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Autism Awareness Drive: Safdarjung Tomb जगमगाया नीली रोशनी में, Fortis Gurugram ने Inclusion और Early Detection पर दिया जोर

By विनय मिश्रा नई दिल्ली: गुरुग्राम, 06 अप्रैल, 2026, ऑटिज़्म सेंटर फॉर एक्सीलेंस ने सभ्यता फाउंडेशन तथा फोर्टिस मेमोरियल रिसर्च इंस्टीट्यूट, गुरुग्राम के साथ मिलकर, विश्व ऑटिज़्म जागरूकता माह के दौरान, ऑटिज़्म के विषय में जागरूकता बढ़ाने और समावेशी देखभाल की अपनी साझा प्रतिबद्धता दोहरायी है। इस सिलसिले में प्रतीकात्मक तौर पर संदेश देते हुए, राजधानी दिल्ली में स्थित सफ़दरजंग मकबरे को नीली रोशनी से प्रकाशित किया गया है। नीला रंग दुनियाभर में ऑटिज़्म के बारे में जागरूकता, शांति और स्वीकार्यता का रंग है। इस पहल को सभ्यता फाउंडेशन की मदद से साकार किया गया है और फोर्टिस ने इस बारे में जागरूकता बढ़ाने तथा मीडिया आउटरीच में बढ़-चढ़कर सहयोग दिया।

Safdarjung Tomb illuminated in blue light during Autism Awareness Month in Delhi

इस पहल को प्रतीकात्मकता से आगे बढ़ाकर सार्थक सामुदायिक जुड़ाव को बढ़ावा देने के मकसद से, टीम ने सुंदर नर्सरी में 25 अप्रैल को फलैश मॉब आयोजित करने की योजना बनायी है जो ऑटिज़्म जैसे विषय को इंटरेक्टिव, एक्सेसिबल तथा एंगेजिंग रूप से आम जनता के संवाद का विषय बनाएगा। यह पहल, ऑटिज़्म स्पैक्ट्रम पर मौजूद लोगों के लिए शीघ्र डायग्नॉसिस, स्वीकार्यता और निरंतर सपोर्ट को बढ़ावा देगी। 

इस गतिविधि, के साथ-साथ सुंदर नर्सरी में अलग से जागरूकता स्टॉल भी लगाया जाएगा जहां आने वाले लोगों को ऑटिज़्म के बारे में जानकारी प्रदान करने के लिए महत्वपूर्ण संसाधनों को उपलब्ध कराया जाएगा और शीघ्र हस्तक्षेप, बच्चों एवं परिवारों के लिए आसान एवं सेंसरी-फ्रेंडली गेम्स होंगे। इस स्टॉल पर मेंटल हेल्थ और डेवलपमेंटल केयर के लिए लगातार प्रतिबद्धता प्रदर्शित करने के लिए क्यूरेटेड एजुकेशनल सामग्री और ऑन-ग्राउंड एंगेजमेंट की भी व्यवस्था की जाएगी। 

इस पहल का नेतृत्व करते हुए, डॉ अर्चना नायर, डायरेक्टर, ऑटिज़्म सेंटर फॉर एक्सीलेंस ने कहा, “विश्व ऑटिज़्म जागरूकता माह के अवसर पर, हम केवल जागरूकता का नहीं, बल्कि स्वीकार्यता, समावेशन और न्यूरोडायवर्सिटी (स्नायुगत विविधताएं) की असाधारण सुंदरता का भी उत्सव मना रहे हैं। प्रत्येक ऑटिस्टिक बच्चा दुनिया को देखने, महसूस करने, सीखने और जुड़ने के तौर-तरीके में अनूठापन लाता है – और बतौर शिक्षक, परिजन तथा समुदाय हमारी जिम्मेदारी है कि हम ऐसा माहौल बनाएं जहां उन्हें यह लगे कि उन्हें ठीक से समझा जा रहा है, उन्हें सपोर्ट किया जा रहा है और वे सही मायने में महत्वपूर्ण समझें। ऑटिज़्म सेंटर फॉर एक्सीलेंस में, हमारा मानना है कि जब हम प्रत्येक बच्चे की विशिष्टताओं और उसके अनूठेपन का दयाभाव तथा साक्ष्य-आधारित देखभाल के साथ सम्मान करते हैं, तो हम उन्हें केवल फलने-फूलने का ही अवसर नहीं देते, बल्कि उनके लिए अधिक खुशनुमा, समावेशी और सभी के लिए अधिक मानवीय समाज का भी निर्माण करते हैं।”

