By विनय मिश्रा नई दिल्ली: 11 जुलाई 2026, नई दिल्ली के पंजाबी बाग स्थित शिव कुटीर में आयोजित राष्ट्रोत्कर्ष-दिवस महोत्सव में गोवर्धन मठ, पुरी के जगद्गुरु शंकराचार्य परमपूज्य स्वामी निश्चलानंद सरस्वती जी महाराज ने कहा कि सनातन धर्म सम्पूर्ण मानवता के कल्याण का शाश्वत मार्ग है तथा वर्तमान समय में विश्व जिन चुनौतियों का सामना कर रहा है, उनका स्थायी समाधान भारतीय सनातन जीवन-दर्शन में निहित है। उन्होंने कहा कि मानवता, प्रकृति, नैतिकता और आध्यात्मिक मूल्यों पर आधारित जीवन ही विश्व में स्थायी शांति एवं समृद्धि स्थापित कर सकता है। उन्होंने भारत से अपनी सनातन सांस्कृतिक चेतना के आधार पर विश्व के मार्गदर्शक राष्ट्र की भूमिका निभाने का आह्वान किया।
महामहोत्सव में देश के विभिन्न राज्यों से आए संत-महात्माओं, विद्वानों, सामाजिक कार्यकर्ताओं, विद्यार्थियों एवं श्रद्धालुओं ने सहभागिता की। अपने उद्बोधन में जगद्गुरु शंकराचार्य जी ने वेद, उपनिषद, वेदान्त, संस्कृत, भारतीय संस्कृति तथा गुरु-शिष्य परम्परा के संरक्षण एवं संवर्धन की आवश्यकता पर बल देते हुए कहा कि समाज में नैतिकता, आध्यात्मिकता और सांस्कृतिक मूल्यों का पुनर्जागरण समय की आवश्यकता है।
कार्यक्रम में पूज्य दंडी स्वामी गोविंदानंद सरस्वती जी महाराज ने वैदिक दशनामी संन्यास परम्परा के अनुसार जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी निश्चलानंद सरस्वती जी महाराज को भगवा अंगवस्त्र अर्पित कर दण्ड प्रणाम किया। उन्होंने कहा कि सनातन धर्म, भारतीय ज्ञान परम्परा और शंकराचार्य परम्परा का संरक्षण प्रत्येक भारतीय का दायित्व है। उन्होंने अपने मार्गदर्शन में संचालित 12 वर्षीय "श्री किष्किंधा हनुमद् जन्मभूमि रथ यात्रा" की जानकारी देते हुए बताया कि इसका उद्देश्य भगवान श्री हनुमान की जन्मभूमि के आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक महत्व का जन-जन तक प्रसार करना है। उन्होंने भारतीय ज्ञान प्रणाली तथा आधुनिक विज्ञान, विशेषकर कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई), के नैतिक एवं मानव-केंद्रित विकास पर भी अपने विचार व्यक्त किए।
इस अवसर पर राष्ट्रहित सर्वोपरि संगठन के संस्थापक एवं राष्ट्रीय अध्यक्ष सोहन गिरी ने जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी निश्चलानंद सरस्वती जी महाराज को मणिपुर की सांस्कृतिक विरासत का प्रतीक पारंपरिक मणिपुरी अंगवस्त्र, वर्ष 1891 के एंग्लो-मणिपुर युद्ध के अमर स्वतंत्रता सेनानी मेजर पौना ब्रजबासी के जीवन एवं बलिदान पर आधारित पुस्तिका, संगठन का आधिकारिक प्रतीक-चिह्न तथा "हर घर वराह भगवान" राष्ट्रीय जन-जागरण अभियान की नाम-पट्टिका भेंट कर सम्मानित किया।
सोहन गिरी ने कहा कि वर्ष 2018 में स्थापित राष्ट्रहित सर्वोपरि संगठन राष्ट्रहित, सामाजिक समरसता, सनातन संस्कृति, राष्ट्रीय एकता, सेवा एवं जन-जागरण के उद्देश्य से देशभर में कार्यरत है। संगठन राष्ट्रीय एवं जनहित के विषयों पर समय-समय पर राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, केंद्रीय गृहमंत्री, राज्यपालों, मुख्यमंत्रियों तथा अन्य संवैधानिक संस्थाओं को ज्ञापन एवं सुझाव प्रेषित करता है। उन्होंने बताया कि संगठन पिछले लगभग चार वर्षों से मणिपुर में स्थायी शांति, सामाजिक सौहार्द, विस्थापित परिवारों के सम्मानजनक पुनर्वास तथा सामान्य जनजीवन की बहाली के लिए निरंतर प्रयासरत है।
उन्होंने बताया कि संगठन का साप्ताहिक प्रकाशन "वार्तापत्रम्" राष्ट्रहित, सामाजिक जागरूकता एवं सकारात्मक परिवर्तन के उद्देश्य से प्रकाशित किया जाता है। इसके माध्यम से देशभर के जनप्रतिनिधियों, नीति-निर्माताओं, प्रशासनिक अधिकारियों एवं नागरिकों तक राष्ट्रहित एवं जनहित के विषय पहुँचाए जाते हैं। साथ ही विभिन्न क्षेत्रों में उत्कृष्ट योगदान देने वाली विभूतियों की पहचान कर उन्हें राष्ट्रीय एवं राज्य स्तरीय नागरिक सम्मानों के लिए अनुशंसित करने का भी प्रयास किया जाता है।
कार्यक्रम के समापन से पूर्व जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी निश्चलानंद सरस्वती जी महाराज ने श्रद्धालुओं, संतों, विद्यार्थियों एवं सामाजिक कार्यकर्ताओं द्वारा पूछे गए आध्यात्मिक, धार्मिक, सामाजिक एवं राष्ट्रीय महत्व के प्रश्नों के शास्त्रसम्मत एवं तर्कपूर्ण उत्तर दिए। उन्होंने समस्त राष्ट्रवासियों, सनातन समाज एवं विश्व मानवता के कल्याण, भारत की समृद्धि, सामाजिक समरसता और विश्व शांति के लिए मंगलाशीर्वाद प्रदान किया। वैदिक मंगलकामनाओं एवं भारत को आध्यात्मिक, सांस्कृतिक तथा नैतिक रूप से विश्व का मार्गदर्शक राष्ट्र बनाने के संकल्प के साथ कार्यक्रम सम्पन्न हुआ।


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