By विनय मिश्रा नई दिल्ली : देश-विदेश में विख्यात लव कुश रामलीला कमेटी की ओर से लाल किला मैदान में आयोजित भव्य रामलीला में उस समय आस्था, रोमांच और भक्ति का अद्भुत संगम देखने को मिला, जब विशाल क्रेनों की मदद से भगवान हनुमान जी 220 फीट की ऊंचाई पर आकाश मार्ग से चमकती संजीवनी बूटी से सजा विशाल पर्वत लेकर पहुंचे। आसमान में पर्वत उठाए हनुमान जी का यह भव्य दृश्य इतना मनोहारी था कि लीला मैदान में मौजूद हजारों रामभक्त अपनी नजरें इस अद्भुत प्रस्तुति से हटा नहीं सके। हर तरफ श्रद्धा और उत्साह का माहौल नजर आया, वहीं दर्शक अपने मोबाइल कैमरों में इस ऐतिहासिक पल को कैद करने में जुट गए। मोबाइल फोन की चमकती रोशनी से पूरा लीला मैदान जगमगा उठा और जय श्रीराम के जयकारों ने वातावरण को भक्तिमय बना दिया।
लव कुश रामलीला कमेटी के अध्यक्ष अर्जुन कुमार ने बताया कि रामलीला में आधुनिक तकनीक, विशाल क्रेनों और प्रभावशाली मंचीय प्रस्तुतियों के माध्यम से रामायण के प्रमुख प्रसंगों को जीवंत रूप में प्रस्तुत किया जा रहा है। संजीवनी पर्वत लेकर आते हनुमान जी का दृश्य दर्शकों के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र रहा। 220 फीट की ऊंचाई पर आकाश मार्ग से प्रस्तुत इस प्रसंग ने न केवल रामभक्तों को रोमांचित किया, बल्कि भगवान हनुमान की अदम्य शक्ति, प्रभु श्रीराम के प्रति उनकी अटूट भक्ति और लक्ष्मण जी के प्राण बचाने के लिए किए गए उनके अथक प्रयासों की याद भी ताजा कर दी। विशाल पर्वत और चमकती संजीवनी बूटी के साथ हनुमान जी की भव्य उपस्थिति ने पूरे वातावरण को राममय बना दिया।
संजीवनी बूटी से लक्ष्मण जी को मिला जीवन, गूंज उठा जय श्रीराम का उद्घोष
रामलीला के सबसे भावुक और महत्वपूर्ण प्रसंगों में से एक उस समय देखने को मिला, जब युद्धभूमि में मेघनाद के प्रहार से मूर्छित हुए लक्ष्मण जी के उपचार के लिए सुषेण वैद्य को बुलाया गया। वैद्य के निर्देश पर हनुमान जी संजीवनी बूटी लाने के लिए पर्वत की ओर प्रस्थान करते हैं और अंततः संजीवनी से युक्त विशाल पर्वत लेकर वापस लौटते हैं। इस पूरे घटनाक्रम का मंचन इतने प्रभावशाली ढंग से किया गया कि दर्शक रामायण के उस मार्मिक प्रसंग से जुड़ते नजर आए, जिसमें लक्ष्मण जी के जीवन की रक्षा के लिए हनुमान जी असंभव प्रतीत होने वाले कार्य को भी संभव कर दिखाते हैं।
इस प्रसंग में सुषेण वैद्य की भूमिका अपोलो हॉस्पिटल के विख्यात डॉक्टर अशोक शर्मा ने निभाई। जब संजीवनी बूटी के प्रभाव से लक्ष्मण जी स्वस्थ होते हैं, तो लीला मैदान में मौजूद रामभक्तों ने जोरदार जय श्रीराम के जयकारे लगाए। यह दृश्य भाई लक्ष्मण के प्रति भगवान श्रीराम के प्रेम, संकट की घड़ी में हनुमान जी की निष्ठा और सेवा भाव की महत्ता को दर्शाने वाला रहा। दर्शकों ने तालियों और जयघोष के साथ कलाकारों का उत्साह बढ़ाया। संजीवनी प्रसंग ने एक बार फिर यह संदेश दिया कि समर्पण, साहस और दृढ़ संकल्प के साथ कठिन से कठिन चुनौती का सामना किया जा सकता है।
रावण के दरबार में अंगद की गर्जना, कोई योद्धा नहीं हिला पाया पैर
