कलाकार: कुणाल खेमू, प्रीति जिंटा, स्पर्श श्रीवास्तव, वंशिका धीर, यशपाल शर्मा, दिनेश लाल यादव ‘निरहुआ’
निर्देशक एवं लेखक: कुणाल खेमू
रेटिंग: ⭐⭐⭐⭐/5
अगर आप ऐसी फिल्म देखना चाहते हैं जिसमें हंसी-मजाक के साथ एक्शन, रोमांच और हाई-स्टेक मिशन का भरपूर मसाला मिले, तो ‘वाइब’ आपके लिए एक दिलचस्प विकल्प साबित हो सकती है। फिल्म की सबसे खास बात यह है कि यह शुरुआत से ही दर्शकों को मनोरंजन के मूड में ले जाती है और कहानी आगे बढ़ने के साथ कॉमेडी से एक्शन की तरफ खूबसूरती से शिफ्ट होती है।
लेखक और निर्देशक के तौर पर कुणाल खेमू ने एक बार फिर अपनी कॉमिक समझ पर भरोसा किया है। ‘मडगांव एक्सप्रेस’ में अपनी खास कॉमेडी शैली से दर्शकों का मनोरंजन करने के बाद, ‘वाइब’ में भी उन्होंने कहानी को हल्के-फुल्के अंदाज में पेश किया है। हालांकि फिल्म सिर्फ हंसी-मजाक तक सीमित नहीं रहती, बल्कि धीरे-धीरे कहानी को राष्ट्रीय सुरक्षा जैसे गंभीर मुद्दे से जोड़कर इसका दायरा बढ़ा देती है। यही बदलाव फिल्म को साधारण कॉमेडी से अलग पहचान देता है।
दो दोस्तों की कहानी, जो पहुंच जाते हैं बड़े मिशन के बीच
फिल्म की कहानी दो जिगरी दोस्तों हार्दिक (कुणाल खेमू) और बग्स (स्पर्श श्रीवास्तव) के इर्द-गिर्द घूमती है। दोनों की जिंदगी और व्यक्तित्व एक-दूसरे से काफी अलग हैं। बग्स एक बड़ी और प्रतिष्ठित एआई सॉफ्टवेयर कंपनी में काम करता है, जबकि हार्दिक हाल ही में रिहैब सेंटर से बाहर आया है। हार्दिक को ड्रग्स की लत से बाहर निकालने में बग्स की अहम भूमिका रही है और वह सिर्फ दोस्ती ही नहीं निभाता, बल्कि हार्दिक को अपनी कंपनी में नौकरी भी दिलवा देता है।
लेकिन यहीं से कहानी में असली मजा शुरू होता है। कंपनी में पहुंचने के बाद बेफिक्र और कुछ हद तक लापरवाह हार्दिक की नजर इंटर्न करीना पर पड़ती है। एक सामान्य-सी मुलाकात धीरे-धीरे ऐसी घटनाओं का सिलसिला शुरू कर देती है, जिसकी किसी ने कल्पना भी नहीं की होती। देखते ही देखते दो आम दोस्तों की जिंदगी राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े एक हाई-स्टेक मिशन में उलझ जाती है।
जब आम लड़कों के हाथ आया असाधारण मिशन
कहानी का सबसे दिलचस्प पहलू यही है कि हार्दिक और बग्स कोई प्रशिक्षित एजेंट नहीं हैं। दोनों को जासूसी, ऑपरेशन या किसी हाई-रिस्क मिशन का कोई अनुभव नहीं है। इसके बावजूद परिस्थितियां उन्हें ऐसे मिशन के बीच ला खड़ा करती हैं, जहां एक छोटी-सी गलती भी भारी पड़ सकती है।
इस पूरे ऑपरेशन की कमान संभालती हैं मैडम एच, जिनका किरदार प्रीति जिंटा ने निभाया है। उनका अंदाज सख्त, आत्मविश्वासी और प्रभावशाली है। वह दोनों दोस्तों को मिशन की गंभीरता समझाने की कोशिश करती हैं, लेकिन समस्या यह है कि हार्दिक और बग्स की अपनी ही दुनिया है। ऐसे में गंभीर मिशन और इन दोनों की अनाड़ी हरकतों का टकराव फिल्म में कई मनोरंजक पल पैदा करता है।
हार्दिक और बग्स इस मिशन में आखिर कैसे मदद करते हैं, उनकी दोस्ती किस तरह काम आती है और एक आम जिंदगी जीने वाले ये दोनों किरदार कितनी बड़ी चुनौती का सामना करते हैं—इन सवालों का जवाब जानने के लिए फिल्म देखना ही बेहतर होगा।
कसी हुई कहानी फिल्म की सबसे बड़ी ताकत
‘वाइब’ की सबसे मजबूत कड़ी इसकी कसी हुई और तेज रफ्तार पटकथा है। फिल्म कहानी को अनावश्यक रूप से खींचने के बजाय घटनाओं को तेजी से आगे बढ़ाती है। यही वजह है कि दर्शकों को लंबे समय तक कहानी से जुड़े रहने का मौका मिलता है और फिल्म में बोरियत महसूस नहीं होती।
फिल्म का पहला हिस्सा खास तौर पर दो दोस्तों की केमिस्ट्री, उनकी नोक-झोंक और मजेदार परिस्थितियों के कारण आकर्षक बनता है। कई ऐसे पल आते हैं जहां कहानी बिना जबरदस्ती कॉमेडी ठूंसने के स्वाभाविक तरीके से हंसाने की कोशिश करती है। कुणाल और स्पर्श की जोड़ी इन दृश्यों को और असरदार बना देती है।
