By विनय मिश्रा नई दिल्ली : दिनांक 20 अक्टूबर 2026, रमेश नगर स्थित मानसरोवर गार्डन बस्ती में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के स्वयंसेवकों द्वारा 101वां संघ स्थापना दिवस एवं विजयादशमी उत्सव श्रद्धा, उल्लास और राष्ट्रभावना के साथ मनाया गया। कार्यक्रम में संघ की विचारधारा, सामाजिक समरसता, सेवा, अनुशासन और राष्ट्र के प्रति समर्पण का संदेश प्रमुखता से सामने आया। उत्सव के दौरान स्वयंसेवकों का अनुशासित पथ संचलन आकर्षण का केंद्र रहा, जहां कदम से कदम मिलाकर आगे बढ़ते स्वयंसेवकों ने संगठनात्मक एकता और सामूहिक अनुशासन का परिचय दिया।
दिल्ली प्रांत के कार्यवाह अनिल जी ने बताया संघ का मूल उद्देश्य
कार्यक्रम में दिल्ली प्रांत के कार्यवाह अनिल जी मुख्य वक्ता के रूप में उपस्थित रहे। अपने प्रेरणादायी उद्बोधन में उन्होंने विजयादशमी के ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक महत्व पर प्रकाश डालते हुए राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की स्थापना के मूल उद्देश्यों और व्यक्ति निर्माण की विशिष्ट कार्यपद्धति को विस्तार से समझाया। उन्होंने कहा कि संघ की कार्यपद्धति में व्यक्ति निर्माण के माध्यम से समाज और राष्ट्र के प्रति जिम्मेदारी का भाव विकसित करना महत्वपूर्ण है। उनका संदेश था कि मजबूत समाज की नींव जागरूक, चरित्रवान और कर्तव्यनिष्ठ नागरिकों से तैयार होती है।
हिंदू पहचान विविधता में एकता और सांस्कृतिक समरसता का प्रतीक
अपने संबोधन में अनिल जी ने हिंदू संस्कृति की व्यापकता को रेखांकित करते हुए कहा कि हिंदू केवल किसी एक पूजा-पद्धति का नाम नहीं, बल्कि एक व्यापक सांस्कृतिक पहचान है। इस संस्कृति में विभिन्न उपासना-पद्धतियों, आस्थाओं और परंपराओं के लिए स्थान है। उन्होंने विविधताओं के बीच एकात्मता की भावना को सामाजिक जीवन की महत्वपूर्ण शक्ति बताया। उनके अनुसार, सांस्कृतिक जुड़ाव और परस्पर सम्मान समाज को एक सूत्र में बांधने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
प्रयागराज महाकुंभ का उदाहरण देकर समझाया सामाजिक समरसता का महत्व
सामाजिक समरसता के विषय पर चर्चा करते हुए अनिल जी ने प्रयागराज महाकुंभ का प्रेरक उदाहरण प्रस्तुत किया। उन्होंने बताया कि लगभग 65 करोड़ श्रद्धालुओं के महाकुंभ में पहुंचने को हिंदू पहचान से जुड़ी भावनात्मक एकात्मता के उदाहरण के रूप में देखा जा सकता है। विभिन्न जातियों, क्षेत्रों और सामाजिक पृष्ठभूमियों से आए श्रद्धालु अनेक कठिनाइयों के बावजूद अपनी आस्था के साथ संगम पहुंचे। पवित्र संगम में डुबकी लगाने की साझा भावना ने लोगों को एक व्यापक सांस्कृतिक जुड़ाव का अनुभव कराया।
उन्होंने जोर देते हुए कहा कि सामाजिक समरसता केवल भाषणों और विचारों तक सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि हमारे व्यवहार, आपसी संबंधों और दैनिक जीवन में भी दिखाई देनी चाहिए। समाज में भेदभाव से ऊपर उठकर परस्पर सम्मान, सहयोग और आत्मीयता का वातावरण बनाना समय की महत्वपूर्ण आवश्यकता है।
युवा पीढ़ी को बताया ‘Most Intelligent Generation’
