रेटिंग: 5 / 4.5
कलाकार: राम चरण, जाह्नवी कपूर, शिव राजकुमार, दिव्येंदु, बोमन ईरानी, रवि किशन और अन्य
लेखन एवं निर्देशन: बुच्ची बाबू सना
संगीत: ए.आर. रहमान
"पेद्दी" सिर्फ एक फिल्म नहीं, बल्कि संघर्ष, जुनून और आत्मविश्वास की ऐसी कहानी है जो दर्शकों के दिल को छू जाती है। थिएटर से बाहर निकलने के बाद अगर कुछ आपके साथ रहता है तो वह है सिर्फ और सिर्फ पेद्दी... पेद्दी... पेद्दी!
राम चरण ने इस फिल्म में खुद को पूरी तरह झोंक दिया है और अपने करियर का शायद अब तक का सर्वश्रेष्ठ अभिनय दिया है। उनकी दमदार मौजूदगी फिल्म की छोटी-मोटी कमियों को भी ढक देती है। कहीं-कहीं फिल्म की रफ्तार धीमी जरूर लगती है, लेकिन राम चरण का अभिनय आपको स्क्रीन से नजरें हटाने नहीं देता।
फिल्म आंध्र प्रदेश के विजयनगरम क्षेत्र के एक ऐसे गांव की कहानी है जिसकी कोई पहचान नहीं है। गांव का नाम तक नहीं है, वहां ट्रेन नहीं रुकती और बुनियादी सुविधाओं की भारी कमी है। ऐसे हालात में पेद्दी नाम का एक युवा अपने गांव को पहचान दिलाने का सपना देखता है और उसके लिए हर चुनौती से लड़ने को तैयार रहता है।
पेद्दी एक ऐसे व्यक्ति की कहानी है जो अपनी मेहनत, लगन और अटूट हौसले के दम पर अपने गांव को राष्ट्रीय स्तर पर एक नई पहचान दिलाता है। यही फिल्म की सबसे बड़ी ताकत है।
फिल्म सिर्फ मनोरंजन नहीं करती, बल्कि एक बड़ी सीख भी देती है—जिंदगी में कितनी भी बड़ी समस्या क्यों न आ जाए, घबराना नहीं चाहिए। मुश्किलों के सामने डटकर खड़े रहना चाहिए, उनके सिर पर पैर रखकर आगे बढ़ना चाहिए और आखिरकार जीत हासिल करनी चाहिए।
पहला हाफ हल्के-फुल्के अंदाज में कहानी को स्थापित करता है। कुछ हिस्से थोड़े धीमे लगते हैं और कहीं-कहीं कहानी कमजोर पड़ती नजर आती है। लेकिन दूसरा हाफ पूरी फिल्म को नई ऊंचाई पर ले जाता है। क्लाइमैक्स और आखिरी मोनोलॉग दर्शकों को भावुक कर देता है और लंबे समय तक याद रहता है।
फिल्म के गाने पहले ही दर्शकों के बीच लोकप्रिय हो चुके हैं। ए.आर. रहमान का संगीत और बैकग्राउंड स्कोर फिल्म के भावनात्मक प्रभाव को कई गुना बढ़ा देता है। तीन घंटे की लंबाई थोड़ी महसूस होती है, लेकिन सेकेंड हाफ की रफ्तार और भावनात्मक पकड़ इसकी भरपाई कर देती है।
राम चरण ने अपने किरदार में जान डाल दी है। उनकी ऊर्जा, भावनाएं, एक्सप्रेशन और स्क्रीन प्रेजेंस कमाल की है। उनका संवाद "आपको लगता होगा कि मैंने खेल खेला है... मैंने जंग लड़ी है साहब, जंग!"
दिव्येंदु हमेशा की तरह शानदार हैं और अपने किरदार में पूरी तरह जमे हैं। शिव राजकुमार प्रभाव छोड़ते हैं, जबकि जगपति बाबू एक अलग अंदाज में नजर आते हैं। जाह्नवी कपूर को सीमित स्क्रीन टाइम मिला है, लेकिन उन्होंने अपनी भूमिका अच्छी तरह निभाई है। बोमन ईरानी और रवि किशन भी अपने छोटे लेकिन प्रभावी किरदारों में याद रह जाते हैं।
निर्देशक बुच्ची बाबू सना का लेखन और निर्देशन सराहनीय है। अगर पहले हाफ को थोड़ा और कस दिया जाता तो फिल्म और भी बेहतर बन सकती थी। हालांकि दूसरे हाफ में उनका निर्देशन शानदार है और उन्होंने राम चरण की प्रतिभा का भरपूर उपयोग किया है।
कुल मिलाकर "पेद्दी" खेल, संघर्ष, सपनों और आत्मविश्वास की एक प्रेरणादायक कहानी है। यह सिर्फ एक स्पोर्ट्स ड्रामा नहीं, बल्कि अपने गांव, अपनी पहचान और अपने सपनों के लिए लड़ने वाले हर इंसान की कहानी है। राम चरण के करियर की बेहतरीन परफॉर्मेंस देखने के लिए यह फिल्म जरूर देखी जानी चाहिए।

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