रामलीला के एक अन्य रोमांचक प्रसंग में अंगद और रावण के बीच हुआ संवाद दर्शकों के आकर्षण का केंद्र बना। भगवान श्रीराम के दूत के रूप में अंगद जब लंकापति रावण के दरबार में पहुंचे, तो उन्होंने रावण को माता सीता को सम्मानपूर्वक वापस लौटाने और प्रभु श्रीराम से वैर समाप्त करने का संदेश दिया। लेकिन अहंकार में डूबे रावण ने अंगद की बात मानने के बजाय अपने बल और सामर्थ्य का प्रदर्शन करने का प्रयास किया। इसके बाद दोनों के बीच तीखे संवाद और चुनौती का दृश्य प्रस्तुत किया गया, जिसने दरबार के माहौल को बेहद रोमांचक बना दिया।
प्रसंग के दौरान अंगद ने अपना पैर जमीन पर जमा दिया और रावण के दरबार में मौजूद योद्धाओं को चुनौती दी कि यदि उनमें सामर्थ्य है तो वे उनका पैर जमीन से उठाकर दिखाएं। रावण के दरबार के एक-एक योद्धा ने अपनी ताकत आजमाई, लेकिन कोई भी अंगद का पैर नहीं हिला सका। अंततः जब स्वयं रावण पैर हटाने के लिए आगे बढ़ा, तो अंगद ने उसे रोकते हुए कहा कि यदि झुकना ही है, तो अहंकार छोड़कर प्रभु श्रीराम के चरणों में झुको। अंगद का यह संवाद धर्म, मर्यादा और सत्य की शक्ति को दर्शाने वाला रहा। इस दृश्य के दौरान आठ-ट्रैक साउंड सिस्टम के माध्यम से संवादों और ध्वनि प्रभावों को प्रभावशाली अंदाज में प्रस्तुत किया गया। दर्शक पूरे घटनाक्रम को एकटक देखते रहे और कलाकारों की प्रस्तुति पर तालियों के साथ अपनी प्रतिक्रिया देते नजर आए।
असम के स्वास्थ्य मंत्री अशोक सिंघल ने किए प्रभु श्रीराम के दर्शन
लाल किला मैदान में आयोजित भव्य रामलीला में असम सरकार के स्वास्थ्य मंत्री अशोक सिंघल ने भी पहुंचकर प्रभु श्रीराम की लीला का अवलोकन किया और भगवान श्रीराम का आशीर्वाद लिया। उनकी उपस्थिति ने आयोजन की गरिमा को और बढ़ाया। रामलीला कमेटी के पदाधिकारियों ने उनका स्वागत किया और भारतीय संस्कृति, धार्मिक परंपराओं तथा रामायण के आदर्शों को समर्पित इस आयोजन में उनकी सहभागिता का अभिनंदन किया। रामलीला के मंच पर प्रस्तुत किए जा रहे प्रसंगों के माध्यम से दर्शकों को भगवान श्रीराम के आदर्श जीवन, धर्म के प्रति निष्ठा और अन्याय के विरुद्ध संघर्ष का संदेश दिया जा रहा है।
कमेटी के महासचिव सुभाष गोयल ने बताया कि असम के स्वास्थ्य मंत्री अशोक सिंघल सहित अन्य गणमान्य अतिथियों को कमेटी की ओर से स्मृति चिह्न भेंट कर सम्मानित किया गया। उन्होंने कहा कि लव कुश रामलीला कमेटी का प्रयास है कि हर वर्ष रामायण के प्रसंगों को भव्यता, नवीन तकनीक और प्रभावशाली अभिनय के माध्यम से दर्शकों तक पहुंचाया जाए, ताकि नई पीढ़ी भी भारतीय संस्कृति, परंपराओं और भगवान श्रीराम के आदर्शों से परिचित हो सके। आयोजन में धार्मिक आस्था के साथ-साथ सांस्कृतिक विरासत को सहेजने और समाज तक उसके मूल संदेश पहुंचाने पर विशेष जोर दिया जा रहा है।
हनुमान जी की वापसी से रामेश्वरम स्थापना तक कई प्रसंगों का भव्य मंचन
लीला मंच पर इस दिन रामायण के अनेक महत्वपूर्ण प्रसंगों को क्रमबद्ध और प्रभावशाली तरीके से प्रस्तुत किया गया। इनमें हनुमान जी की वापसी, विभीषण का प्रभु श्रीराम की शरण में जाना, रामेश्वरम की स्थापना, रावण-अंगद संवाद, लक्ष्मण जी का मूर्छित होना, सुषेण वैद्य का आगमन और हनुमान जी का संजीवनी बूटी लेकर लौटना प्रमुख रहे। प्रत्येक प्रसंग में कलाकारों के अभिनय, संवादों, मंच सज्जा और ध्वनि प्रभावों के माध्यम से कथा को जीवंत बनाने का प्रयास किया गया।
