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Delhi High Court का बड़ा फैसला: Guru Harkrishan Public Schools Staff ने DSGMC पर जताया भरोसा | Kalka-Kahlon का बड़ा बयान

By प्रदीप कुमार नई दिल्ली : दिल्ली सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के अध्यक्ष सरदार हरमीत सिंह कालका और महासचिव सरदार जगदीप सिंह काहलों ने कहा कि राजनीतिक विरोधियों के झूठे प्रचार के बावजूद हमारे गुरु हरिकृष्ण पब्लिक स्कूलों के स्टाफ ने हम पर विश्वास व्यक्त किया है, जिसके लिए हम उनके आभारी हैं।

दिल्ली गुरुद्वारा कमेटी के अध्यक्ष हरमीत सिंह कालका और महासचिव जगदीप सिंह काहलों गुरु हरिकृष्ण पब्लिक स्कूल स्टाफ के बकाया भुगतान और दिल्ली हाई कोर्ट के फैसले पर जानकारी देते हुए।

सरदार हरमीत सिंह कालका और सरदार जगदीप सिंह काहलों ने संवाददाताओं को बताया कि गुरु हरिकृष्ण पब्लिक स्कूलों के कार्यरत और सेवानिवृत्त कर्मचारियों के बकाया भुगतान से संबंधित मामले की मंगलवार को दिल्ली हाई कोर्ट के दो जजों की पीठ में सुनवाई हुई। उन्होंने कहा कि सुनवाई के दौरान हमेशा की तरह राजनीतिक विरोधियों के वकीलों ने अदालत पर दबाव बनाने की कोशिश की कि गुरु घर की संपत्तियों का मूल्यांकन कराया जाए और उन्हें सुरक्षा (सिक्योरिटी) के तौर पर जब्त किया जाए। लेकिन माननीय अदालत ने विपक्ष के वकीलों की एक भी दलील स्वीकार नहीं की, क्योंकि कमेटी की वर्तमान टीम ने अदालत के सामने वास्तविक तथ्य प्रस्तुत किए।

उन्होंने बताया कि कमेटी ने 19 फरवरी 2026 को गुरु हरिकृष्ण पब्लिक स्कूल के वर्तमान और सेवानिवृत्त कर्मचारियों के साथ समझौये पर हस्ताक्षर किए थे, जिस पर 90 प्रतिशत से अधिक कर्मचारियों ने हस्ताक्षर कर कमेटी पर विश्वास प्रकट किया। उन्होंने कहा कि अदालत ने विपक्ष के वकीलों से स्पष्ट कहा कि जब 90 प्रतिशत से अधिक स्टाफ एक पक्ष में है, तो केवल थोड़े से कर्मचारियों की बात सुनकर कोई आदेश नहीं दिया जा सकता।

उन्होंने बताया कि अदालत ने कमेटी की दलीलों से पूर्ण सहमति व्यक्त की, क्योंकि कमेटी ने अदालत को बताया कि वर्ष 2006 से 2020 तक सेवानिवृत्त हुए कर्मचारियों का पूरा बकाया भुगतान किया जा चुका है। वहीं वर्ष 2021-22 के कर्मचारियों के लिए कुल 14 किस्तें निर्धारित की गई थीं, जिनमें से 6 का भुगतान किया जा चुका है और 8 शेष हैं। हालांकि, कमेटी शेष किस्तों के लिए भी पोस्ट-डेटेड चेक (पीडीसी) देने के लिए तैयार है।

उन्होंने कहा कि कमेटी के गंभीर और जिम्मेदार रवैये को देखते हुए अदालत ने महसूस किया कि जिस प्रकार स्टाफ ने कमेटी पर विश्वास किया है, उसी प्रकार संगत भी कमेटी पर भरोसा कर रही है। इसी विश्वास के आधार पर हमें उम्मीद है कि शेष बकाया राशि भी तीन महीनों के भीतर अदा की जा सकती है। अदालत ने आदेश दिया है कि इस मामले की तीन महीने बाद समीक्षा की जाएगी।

उन्होंने कहा कि यह बकाया वर्ष 2006 से, सरना भाइयों के कार्यकाल के समय से चला आ रहा है, जिसका निपटारा अब वर्तमान प्रबंधन कर रहा है। उन्होंने कहा कि 20 वर्षों से अधिक पुराने बकाये का भुगतान वर्तमान कमेटी कर रही है, जबकि राजनीतिक विरोधी केवल गुरु घर की संपत्तियां बेचने की कोशिश में लगे हुए हैं।

उन्होंने यह भी बताया कि अदालत ने स्पष्ट कर दिया है कि कमेटी द्वारा पहले दायर किए गए उस हलफनामे के अलावा, जिसमें कहा गया है कि न तो गुरु घर की संपत्तियां बेची जा सकती हैं और न ही उन्हें गिरवी रखा जा सकता है, कोई अन्य हलफनामा दाखिल करने की अनुमति नहीं दी जाएगी।

उन्होंने कहा कि संगत के अनेक श्रद्धालुओं ने कमेटी से संपर्क कर दसवंध (आय का दसवां हिस्सा) देने की इच्छा व्यक्त की है। उन्होंने देश-विदेश में रहने वाली समस्त संगत से अपील की कि वे कमेटी को अधिक से अधिक सहयोग दें, क्योंकि ये पंथ और कौम की साझा संपत्तियां हैं, जिनकी सुरक्षा और संरक्षण के लिए वर्तमान कमेटी पूरी मेहनत से कार्य कर रही है।

उन्होंने कहा कि आज एक बार फिर उनके राजनीतिक विरोधियों की मंशा पर पानी फिर गया, जब अदालत ने उनकी किसी भी दलील को स्वीकार नहीं किया और वर्तमान आदेश पारित किया।

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