विश्व ऑटिज़्म जागरूकता दिवस के मौके पर, सफ़दरजंग मकबरे को नीली रोशनी में प्रकाशमान करने की पहल के बारे में, अवंतिका डालमिया, को-चेयरमैन, एडवाइज़री बोर्ड, सभ्यता फाउंडेशन ने कहा, “हमारा उद्देश्य हमेशा से अपनी धरोहरों/विरासतों को अधिक सहज रूप से लोगों तक पहुंचाने और उन्हें उनके लिए सार्थक बनाना रहा है। इस प्रकार के प्रयास हमारे स माज के मूल्यों और अधिक समोवशी सांस्कृतिक स्थलों को तेयार करने की हमारी प्रतिबद्धता प्रदर्शित करते हैं – ताकि विविधता को न केवल स्वीकार किया जाए बल्कि उसे हर संभव तरीके से अपनाया भी जाए।”

इस पहल के बारे में, डॉ समीर पारीख, चेयरपर्सन, फोर्टिस नेशनल मेंटल हेल्थ प्रोग्राम एंड अदायु माइंडफुलनेस ने कहा, “ऑटिज़्म के बारे में जागरूकता को केवल एक दिन तक ही सीमित रखने की बजाय इसे सतत और सामूहिक जिम्मेदारी बनाने की जरूरत है। इस प्रकार की पहल से ऐसे समावेशी स्थानों को तैयार करने में मदद मिलती है जिनमें परिवारों को ऐसा महसूस हो सके कि उन्हें समझा जा रहा है, और उन्हें सहायता उपलब्ध है, ताकि वे स्वयं को सशक्त समझ सकें। शीघ्र हस्तक्षेप और समाज के स्तर पर अधिक जागरूकता के चलते स्पैक्ट्रम पर मौजूद लोगों को अपनी पूरी क्षमता हासिल करने में सहायता मिलती है। फोर्टिस में, हम क्लीनिकल उत्कृष्टता तथा सामुदायिक प्रयासों के माध्यम से इस बदलाव को साकार करने के लिए पूरी तरह से प्रतिबद्ध हैं।”

यश रावत, फेसिलिटी डायरेक्टर एवं सीनियर वाइस प्रेसीडेंट, फोर्टिस मेमोरियल रिसर्च इंस्टीट्यूट, गुरुग्राम, ने कहा, “फोर्टिस गुरुग्राम में, हमारा मानना है कि हेल्थकेयर का दायरा केवल अस्पतालों तक सीमित नहीं है, बल्कि उनकी दीवारों से बाहर तक जाता है। एसीई के साथ हमारा गठबंधन इस विषय में जागरूकता का प्रसार सामुदायिक स्तर पर करने की दिशा में हमारे प्रयासों को दर्शाता है। आम जनता को सुंदर नर्सरी जैसे खुले और समावेशी स्थलों पर एकजुट कर और उनके साथ बातचीत कर हम दयाभावना का निर्माण करते हुए लोगों को शीघ्र स्क्रीनिंग के लिए प्रेरित करते हैं, ताकि समय पर हस्तक्षेप कर ऑटिज़्म प्रभावित लोगों एवं उनके परिजनों के लिए अधिक समावेशी समाज तैयार किया जा सके। इस तरह के प्रयासों के माध्यम से, फोर्टिस गुरुग्राम और एसीई (एस) लगातार जागरूकता बढ़ाने, डायग्नॉसिस को प्रमोट करने तथा ऑटिज़्म प्रभावित लोगों के लिए समावेशी एवं सहयोगी वातावरण का निर्माण करने के अपने प्रयासों को जारी रखे हुए हैं।”

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