By विनय मिश्रा नई दिल्ली : भारतीय सिनेमा की सबसे चर्चित और महत्वाकांक्षी फिल्मों में शामिल नितेश तिवारी की 'रामायण पार्ट-1' आखिरकार बड़े पर्दे पर दस्तक दे चुकी है। भगवान श्रीराम की मर्यादा, माता सीता की शक्ति और लंकापति रावण के अहंकार की महागाथा को आधुनिक तकनीक और विशाल सिनेमाई कैनवस पर पेश करने की कोशिश की गई है। रणबीर कपूर, यश और साई पल्लवी जैसे सितारों से सजी यह फिल्म सिर्फ एक पौराणिक कहानी का दोहराव नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति, आस्था और भावनाओं को भव्य सिनेमाई रूप देने का प्रयास है।
फिल्म को लेकर दर्शकों की उम्मीदें पहले से ही आसमान पर थीं। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल था कि क्या नितेश तिवारी रामायण जैसी कालजयी गाथा के साथ न्याय कर पाए हैं? क्या रणबीर कपूर भगवान श्रीराम की मर्यादा को पर्दे पर जीवंत कर पाए हैं और क्या यश का रावण दर्शकों के जेहन में अपनी अलग छाप छोड़ता है? फिल्म देखने के बाद कहा जा सकता है कि इसका विशाल विजुअल संसार और कुछ दमदार अभिनय इसे खास बनाते हैं, लेकिन कहानी की रफ्तार और भावनात्मक गहराई के मोर्चे पर अभी भी कुछ कमियां नजर आती हैं।
कहानी: रावण के अहंकार से राम के वनवास तक, महायुद्ध की तैयार होती जमीन
'रामायण पार्ट-1' की कहानी की शुरुआत भगवान श्रीराम से नहीं, बल्कि लंकापति रावण के उदय से होती है। फिल्म पहले दर्शकों को उस संसार में लेकर जाती है, जहां तपस्या, ज्ञान, शक्ति और महत्वाकांक्षा के दम पर रावण अपनी पहचान स्थापित करता है। ब्रह्मा से वरदान प्राप्त करने, इंद्र को पराजित करने और कुबेर से लंका का अधिकार हासिल करने तक की घटनाएं उसके बढ़ते साम्राज्य और अहंकार की पृष्ठभूमि तैयार करती हैं।
यश का किरदार रावण केवल एक शक्तिशाली खलनायक के तौर पर सामने नहीं आता, बल्कि उसकी महत्वाकांक्षा, बुद्धिमत्ता, संगीत प्रेम और सत्ता की भूख को भी कहानी में जगह मिलती है।
इसके बाद कहानी अयोध्या की ओर बढ़ती है, जहां राजा दशरथ के घर भगवान विष्णु के अवतार श्रीराम का जन्म होता है। उनका बचपन, शिक्षा, ऋषि विश्वामित्र के साथ यात्रा, ताड़का वध और मिथिला में माता सीता के स्वयंवर जैसे प्रसंग कहानी को आगे बढ़ाते हैं। शिव धनुष तोड़कर राम का सीता से विवाह फिल्म के खूबसूरत और महत्वपूर्ण हिस्सों में शामिल है।
लेकिन अयोध्या के राजमहल में कैकेयी के दो वरदान मांगने के बाद परिस्थितियां पूरी तरह बदल जाती हैं। श्रीराम को चौदह वर्षों का वनवास मिलता है। पिता के वचन और राजधर्म की मर्यादा को सर्वोपरि रखते हुए राम वन जाने का निर्णय लेते हैं। माता सीता और लक्ष्मण भी उनके साथ वनवास पर निकल पड़ते हैं।
वनवास के दौरान शूर्पणखा का प्रसंग, खर-दूषण का संघर्ष, स्वर्ण मृग का मायाजाल और अंततः रावण द्वारा माता सीता का हरण कहानी को निर्णायक मोड़ तक पहुंचाते हैं। माता सीता की रक्षा के लिए जटायु का रावण से संघर्ष फिल्म का एक महत्वपूर्ण और प्रभावशाली दृश्य है।
