोपों में कुछ सच्चाई दिखाई देती है। उन्होंने विशेष रूप से वर्ष 2015 में डेरा सिरसा प्रमुख को दी गई माफी और उसके समर्थन में जारी किए गए 90 लाख रुपये के विज्ञापनों का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि उस समय सिंह साहिबान के पद का राजनीतिक लाभ के लिए दुरुपयोग किया गया था।
कालका ने कहा कि राजनीतिक और वैचारिक मतभेद अपनी जगह हैं, लेकिन श्री अकाल तख्त साहिब की सर्वोच्चता अपनी जगह है। उन्होंने कहा कि सिखों की प्रतिनिधि संस्था होने के नाते दिल्ली गुरुद्वारा कमेटी मुख्यमंत्री को सलाह देती है कि वे इस मामले का समाधान निकालने का प्रयास करें और इसे गलत दिशा में आगे न बढ़ने दें।
परमजीत सिंह सरना द्वारा श्री अकाल तख्त साहिब पर दाढ़ी बांधकर अपनी दलील रखने संबंधी प्रश्न के उत्तर में कालका ने कहा कि सरना से श्री अकाल तख्त साहिब की मर्यादा का सम्मान करने की उम्मीद नहीं की जा सकती। उन्होंने आरोप लगाया कि अतीत में भी सरना ने श्री अकाल तख्त साहिब का विरोध किया तथा दो-दो संगरांद और दो-दो गुरुपर्व मनाकर संगत के बीच भ्रम की स्थिति पैदा की थी।
उन्होंने कहा कि श्री अकाल तख्त साहिब पर जो घटना हुई, उसके लिए जत्थेदार साहिब और वहां मौजूद जत्थेदार टेक सिंह धनौला को भी सरना को रोकना चाहिए था।
कालका ने आरोप लगाया कि यह हमेशा से बादल दल की नीति रही है कि वह हर मुद्दे को तोड़-मरोड़कर पेश करता है और पंथक संस्थाओं का राजनीतिक हितों के लिए उपयोग करता है, जो अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है।

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