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Shaheedi Diwas 2026: गुरु अर्जन देव जी ने आदि ग्रंथ के रूप में दिया गुरबाणी का अनमोल खजाना, हरमीत सिंह कालका का बड़ा संदेश

By प्रदीप कुमार नई दिल्ली : दिनांक 16 जून 2026, दिल्ली सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के अध्यक्ष हरमीत सिंह कालका ने कहा कि पंचम पातशाह श्री गुरु अर्जन देव जी ने आदि ग्रंथ का संकलन करके संगत को गुरबाणी का अमूल्य खजाना प्रदान किया। बाद में दशम पातशाह श्री गुरु गोबिंद सिंह जी ने इसमें और गुरबाणी जोड़कर इसे श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी के रूप में स्थापित किया और सिखों को इसके चरणों से जोड़ा।

गुरु अर्जन देव जी के शहीदी दिवस पर गुरुद्वारा श्री गुरु सिंह सभा कालका जी में आयोजित गुरमति समागम को संबोधित करते हरमीत सिंह कालका।

गुरुद्वारा श्री गुरु सिंह सभा, बी-ब्लॉक कालका जी में गुरु अर्जन देव जी के शहीदी पर्व के अवसर पर आयोजित गुरमति समागम को संबोधित करते हुए हरमीत सिंह कालका ने कहा कि गुरु अर्जन देव जी ने अपने से पूर्व के चार गुरु साहिबानों की वाणी, अपनी स्वयं की वाणी तथा भक्तों एवं भट्टों की वाणी का संकलन कर आदि ग्रंथ की रचना की थी।

उन्होंने कहा कि दशम पातशाह गुरु गोबिंद सिंह जी ने इसमें और गुरबाणी जोड़कर इसे पूर्ण स्वरूप प्रदान किया तथा सिख पंथ को यह आदेश दिया कि केवल श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी को ही अपना गुरु माना जाए। उन्होंने गुरु साहिब के प्रसिद्ध वचन का उल्लेख करते हुए कहा: "सब सिखन को हुकम है, गुरु मानियो ग्रंथ।"

कालका ने कहा कि गुरु अर्जन देव जी अपने दृढ़ संकल्प पर अडिग रहे और मुगल सत्ता के दबाव के आगे नहीं झुके। उन्होंने परमात्मा का नाम स्मरण करते हुए महान शहादत दी, जो सत्य और धर्म के लिए सर्वोच्च बलिदान का उदाहरण है।

उन्होंने कहा कि आज समस्त सिख समाज श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी को अपना सर्वस्व मानता है और गुरु साहिब के बताए मार्ग पर चलकर ही इस संसार रूपी भवसागर से पार पाया जा सकता है। उन्होंने कहा कि ऐसा आध्यात्मिक और सार्वभौमिक ज्ञान का खजाना संसार के किसी अन्य धर्म के पास नहीं है, जो गुरु अर्जन देव जी ने मानवता को प्रदान किया।

उन्होंने बताया कि गुरु अर्जन देव जी के शहीदी दिवस के अवसर पर संगत पिछले 40 दिनों से गुरु की इलाही बाणी का जाप कर रही है। लेकिन जीवन की वास्तविक सफलता तभी है जब हम अपने बच्चों को गुरसिखी जीवन से जोड़ें, उन्हें दास्तार सजाने, पांच ककार धारण करने और गुरु साहिब के उपदेशों के अनुसार जीवन जीने के लिए प्रेरित करें।

उन्होंने कहा कि युवा पीढ़ी को गुरबाणी से जोड़ना हमारी सबसे बड़ी सेवा और जिम्मेदारी है, जिसे हर परिस्थिति में निभाना चाहिए। इस अवसर पर उन्होंने स्त्री सत्संग की सदस्याओं की भी सराहना की, जो निरंतर गुरबाणी का जाप कर रही हैं। उन्होंने बीबी नरेंद्र कौर (प्रधान), मंच सचिव मनजीत कौर तथा पूरी टीम का भी विशेष धन्यवाद किया।

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