फिल्म का पहला भाग सीता हरण के बाद समाप्त होता है। यानी राम और रावण के बीच होने वाला महायुद्ध अभी बाकी है। हनुमान जी की लंका यात्रा, अशोक वाटिका, रामसेतु और लंका विजय जैसे बड़े प्रसंगों के लिए अगले भाग की भूमिका तैयार की गई है।
निर्देशन: नितेश तिवारी ने भव्यता के साथ संभाली आस्था की जिम्मेदारी
'दंगल' और 'छिछोरे' जैसी सफल फिल्मों से अपनी पहचान बना चुके नितेश तिवारी के सामने इस बार चुनौती बिल्कुल अलग थी। रामायण केवल मनोरंजन की कहानी नहीं, बल्कि करोड़ों लोगों की आस्था और भारतीय संस्कृति से जुड़ा महाकाव्य है। ऐसे में इसके किरदारों और प्रसंगों को पर्दे पर उतारना किसी बड़े इम्तिहान से कम नहीं था।
निर्देशक ने कहानी को रावण के उदय से शुरू करके एक अलग दृष्टिकोण देने की कोशिश की है। इससे दर्शकों को राम और रावण दोनों के संसार को समझने का अवसर मिलता है। अयोध्या की मर्यादा और लंका के वैभव के बीच अंतर को भी प्रभावशाली तरीके से स्थापित किया गया है।
फिल्म की अच्छी बात यह है कि इसमें केवल युद्ध और बड़े दृश्यों पर ध्यान नहीं दिया गया, बल्कि राम-लक्ष्मण का भाईचारा, राम-सीता का प्रेम, पिता दशरथ की भावनाएं और कैकेयी के निर्णय से पैदा हुआ पारिवारिक संघर्ष भी दिखाया गया है।
हालांकि, कुछ जगहों पर निर्देशक कहानी को जरूरत से ज्यादा विस्तार देते नजर आते हैं। कई प्रसंगों में भावनात्मक ठहराव और स्क्रीनप्ले की कसावट थोड़ी और बेहतर हो सकती थी। फिर भी नितेश तिवारी का विशाल विजन और पौराणिक संसार को पर्दे पर रचने की कोशिश सराहनीय है।
अभिनय: यश का रावण दमदार, रणबीर के राम में संयम तो साई पल्लवी ने दिखाई गरिमा
फिल्म की सबसे बड़ी ताकत इसके कलाकारों का प्रदर्शन है, हालांकि सभी किरदारों का प्रभाव एक जैसा नहीं रहता।
रणबीर कपूर (भगवान श्रीराम): रणबीर कपूर ने राम के किरदार में शांति, गंभीरता और संयम लाने की कोशिश की है। उनके अभिनय में गरिमा और सौम्यता दिखाई देती है। वनवास स्वीकार करने और पारिवारिक रिश्तों से जुड़े दृश्यों में उनका शांत अंदाज अच्छा लगता है। हालांकि, कुछ महत्वपूर्ण भावनात्मक दृश्यों में उनसे और अधिक प्रभावशाली अभिव्यक्ति की उम्मीद रहती है। राम के व्यक्तित्व की विशालता को पूरी तरह आत्मसात करने में उनका प्रदर्शन कुछ जगह कमजोर पड़ता है।
यश (रावण): फिल्म के सबसे प्रभावशाली किरदारों में यश का रावण शामिल है। उनकी दमदार स्क्रीन प्रेजेंस, रौबदार व्यक्तित्व और संवाद अदायगी पर्दे पर अलग ही प्रभाव पैदा करती है। रावण की महत्वाकांक्षा, क्रोध, शक्ति और अहंकार को उन्होंने अपने अंदाज में जीवंत किया है। खास बात यह है कि वह रावण को सिर्फ एक क्रूर शासक के रूप में नहीं, बल्कि ज्ञान और सत्ता के जुनून से भरे व्यक्तित्व के रूप में प्रस्तुत करते हैं। कई दृश्यों में उनका अभिनय फिल्म की सबसे बड़ी उपलब्धि बनकर सामने आता है।
