नोएडा/उत्तरप्रदेश : आगामी 2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक सरगर्मियों के बीच अंतरराष्ट्रीय वैश्य संगठन ने वैश्य समाज के राजनीतिक प्रतिनिधित्व का मुद्दा प्रमुखता से उठाया है। संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष विनय अग्रवाल ने सभी राजनीतिक दलों से अपील की है कि आगामी विधानसभा चुनाव में वैश्य समाज के योग्य, शिक्षित, कर्मठ और जनसेवा के प्रति समर्पित प्रतिनिधियों को उचित अवसर दिया जाए। उन्होंने कहा कि वैश्य समाज देश की आर्थिक, सामाजिक और सांस्कृतिक व्यवस्था का मजबूत आधार है। व्यापार, उद्योग, रोजगार सृजन, शिक्षा, चिकित्सा, समाजसेवा और राष्ट्रहित से जुड़े विभिन्न क्षेत्रों में समाज की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। इसके बावजूद राजनीतिक प्रतिनिधित्व में समाज को उसकी जनसंख्या, योगदान और क्षमता के अनुरूप अवसर मिलना आवश्यक है।
आर्थिक मजबूती से लेकर सामाजिक सरोकारों तक वैश्य समाज की महत्वपूर्ण भूमिका
राष्ट्रीय अध्यक्ष विनय अग्रवाल ने कहा कि वैश्य समाज की पहचान केवल व्यापार और व्यवसाय तक सीमित नहीं है। समाज ने सदियों से देश की आर्थिक व्यवस्था को मजबूती प्रदान करने के साथ-साथ उद्योगों की स्थापना, नए रोजगार के अवसर पैदा करने, शिक्षा संस्थानों के विकास, चिकित्सा सुविधाओं के विस्तार और जरूरतमंद लोगों की सहायता में उल्लेखनीय योगदान दिया है। देश की आजादी से लेकर आधुनिक भारत के निर्माण तक वैश्य समाज के अनेक लोगों ने अपने परिश्रम, उद्यमशीलता और सामाजिक प्रतिबद्धता से राष्ट्र की प्रगति में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
उन्होंने कहा कि समाज के व्यापारी और उद्यमी न केवल आर्थिक गतिविधियों को गति देते हैं, बल्कि लाखों परिवारों की आजीविका का माध्यम भी बनते हैं। छोटे दुकानदारों से लेकर बड़े उद्योगपतियों तक वैश्य समाज के लोग देश की अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने में निरंतर सक्रिय हैं। ऐसे में समाज के इस योगदान को राजनीतिक और नीतिगत स्तर पर भी उचित पहचान मिलनी चाहिए।
टिकट वितरण में योग्य वैश्य प्रतिनिधियों को मिले प्राथमिकता के साथ उचित अवसर
विनय अग्रवाल ने आगामी 2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव का उल्लेख करते हुए राजनीतिक दलों से कहा कि प्रत्याशियों के चयन और टिकट वितरण के दौरान वैश्य समाज की राजनीतिक भागीदारी को गंभीरता से लिया जाए। उन्होंने कहा कि समाज में बड़ी संख्या में ऐसे शिक्षित, अनुभवी, सामाजिक रूप से सक्रिय और जनसेवा के प्रति समर्पित लोग मौजूद हैं, जो जनप्रतिनिधि के रूप में अपनी जिम्मेदारियों का प्रभावी निर्वहन करने की क्षमता रखते हैं। राजनीतिक दलों को ऐसे योग्य चेहरों को आगे लाने और चुनाव लड़ने का अवसर प्रदान करना चाहिए।
उन्होंने स्पष्ट किया कि वैश्य समाज की यह मांग किसी अन्य समाज के राजनीतिक अधिकारों या प्रतिनिधित्व के विरुद्ध नहीं है। लोकतंत्र की खूबसूरती सभी वर्गों और समुदायों की समान भागीदारी में निहित है। संगठन का उद्देश्य किसी समाज को पीछे करना नहीं, बल्कि सभी को साथ लेकर चलने वाली राजनीतिक व्यवस्था को मजबूत बनाना है। वैश्य समाज भी लोकतांत्रिक व्यवस्था में अपनी सक्रिय और सम्मानजनक भागीदारी चाहता है।
सर्ववैश्य समाज को एक मंच पर लाने की ऐतिहासिक पहल
अंतरराष्ट्रीय वैश्य संगठन ने वैश्य समाज के विभिन्न घटकों और संगठनों को एक साझा मंच पर लाने की दिशा में भी महत्वपूर्ण पहल की है। संगठन का उद्देश्य समाज के अलग-अलग वर्गों के बीच आपसी समन्वय, एकता, सहयोग और सामाजिक सहभागिता को बढ़ावा देना है। संगठन का मानना है कि जब समाज के विभिन्न घटक एकजुट होकर अपनी बात रखेंगे, तो उनकी सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक आवाज भी अधिक प्रभावशाली होगी।
