Hot Posts

8/recent/ticker-posts

Mahavir Katha 3.0 Delhi: Acharya Lokesh Muni की मौजूदगी में भव्य आयोजन, Manoj Jain ने बताया शांति और सद्भाव का मंत्र

By विनय मिश्रा नई दिल्ली: राजधानी के प्रतिष्ठित स्थल भारत मंडपम में 5 अप्रैल 2026 को महावीर कथा 3.0 का भव्य एवं आध्यात्मिक आयोजन श्रद्धा और उत्साह के साथ सफलतापूर्वक सम्पन्न हुआ। यह आयोजन भगवान महावीर के 2625 वर्ष पुराने दिव्य संदेशों को पुनः जीवंत करने का एक प्रेरणादायक प्रयास साबित हुआ।

भारत मंडपम में आयोजित महावीर कथा 3.0 कार्यक्रम में आचार्य लोकेश मुनि और श्रद्धालुओं की उपस्थिति

कार्यक्रम के विशेष आकर्षण जैन संत आचार्य लोकेश मुनि रहे, जिनकी गरिमामयी उपस्थिति ने पूरे वातावरण को आध्यात्मिक ऊर्जा से भर दिया। कथा वाचन का दायित्व प्रसिद्ध वक्ता राजीव जैन ‘सीए’ ने निभाया। उनके ओजस्वी और भावपूर्ण कथन ने श्रोताओं को भगवान महावीर के जीवन, सिद्धांतों और त्याग की गहराइयों से जोड़ दिया। कार्यक्रम में उपस्थित हजारों श्रद्धालुओं ने इस दिव्य अनुभव को आत्मसात किया।

समारोह को संबोधित करते हुए मनोनीत नगर पार्षद एवं भगवान महावीर देशना फाउंडेशन के निदेशक मनोज कुमार जैन ने कहा, “भगवान महावीर का संदेश ‘जियो और जीने दो’ आज के समय में और भी प्रासंगिक है। हमारे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी भी हमेशा इस सिद्धांत का समर्थन करते रहे हैं। भारत ने वैश्विक स्तर पर कई समस्याओं के समाधान में अग्रणी भूमिका निभाई है और उम्मीद है कि वर्तमान वैश्विक तनाव को समाप्त करने में भी भारत सकारात्मक पहल करेगा।”

उन्होंने आगे कहा, “भगवान महावीर के तीन मूल सिद्धांत — अहिंसा, अपरिग्रह और आत्मशुद्धि — जीवन के आधार हैं। हमें इनका पालन कर समाज में शांति और सद्भाव को बढ़ावा देना चाहिए।”

मनोज जैन ने आयोजन की सफलता के लिए राजीव जैन (सीए), सुभाष ओसवाल जैन, अनिल कुमार जैन (सीए), प्रदीप जैन, वीणा जैन सहित पूरी टीम को बधाई दी। उन्होंने कार्यक्रम की सूत्रधार अमीषा जैन की विशेष सराहना की, वहीं मधुर भजनों के माध्यम से वातावरण को भक्तिमय बनाने वाले प्रदीप जैन के योगदान को भी सराहा। संस्था के सदस्य सत्य भूषण जैन की भूमिका को भी आयोजन की सफलता में महत्वपूर्ण बताया गया।

महावीर कथा 3.0 केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि आत्मचिंतन, अहिंसा और आध्यात्मिक जागरण का सशक्त मंच बनकर उभरा। कार्यक्रम के समापन पर सभी श्रद्धालुओं ने “जय जिनेन्द्र” के उद्घोष के साथ इस पावन आयोजन को यादगार बना दिया।

एक टिप्पणी भेजें

0 टिप्पणियाँ