साई पल्लवी (माता सीता): साई पल्लवी ने सीता के किरदार में सहजता, संवेदनशीलता और गरिमा लाने का प्रयास किया है। उनकी स्वाभाविक अदाकारी किरदार को भावनात्मक आधार देती है। हालांकि, कुछ दृश्यों में उनके चरित्र को और अधिक विस्तार तथा प्रभावशाली प्रस्तुति की जरूरत महसूस होती है। सीता की शक्ति और आत्मविश्वास को और गहराई से उभारने की गुंजाइश थी।
रवि दुबे (लक्ष्मण): रवि दुबे फिल्म में एक मजबूत प्रभाव छोड़ते हैं। भाई के प्रति समर्पण, संवादों में सहजता और जरूरत पड़ने पर आक्रामक अंदाज उनके किरदार को जीवंत बनाता है। गंभीर प्रसंगों के बीच उनका हल्का हास्य भी दर्शकों को राहत देता है।
इसके अलावा अरुण गोविल राजा दशरथ के रूप में भावनात्मक गहराई जोड़ते हैं। लारा दत्ता कैकेयी, रकुल प्रीत सिंह शूर्पणखा और शीबा चड्ढा मंथरा के किरदारों में अपनी उपस्थिति दर्ज कराती हैं। विवेक ओबेरॉय और अन्य सहायक कलाकार भी कहानी को आगे बढ़ाने में योगदान देते हैं। अनुपम खेर की आवाज में जटायु का किरदार विशेष रूप से ध्यान खींचता है। वहीं सनी देओल की हनुमान के रूप में झलक अगले भाग के लिए उत्सुकता बढ़ाती है।
VFX और सिनेमैटोग्राफी: अयोध्या से लंका तक, आंखों के सामने जीवंत हुआ पौराणिक संसार
फिल्म का सबसे बड़ा आकर्षण इसका तकनीकी पक्ष है। अयोध्या के राजमहल, मिथिला की सुंदरता, लंका का स्वर्णिम वैभव, विशाल प्राकृतिक दृश्य और युद्ध के रोमांचक सीक्वेंस बड़े पर्दे पर शानदार प्रभाव पैदा करते हैं।
फिल्म का प्रोडक्शन डिजाइन और सिनेमैटोग्राफी पौराणिक दुनिया को एक अलग पहचान देते हैं। खासतौर पर लंका के दृश्य, रावण की विशाल सेना और जटायु-रावण का संघर्ष तकनीकी स्तर पर ध्यान खींचते हैं।
VFX के जरिए विशालकाय जीवों, दिव्य अस्त्र-शस्त्र और मायावी संसार को रचने का प्रयास किया गया है। कई दृश्यों में तकनीक का इस्तेमाल शानदार है, लेकिन कुछ जगह CGI की कृत्रिमता भी महसूस होती है। कुछ राक्षसों और डिजिटल किरदारों के दृश्यों में और बेहतर काम किया जा सकता था।
इसके बावजूद फिल्म का विजुअल स्केल भारतीय सिनेमा की तकनीकी महत्वाकांक्षा को एक बड़े स्तर पर पेश करता है। इसे मोबाइल स्क्रीन की बजाय बड़े पर्दे पर देखने का अनुभव कहीं ज्यादा प्रभावशाली हो सकता है।
संगीत: ए.आर. रहमान और हंस जिमर की जोड़ी से उम्मीदें बड़ी, लेकिन यादगार धुनों की कमी
फिल्म के संगीत की जिम्मेदारी ए.आर. रहमान और हंस जिमर जैसे दिग्गज संगीतकारों ने संभाली है। दोनों का साथ आना अपने आप में बड़ी उपलब्धि है। फिल्म के कई दृश्यों में बैकग्राउंड स्कोर कहानी के प्रभाव को बढ़ाता है और महत्वपूर्ण घटनाओं को भव्यता प्रदान करता है।
लेकिन इतनी बड़ी महागाथा के लिए दर्शकों को जिस यादगार संगीत और थीम की उम्मीद थी, वह हर जगह पूरी होती नजर नहीं आती। कुछ दृश्यों में संगीत प्रभावशाली है, लेकिन राम और रावण जैसे विराट किरदारों के लिए ऐसी धुनों की जरूरत महसूस होती है, जो थिएटर से बाहर आने के बाद भी दर्शकों के मन में गूंजती रहें।
इस मोर्चे पर फिल्म को और बेहतर बनाया जा सकता था।
फिल्म की सबसे बड़ी खूबियां और कमजोरियां क्या है खास?