युवा पीढ़ी की क्षमता और बदलते समय की चुनौतियों पर विचार रखते हुए अनिल जी ने आज की पीढ़ी को “Most Intelligent Generation” की संज्ञा दी। उन्होंने वरिष्ठ स्वयंसेवकों से आग्रह किया कि युवाओं की त्रुटियों पर केवल उन्हें टोकने के बजाय उनकी बात समझने, उन्हें सही दिशा देने और उनकी प्रतिभा को निखारने पर अधिक ध्यान दिया जाए। उन्होंने कहा कि नई पीढ़ी तेजी से कार्य करने, प्रामाणिकता के साथ अपने दायित्व निभाने और बदलती परिस्थितियों के अनुरूप स्वयं को ढालने में सक्षम है।
उन्होंने अनुभव और युवा ऊर्जा के समन्वय को भविष्य के निर्माण के लिए आवश्यक बताते हुए कहा कि वरिष्ठों का मार्गदर्शन और युवाओं का पुरुषार्थ मिलकर समाज को नई दिशा दे सकते हैं। उनका संदेश था कि पीढ़ियों के बीच संवाद और विश्वास को मजबूत बनाकर युवाशक्ति की क्षमताओं का सकारात्मक उपयोग किया जाना चाहिए।
सेवा कार्यों में जुटी सज्जन शक्ति की भूमिका पर दिया जोर
अनिल जी ने अपने उद्बोधन में समाज के विभिन्न क्षेत्रों में सज्जन शक्ति द्वारा संचालित अनेक सेवा कार्यों का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि समाज में ऐसे अनेक बंधु हैं, जो संघ की शाखाओं के नियमित स्वयंसेवक नहीं हैं, लेकिन सेवा, समर्पण और सामाजिक दायित्वों के निर्वहन में महत्वपूर्ण योगदान दे रहे हैं। ऐसे लोगों के प्रयास समाज को मजबूत बनाने में अहम भूमिका निभाते हैं।
उन्होंने सामाजिक कार्यों में सक्रिय प्रत्येक व्यक्ति के योगदान को महत्वपूर्ण बताते हुए सेवा भावना, सहयोग और सामाजिक जिम्मेदारी को व्यापक स्तर पर प्रोत्साहित करने का संदेश दिया। उनके अनुसार, समाजहित में कार्य करने वाले सभी लोगों की सकारात्मक ऊर्जा को साथ लेकर चलना सामाजिक एकता को मजबूत करने का महत्वपूर्ण माध्यम है।
मदनलाल खुराना स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स से निकला भव्य पथ संचलन
प्रेरणादायी उद्बोधन के पश्चात स्वयंसेवकों का पथ संचलन मदनलाल खुराना स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स से प्रारंभ हुआ। निर्धारित मार्ग पर कदम से कदम मिलाकर आगे बढ़ते स्वयंसेवकों की सधी हुई कदमताल और घोष वादकों की मधुर, लयबद्ध ध्वनियों ने वातावरण को उत्साह, अनुशासन और राष्ट्रभावना से भर दिया। पथ संचलन के दौरान स्वयंसेवकों की एकरूपता और सामूहिक अनुशासन ने कार्यक्रम को विशेष स्वरूप प्रदान किया।
मानसरोवर गार्डन बस्ती के विभिन्न मार्गों से गुजरते पथ संचलन का स्थानीय निवासियों ने अनेक स्थानों पर पुष्पवर्षा कर आत्मीय स्वागत किया। लोगों का यह स्वागत स्वयंसेवकों और स्थानीय समाज के बीच आपसी जुड़ाव, सद्भाव और विश्वास की झलक प्रस्तुत करता नजर आया। पूरे मार्ग में उत्सवपूर्ण वातावरण के बीच स्वयंसेवकों का संचलन लोगों के आकर्षण का केंद्र बना रहा।
जयप्रकाश गुलाटी की गरिमामयी उपस्थिति, डी-ब्लॉक पार्क में हुआ समापन
कार्यक्रम में मोतीनगर जिला के माननीय संघचालक जयप्रकाश गुलाटी जी की गरिमामयी उपस्थिति रही। उनकी उपस्थिति ने कार्यक्रम की महत्ता को और बढ़ाया। संघ स्थापना दिवस और विजयादशमी उत्सव के अवसर पर आयोजित इस कार्यक्रम में उद्बोधन से लेकर पथ संचलन तक अनुशासन, सामाजिक समरसता, सेवा और राष्ट्र के प्रति समर्पण की भावना प्रमुखता से दिखाई दी।
लगभग तीन किलोमीटर का मार्ग तय करने के पश्चात पथ संचलन डी-ब्लॉक पार्क में संपन्न हुआ। इस आयोजन ने संघ स्थापना दिवस और विजयादशमी के अवसर पर संगठनात्मक एकता, सामाजिक सहभागिता तथा राष्ट्रभावना के संदेश को स्थानीय स्तर पर प्रमुखता से प्रस्तुत किया।

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