By प्रदीप कुमार नई दिल्ली : भारत के एनर्जी इनोवेशन प्लेटफ़ॉर्म MC² फ़ाउंडेशन ने 17 जुलाई को बेंगलुरु में 'ग्रैंड ब्यूटेनॉल चैलेंज' की शुरुआत की। यह एक माइलस्टोन-फ़ंडेड इनोवेशन प्रोग्राम है, जिसका उद्देश्य बायो-आइसो-ब्यूटेनॉल और N-ब्यूटेनॉल के उत्पादन के लिए भारत में विकसित ऐसी स्वदेशी तकनीकों की पहचान करना है, जिन्हें बड़े पैमाने पर व्यावसायिक रूप से अपनाया जा सके। यह पहल देश को स्वच्छ ऊर्जा, आत्मनिर्भरता और हरित ईंधन की दिशा में नई गति देने वाली मानी जा रही है।
MC² फ़ाउंडेशन, पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय (MoPNG) के तहत कार्य करता है और इसे सात CPSEs - HPCL, ONGC, IOCL, BPCL, GAIL, ऑयल इंडिया लिमिटेड और पेट्रोनेट LNG लिमिटेड - ने मिलकर प्रमोट किया है। इसका उद्देश्य ग्रांट फ़ंडिंग, पायलट एक्सेस और अपने PSU पार्टनर्स के माध्यम से 'गो-टू-मार्केट' सपोर्ट देकर भारत में डीप-टेक एनर्जी इनोवेशन के जोखिम को कम करना और उसे व्यावसायिक स्तर तक पहुंचाना है।
₹5 करोड़ तक के पुरस्कारों और ₹7.5 करोड़ तक के अनुदान वाले इस चैलेंज में तीन प्रमुख क्षेत्रों के समाधान आमंत्रित किए गए हैं— n-ब्यूटेनॉल और/या आइसो-ब्यूटेनॉल के लिए फर्मेंटेशन-आधारित उत्पादन, कैटेलिटिक उत्पादन तथा अन्य नवाचारी तकनीकें, जो टेक्नोलॉजी रेडीनेस लेवल (TRL) 4 से 7 के बीच की चुनौतियों को दूर कर सकें। प्राथमिकता वाले क्षेत्रों में नॉन-फूड फीडस्टॉक से माइक्रोबियल उत्पादन, कम ऊर्जा वाली सेपरेशन टेक्नोलॉजी, बायो-बेस्ड सिटेन इम्प्रूवर और फील्ड में उपयोग होने वाले क्वालिटी-कंट्रोल हार्डवेयर शामिल हैं। आवेदन की अंतिम तिथि 15 अगस्त निर्धारित की गई है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इस चुनौती के माध्यम से विकसित तकनीकें सफल होती हैं, तो भारत आयातित ईंधन पर निर्भरता कम करने, कार्बन उत्सर्जन घटाने और स्वदेशी बायोफ्यूल उद्योग को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाने की दिशा में बड़ी उपलब्धि हासिल कर सकता है। इससे स्टार्टअप्स, शोध संस्थानों और उद्योग जगत के बीच सहयोग भी मजबूत होगा।
इस अवसर पर MC² फ़ाउंडेशन के डायरेक्टर एवं CEO संदीप माहेश्वरी ने कहा, "भारत के पास विश्वस्तरीय रिसर्च इंफ्रास्ट्रक्चर, उत्कृष्ट वैज्ञानिक प्रतिभा और दुनिया के सबसे बड़े ऊर्जा उद्योगों में से एक है। कमी केवल ऐसे इंटीग्रेटेड प्लेटफ़ॉर्म की थी, जो इन क्षमताओं को स्टार्टअप्स और उद्यमियों से जोड़ सके। MC²+ को इसी उद्देश्य से बनाया गया है, ताकि उद्योग, अकादमिक संस्थान, R&D लैब्स और इनोवेटर्स एक साथ मिलकर ऊर्जा क्षेत्र में स्वदेशी तकनीकों को आगे बढ़ा सकें।"
C-CAMP के डायरेक्टर-CEO डॉ. तस्लीमारिफ़ सैय्यद ने कहा कि माइक्रोबियल-कंसोर्टिया इंजीनियरिंग और अगली पीढ़ी की फर्मेंटेशन टेक्नोलॉजी में हुई प्रगति ने बायोफ्यूल इनोवेशन के लिए यह सबसे उपयुक्त समय बना दिया है।
डॉ. मधुकर ओंकारनाथ गर्ग ने अपने मुख्य भाषण में बायोफ्यूल उत्पादन तकनीकों के विकास, मौजूदा तकनीकी चुनौतियों, कमर्शियलाइज़ेशन की बाधाओं और भविष्य की संभावनाओं पर विस्तार से प्रकाश डाला।
यह चैलेंज सेंटर फ़ॉर सेल्युलर एंड मॉलिक्यूलर प्लेटफ़ॉर्म्स (C-CAMP) के सहयोग से संचालित किया जा रहा है, जो इसके क्रियान्वयन, मेंटरशिप और देशभर के बायोटेक तथा सिंथेटिक बायोलॉजी इकोसिस्टम से प्रतिभागियों को जोड़ने का कार्य करेगा।
ऊर्जा विशेषज्ञों के अनुसार, 'ग्रैंड ब्यूटेनॉल चैलेंज' केवल एक प्रतियोगिता नहीं, बल्कि भारत के स्वच्छ ऊर्जा भविष्य की मजबूत नींव रखने की पहल है। यह कार्यक्रम नवाचार, स्टार्टअप संस्कृति और औद्योगिक साझेदारी को बढ़ावा देते हुए 'आत्मनिर्भर भारत' और हरित ऊर्जा मिशन को नई दिशा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।


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