- यश का प्रभावशाली रावण अवतार।
- भव्य VFX और शानदार प्रोडक्शन डिजाइन।
- अयोध्या और लंका का आकर्षक सिनेमाई संसार।
- जटायु और रावण के बीच रोमांचक संघर्ष।
- रवि दुबे और अरुण गोविल का प्रभावशाली अभिनय।
- रामायण के परिचित प्रसंगों को बड़े पर्दे पर देखने का नया अनुभव।
- अगले भाग को लेकर उत्सुकता जगाता अंत।
कहां रह गई कमी?
- कुछ हिस्सों में कहानी की धीमी रफ्तार।
- तीन घंटे से अधिक की लंबाई को थोड़ा कम किया जा सकता था।
- कुछ संवाद अपेक्षित प्रभाव नहीं छोड़ते।
- कुछ दृश्यों में VFX की कृत्रिमता।
- संगीत में एक यादगार थीम की कमी।
- कुछ भावनात्मक प्रसंगों में किरदारों को और गहराई देने की जरूरत।
फाइनल वर्डिक्ट: रामायण की भव्यता देखने थिएटर जाएं या नहीं?
नितेश तिवारी की 'रामायण पार्ट-1' भारतीय सिनेमा की एक महत्वाकांक्षी और बड़े पैमाने पर तैयार की गई पौराणिक फिल्म है। इसकी सबसे बड़ी ताकत इसका विशाल विजुअल संसार, तकनीकी भव्यता और यश का दमदार रावण अवतार है। रणबीर कपूर ने राम के किरदार में संयम दिखाया है, जबकि साई पल्लवी ने सीता के रूप में गरिमा और सहजता लाने की कोशिश की है।
हालांकि, रामायण जैसी भावनात्मक और आध्यात्मिक महागाथा में केवल शानदार VFX और बड़े सेट पर्याप्त नहीं होते। किरदारों के भीतर की भावनाएं, संवादों का प्रभाव और कहानी की गति भी उतनी ही महत्वपूर्ण हैं। यही वह मोर्चा है जहां फिल्म कुछ जगह उम्मीदों से पीछे रह जाती है।
फिल्म का पहला भाग राम और रावण के बीच होने वाले निर्णायक संघर्ष की जमीन तैयार करता है। इसलिए इसका अंत दर्शकों के मन में अगले अध्याय को लेकर उत्सुकता छोड़ता है।
हमारा फैसला: अगर आप रामायण की महागाथा को आधुनिक तकनीक, विशाल दृश्यों और शानदार सिनेमाई अनुभव के साथ बड़े पर्दे पर देखना चाहते हैं, तो यह फिल्म एक बार जरूर देख सकते हैं। खासकर यश का रावण अवतार और जटायु से जुड़ा दृश्य फिल्म के यादगार हिस्सों में शामिल हैं। हालांकि, अगर आपकी प्राथमिकता गहरी भावनात्मक कहानी, तेज रफ्तार और हर किरदार का प्रभावशाली चित्रण है, तो कुछ जगह निराशा हो सकती है।
रेटिंग: ⭐ 3.5/5
फिल्म: रामायण पार्ट-1
निर्देशक: नितेश तिवारी
मुख्य कलाकार: रणबीर कपूर, यश, साई पल्लवी, रवि दुबे
अन्य कलाकार: अरुण गोविल, रकुल प्रीत सिंह, लारा दत्ता, विवेक ओबेरॉय, सनी देओल और अनुपम खेर (आवाज)
संगीत: ए.आर. रहमान और हंस जिमर
शैली: पौराणिक / महाकाव्य
रिलीज डेट: 5 नवंबर 2026

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