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प्रधानमंत्री मोदी के स्वदेशी विज़न को मिली नई पहचान: पोंडुरु खादी को GI टैग, कारीगरों में उत्साह की लहर

Published by : BST News Desk

आंध्र प्रदेश /पोंडुरु : खादी और ग्रामोद्योग आयोग (केवीआईसी), सूक्ष्म, लघु व मध्यम उद्यम मंत्रालय (एमएसएमई), भारत सरकार के अध्यक्ष मनोज कुमार ने शुक्रवार को मीडिया के लिए जारी एक बयान में आंध्र प्रदेश की प्रसिद्ध पोंडुरु खादी को भौगोलिक संकेतक (GI-टैग) प्रदान किए जाने पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रति आभार वक्त किया। उन्होंने जानकारी दी कि पोंडुरु खादी को भौगोलिक संकेतक रजिस्ट्री द्वारा केवीआईसी के पक्ष में GI-टैग प्रदान किया गया है। इस उपलब्धि पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए उन्होंने कहा कि केवीआईसी पोंडुरु खादी को राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने के लिए निरंतर प्रयासरत है।

प्रधानमंत्री मोदी के स्वदेशी विज़न को मिली नई पहचान: पोंडुरु खादी को GI टैग, कारीगरों में उत्साह की लहर

अध्यक्ष केवीआईसी मनोज कुमार ने बताया कि पोंडुरु खादी को GI-टैग प्रदान किया जाना संपूर्ण खादी क्षेत्र के लिए गर्व का विषय है। यह न केवल इस दुर्लभ हस्तकारी वस्त्र की प्रामाणिकता की रक्षा करता है, बल्कि पीढ़ियों से इस परंपरा को संजोए कारीगरों के योगदान को भी सम्मान देता है। उन्होंने आगे कहा कि यह उपलब्धि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन और खादी को वैश्विक पहचान दिलाने के सतत प्रयासों का प्रत्यक्ष परिणाम है। ‘वोकल फॉर लोकल’ और ‘आत्मनिर्भर भारत’ जैसे अभियानों से पारंपरिक कारीगरों को नई ऊर्जा और सम्मान मिला है। उन्होंने घोषणा की कि पोंडुरु खादी के कारीगरों को शीघ्र सम्मानित किया जाएगा। इसके लिए विशेष कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा, जिसमें उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले कत्तिन और बुनकरों को सम्मानित किया जाएगा।

अध्यक्ष केवीआईसी ने बताया कि पोंडुरु खादी आंध्र प्रदेश के श्रीकाकुलम जिले के पोंडुरु गाँव में तैयार किया जाने वाला एक पारंपरिक हस्तनिर्मित सूती कपड़ा है, जिसे स्थानीय लोग पटनुलु कहते हैं। यह कपड़ा पहाड़ी कपास, पुनासा कपास और लाल कपास से बनाया जाता है, जो इसी क्षेत्र में उगाई जाती हैं। कपास की सफाई, कताई और बुनाई की पूरी प्रक्रिया हाथों से की जाती है, जिससे सदियों पुराना पारंपरिक कौशल सुरक्षित रहता है। इसकी सबसे अनोखी विशेषता यह है कि कपास की सफाई के लिए वालुगा मछली के जबड़े की हड्डी का उपयोग किया जाता है, जो विश्व में केवल यहीं देखने को मिलता है। उन्होंने आगे बताया कि पोंडुरु खादी अपनी अत्यधिक उच्च धागा संख्या (यार्न काउंट), लगभग 100-120, के लिये जाना जाता है, जो इसकी बेहद बारीक गुणवत्ता को दर्शाती है।

इस अवसर पर केवीआईसी अध्यक्ष मनोज कुमार ने कहा :

GI टैग मिलने से पोंडुरु खादी को न केवल राष्ट्रीय बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिलेगी, जिससे कारीगरों की आय में वृद्धि होगी और रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे। पोंडुरु खादी महात्मा गांधी के स्वदेशी विचारों से गहराई से जुड़ी हुई है और प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में आज खादी एक फैशन स्टेटमेंट और आत्मनिर्भर भारत का प्रतीक बन चुकी है- जो गाँधी से मोदी युग तक की वैचारिक निरंतरता को दिखाता है।

उन्होंने कहा कि GI टैग प्राप्त होने के बाद अब पोंडुरु खादी को नकली उत्पादों से कानूनी संरक्षण मिलेगा, जिससे उपभोक्ताओं को शुद्ध एवं प्रामाणिक उत्पाद की गारंटी मिलेगी और कारीगरों को उनके श्रम का उचित मूल्य सुनिश्चित होगा।

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