इसी उद्देश्य को लेकर आयोजित पत्रकार वार्ता में अग्रवाल, जैन, खंडेलवाल, माहेश्वरी, पोरवाल, वाष्र्णेय, माथुर, चोसेनी, जायसवाल, केसरवानी, साहू, रोनियार, बरनवाल, महावरे और चौरसिया सहित विभिन्न वैश्य समाजों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया। इसके अतिरिक्त भारत विकास परिषद, उत्तर प्रदेश उद्योग व्यापार मंडल, श्री जी गौसदन और अखिल भारतीय अग्रवाल वैश्य मित्र मंडल से जुड़े प्रतिनिधियों की उपस्थिति ने इस पहल को व्यापक सामाजिक स्वरूप प्रदान किया।
विभिन्न वैश्य घटकों की भागीदारी ने दिया एकजुटता का संदेश
पत्रकार वार्ता में अग्रवाल वैश्य समाज की ओर से मूलचंद गुप्ता, भूपेंद्र मित्तल, नेत्रपाल अग्रवाल, बलराज गोयल, संदीप अग्रवाल, संजय गोयल, डॉ. विकास बंसल और जितेंद्र अग्रवाल शामिल रहे। जैन वैश्य समाज से डॉ. एस.पी. जैन, खंडेलवाल वैश्य समाज से राजेश खंडेलवाल, माहेश्वरी वैश्य समाज से कपिल लाखोटिया, पोरवाल वैश्य समाज से सुधीर पोरवाल तथा वाष्र्णेय वैश्य समाज से अखिलेश वाष्र्णेय ने सहभागिता की।
इसके अलावा माथुर वैश्य समाज से संजय गुप्ता, चोसेनी वैश्य समाज से ए.एस. गुप्ता, जायसवाल वैश्य समाज से ललित जायसवाल, केसरवानी वैश्य समाज से अमित केसरी, साहू वैश्य समाज से कृष्णा साहू, रोनियार वैश्य समाज से आई.डी. शाह, बरनवाल वैश्य समाज से शैलेन्द्र बरनवाल, महावरे वैश्य समाज से राकेश गुप्ता, चौरसिया वैश्य समाज से दिनेश्वर चौरसिया तथा महावर वैश्य समाज से दिनेश महावर ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराई।
भारत विकास परिषद से संजय वाष्र्णेय, उत्तर प्रदेश उद्योग व्यापार मंडल से संजय जैन, श्री जी गौसदन से सीए विकास अग्रवाल और अखिल भारतीय अग्रवाल वैश्य मित्र मंडल से राधा कृष्ण गर्ग भी इस अवसर पर मौजूद रहे। विभिन्न संगठनों और समाजों के प्रतिनिधियों की भागीदारी ने यह संदेश दिया कि आपसी एकता और साझा नेतृत्व के माध्यम से समाज की सामूहिक शक्ति को और अधिक मजबूत किया जा सकता है।
संगठन का उद्देश्य सामाजिक एकता के साथ राजनीतिक जागरूकता को बढ़ावा देना
संगठन की पहल केवल राजनीतिक प्रतिनिधित्व की मांग तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके माध्यम से वैश्य समाज में आपसी सहयोग, संगठनात्मक मजबूती और सामूहिक नेतृत्व विकसित करने का प्रयास भी किया जा रहा है। संगठन का मानना है कि समाज की वास्तविक शक्ति उसकी एकजुटता, सामाजिक सक्रियता और संगठित आवाज में होती है। यदि विभिन्न वैश्य घटक एक मंच पर आकर सामाजिक और राष्ट्रीय मुद्दों पर अपनी भागीदारी सुनिश्चित करें, तो इससे समाज के साथ-साथ देश के लोकतांत्रिक ढांचे को भी मजबूती मिलेगी।
विनय अग्रवाल ने दोहराया कि वैश्य समाज हमेशा राष्ट्र और समाज के विकास में अपनी जिम्मेदारी निभाता आया है और भविष्य में भी पूरी निष्ठा से निभाता रहेगा। अब समय है कि समाज के आर्थिक और सामाजिक योगदान के साथ उसकी राजनीतिक क्षमता को भी उचित सम्मान मिले। उन्होंने राजनीतिक दलों से आग्रह किया कि वे केवल चुनावी आश्वासनों तक सीमित न रहें, बल्कि टिकट वितरण और जनप्रतिनिधित्व में वैश्य समाज को वास्तविक अवसर प्रदान करें।
एकजुटता, सम्मान और भागीदारी को लेकर आगे बढ़ेगा संगठन
अंतरराष्ट्रीय वैश्य संगठन ने स्पष्ट किया कि समाज के सभी घटकों को साथ लेकर चलना, आपसी संवाद को बढ़ावा देना और सामाजिक हितों से जुड़े मुद्दों को उचित मंच तक पहुंचाना उसकी प्राथमिकताओं में शामिल है। संगठन की इस पहल से वैश्य समाज की सामूहिक भागीदारी को नई दिशा मिलने की उम्मीद है। अब देखना होगा कि 2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में विभिन्न राजनीतिक दल वैश्य समाज की इस मांग को कितनी गंभीरता से लेते हैं और अपने प्रत्याशी चयन में समाज को कितना प्रतिनिधित्व देते हैं।


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