वहीं इंटरवल के बाद फिल्म का टोन बदलता है। कहानी राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े केंद्रीय मुद्दे की तरफ तेजी से बढ़ती है और एक्शन व रोमांच का हिस्सा ज्यादा प्रमुख हो जाता है। सेकंड हाफ में कॉमेडी का डोज थोड़ा कम जरूर होता है, लेकिन उसकी जगह एक्शन, सस्पेंस और मिशन की गंभीरता ले लेती है।
कुणाल खेमू ने फिर छोड़ी अपनी छाप
अभिनय की बात करें तो कुणाल खेमू एक बार फिर अपने किरदार में पूरी तरह रंगे नजर आते हैं। हार्दिक का किरदार ऐसा है जो परिस्थितियों को गंभीरता से लेने के बजाय कई बार अपने ही अंदाज में चीजों को संभालने की कोशिश करता है। एक तरफ उसकी कमजोरियां हैं, तो दूसरी तरफ दोस्ती के लिए खड़े होने का जज्बा भी है।
कुणाल ने हार्दिक के डर, उसकी बेवकूफियों, उसकी घबराहट और कॉमिक टाइमिंग को काफी सहजता से पेश किया है। उनका अभिनय फिल्म के हास्य वाले हिस्से को मजबूत बनाता है और कई दृश्यों में वह अकेले ही माहौल को हल्का कर देते हैं।
स्पर्श श्रीवास्तव के साथ जमी दोस्ती की केमिस्ट्री
स्पर्श श्रीवास्तव ने बग्स के किरदार में सहज और संतुलित अभिनय किया है। वह कुणाल के बिल्कुल विपरीत नजर आते हैं और यही अंतर दोनों की ऑन-स्क्रीन केमिस्ट्री को मजेदार बनाता है।
कुणाल और स्पर्श की दोस्ती फिल्म की जान कही जा सकती है। दोनों के बीच की नोक-झोंक, एक-दूसरे को संभालने की कोशिश और मुश्किल परिस्थितियों में साथ खड़े रहने वाला अंदाज कहानी को भावनात्मक आधार भी देता है। उनकी जोड़ी फिल्म के कॉमेडी और एडवेंचर दोनों हिस्सों में काम करती है।
प्रीति जिंटा का दमदार अंदाज
प्रीति जिंटा ने मैडम एच के किरदार में फिल्म को एक अलग ऊर्जा दी है। उनका किरदार हार्दिक और बग्स की मस्ती के बिल्कुल उलट है—सख्त, आत्मविश्वासी और मिशन को लेकर पूरी तरह गंभीर।
प्रीति की स्क्रीन प्रेजेंस प्रभावशाली है और उनके किरदार की गंभीरता फिल्म के दूसरे हिस्से को जरूरी वजन देती है। उनका अंदाज यह एहसास कराता है कि मामला सिर्फ मजाक या रोमांच का नहीं, बल्कि उससे कहीं बड़ा है।
वंशिका धीर का प्रभावी डेब्यू
‘वाइब’ से एक्टिंग डेब्यू कर रहीं वंशिका धीर खूबसूरत नजर आती हैं और अपने किरदार में सहज दिखाई देती हैं। नए कलाकार के तौर पर उन्होंने अपनी मौजूदगी दर्ज कराने की अच्छी कोशिश की है। उनके किरदार को कहानी में जिस तरह जोड़ा गया है, वह आगे की घटनाओं को भी गति देता है।
वहीं यशपाल शर्मा और दिनेश लाल यादव ‘निरहुआ’ ने भी अपने-अपने किरदारों को प्रभावी ढंग से निभाया है। दोनों कलाकारों की मौजूदगी फिल्म की स्टारकास्ट को और मजबूत करती है।
फाइनल वर्डिक्ट
कुल मिलाकर ‘वाइब’ कॉमेडी, दोस्ती, एक्शन और रोमांच का मनोरंजक पैकेज है। फिल्म की सबसे बड़ी खूबी इसकी तेज रफ्तार कहानी, कुणाल खेमू और स्पर्श श्रीवास्तव की मजेदार केमिस्ट्री और कॉमेडी से एक्शन की तरफ होने वाला बदलाव है।
अगर आपको ऐसी फिल्में पसंद हैं जो शुरुआत में आपको हंसाएं, बीच में कहानी को नया मोड़ दें और बाद में एक्शन व रोमांच का डोज बढ़ा दें, तो ‘वाइब’ आपको निराश नहीं करेगी। यह कोई बेहद गंभीर या जटिल फिल्म बनने की कोशिश नहीं करती, बल्कि इसका मुख्य उद्देश्य दर्शकों को भरपूर मनोरंजन देना है—और इसी मोर्चे पर फिल्म काफी हद तक सफल रहती है।
जीवन की भागदौड़ के बीच अगर आप कुछ घंटे हंसने, रोमांच महसूस करने और हल्के-फुल्के मनोरंजन के साथ बिताना चाहते हैं, तो ‘वाइब’ को थिएटर में मौका दिया जा सकता है।
रेटिंग: 4/5

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