विभीषण के श्रीराम की शरण में आने का प्रसंग जहां शरणागत की रक्षा और धर्म के पक्ष में खड़े होने का संदेश देता है, वहीं रामेश्वरम की स्थापना का दृश्य भगवान श्रीराम की आस्था और मर्यादा को रेखांकित करता है। दूसरी ओर, रावण के दरबार में अंगद की निर्भीकता और संजीवनी पर्वत लेकर लौटते हनुमान जी का दृश्य दर्शकों को साहस, निष्ठा और कर्तव्यपरायणता की प्रेरणा देता नजर आया। इन सभी प्रसंगों ने रामलीला को केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं, बल्कि भारतीय धार्मिक और सांस्कृतिक मूल्यों को जन-जन तक पहुंचाने वाला सशक्त मंच बना दिया।
दशहरा समारोह में उपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन होंगे मुख्य अतिथि
लव कुश रामलीला कमेटी के अध्यक्ष अर्जुन कुमार ने बताया कि दशहरा पर्व समारोह के अवसर पर भारत के उपराष्ट्रपति माननीय सी.पी. राधाकृष्णन मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होंगे और रामलीला का अवलोकन करेंगे। उनके आगमन को लेकर आयोजन से जुड़े पदाधिकारियों और रामभक्तों में विशेष उत्साह है। दशहरा भारतीय संस्कृति में बुराई पर अच्छाई, अधर्म पर धर्म और असत्य पर सत्य की विजय का प्रतीक माना जाता है। ऐसे में लाल किला मैदान में आयोजित यह भव्य रामलीला धार्मिक आस्था के साथ-साथ सामाजिक और सांस्कृतिक संदेशों को भी व्यापक स्तर पर प्रसारित कर रही है।
दशहरा समारोह के साथ रामलीला का उत्साह अपने चरम की ओर बढ़ रहा है। विशाल मंच, आधुनिक तकनीक, आकाश मार्ग से प्रस्तुत किए जा रहे दृश्य और रामायण के लोकप्रिय प्रसंगों का भव्य मंचन दर्शकों को एक यादगार अनुभव प्रदान कर रहा है। आयोजकों का उद्देश्य है कि रामायण की शिक्षाओं और भगवान श्रीराम के आदर्शों को समाज के प्रत्येक वर्ग तक पहुंचाया जाए तथा आने वाली पीढ़ियों में सत्य, मर्यादा, सेवा, साहस और धर्म के प्रति सम्मान की भावना मजबूत हो।
कमेटी के पदाधिकारी और गणमान्य अतिथि रहे उपस्थित
इस अवसर पर लव कुश रामलीला कमेटी के अध्यक्ष अर्जुन कुमार और महासचिव सुभाष गोयल सहित कमेटी के अनेक पदाधिकारी तथा गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे। कार्यक्रम में सर्वश्री पवन गुप्ता, सत्यभूषण जैन, अखिल सिंघल, बृजमोहन गोयल, अंकुर गोयल, गौरव सूरी और संदीप भूटानी सहित अन्य गणमान्य लोगों ने सहभागिता की। कमेटी की ओर से अतिथियों का स्वागत और सम्मान किया गया।
लाल किला मैदान में आयोजित इस भव्य रामलीला में 220 फीट की ऊंचाई पर संजीवनी पर्वत लेकर आते हनुमान जी का दृश्य, लक्ष्मण जी के स्वस्थ होने का भावुक प्रसंग और रावण के दरबार में अंगद की निर्भीक चुनौती दिन की प्रमुख विशेषताएं रहीं। श्रद्धा, रोमांच और भक्ति से सराबोर इन प्रस्तुतियों ने रामभक्तों के मन पर गहरी छाप छोड़ी और पूरे लीला परिसर को जय श्रीराम के उद्घोष से गुंजायमान कर दिया।

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