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India की Energy Security का Future तय करेंगे Applied Sciences: STFAS 2026 में N. Kalaiselvi का बड़ा विज़न

By विनय मिश्रा नई दिल्ली: दिनांक 8 अप्रैल 2026, डॉ कलैसेल्वी, डीजी, सीएसआईआर ने सोमवार को सस्टेनेबिलिटी पर आयोजित एक इंटरनेशनल कॉन्फ्रेंस में कहा कि रिसर्च और एप्लाइड साइंसेज़ सस्टेनेबल सॉल्यूशंस को आगे बढ़ाने में अहम भूमिका निभाएँगे। उन्होंने कहा कि इससे भारत की एनर्जी सिक्योरिटी मज़बूत होगी, सस्टेनेबल एग्रीकल्चर के लिए ग्रीन केमिस्ट्री को बढ़ावा मिलेगा और ग्लोबल सस्टेनेबिलिटी चैलेंजेज़ का समाधान निकलेगा।

Hindu College STFAS 2026 conference में N. Kalaiselvi sustainability, energy security और applied science पर संबोधित करती हुई

हिंदू कॉलेज, दिल्ली यूनिवर्सिटीमें आयोजित इंटरनेशनल कॉन्फ्रेंस ऑन सस्टेनेबिलिटी थ्रू फंडामेंटल एंड एप्लाइड साइंसेज़ (एसटीएफएएस 2026) के उद्घाटन सत्र में बोलते हुए, डॉ कलैसेल्वी ने ज़ोर दिया कि साइंटिफिक इनोवेशन सिर्फ थ्योरी तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि उसे रियल-वर्ल्ड एप्लिकेशंस में बदलना ज़रूरी है। उन्होंने स्टूडेंट्स को रिसर्च और एंटरप्रेन्योरशिप में आगे आने के लिए प्रेरित किया और कहा कि आने वाली पीढ़ी के साइंटिस्ट्स और इनोवेटर्स सस्टेनेबल डेवलपमेंट को दिशा देंगे। उन्होंने हिंदू कॉलेज की सराहना करते हुए कहा कि इतने वर्कशॉप्स, इंटरएक्टिव एग्ज़िबिशन और एक्सपर्ट डिस्कशंस के साथ इस तरह का कॉन्फ्रेंस देखना खुशी की बात है। यह कॉन्फ्रेंस फिजिक्स और केमिस्ट्री डिपार्टमेंट्स द्वारा जॉइंटली आयोजित किया गया है।

इस सोच को आगे बढ़ाते हुए *हिंदू कॉलेज के चेयरमैन टीसीए रंगाचारी* ने कहा कि सस्टेनेबिलिटी को साइंस, इनोवेशन और रिस्पॉन्सिबिलिटी के साथ कलेक्टिव एक्शन से आगे बढ़ाना होगा। उन्होंने कहा कि हिंदू कॉलेज इस तरह की डिस्कशंस को बढ़ावा देने और फ्यूचर-रेडी थिंकर्स तैयार करने के लिए कमिटेड है।

यह 3 दिन का कॉन्फ्रेंस डीबीटी स्टार कॉलेज स्कीम के तहत 6 से 8 अप्रैल तक आयोजित किया जा रहा है। कॉलेज की *प्रिंसिपल प्रोफेसर अंजु श्रीवास्तव* ने कहा कि एकेडमिक इन्क्वायरी को सोसाइटी की ज़रूरतों से जोड़ना बहुत ज़रूरी है। उन्होंने कहा, “हिंदू कॉलेज में हम साइंस को बदलाव का एक पावरफुल टूल मानते हैं। एसटीएफएएस 2026 का उद्देश्य अलग-अलग स्टेकहोल्डर्स को साथ लाकर ऐसे सॉल्यूशंस तलाशना है जो साइंटिफिकली स्ट्रॉन्ग होने के साथ-साथ सोशल्ली रिलेवेंट और इम्प्लीमेंटेबल भी हों।”

इस कॉन्फ्रेंस में आईआईटीज़, सीएसआईआर लैब्स, ग्लोबल यूनिवर्सिटीज़ और इंडस्ट्री से करीब 30 नेशनल और इंटरनेशनल स्पीकर्स हिस्सा ले रहे हैं। इसे इंडियन रेलवे फाइनेंस कॉरपोरेशन, अल्ट्रा इंटरनेशनल लिमिटेड, स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (एसबीआई), केनरा बैंक और ग्रेमैटर्स कम्युनिकेशंस जैसे ऑर्गनाइज़ेशंस सपोर्ट कर रहे हैं। इसमें सस्टेनेबल मटेरियल्स, ग्रीन एनर्जी, एनवायरनमेंटल साइंस, एआई-ड्रिवन सस्टेनेबिलिटी और ट्रांसलेशनल रिसर्च जैसे टॉपिक्स पर चर्चा होगी।

कॉन्फ्रेंस का एक अहम फोकस एकेडेमिया और इंडस्ट्री के बीच बेहतर कोऑर्डिनेशन बनाना है। *अल्ट्रा इंटरनेशनल लिमिटेड के फाउंडर चेयरमैन और सीईओ संत संगानेरिया ने कहा* , “सस्टेनेबिलिटी का फ्यूचर साइंस और इंडस्ट्री के इंटीग्रेशन पर निर्भर करता है। एसटीएफएएस जैसे प्लेटफॉर्म्स रिसर्च को मार्केट नीड्स से जोड़ने और इनोवेटिव सॉल्यूशंस को तेज़ी से लागू करने में मदद करते हैं।”

कॉन्फ्रेंस को इंटरएक्टिव बनाने के लिए कई एक्टिविटीज़ रखी गई हैं, जैसे कोडिंग कॉम्पिटिशंस, पोस्टर मेकिंग, साइंस क्विज़, साइंस स्लैम सेशंस, थ्री-मिनट टॉक्स, पिच प्रेज़ेंटेशंस, डिबेट्स, फोटोग्राफी और शॉर्ट फिल्म कॉम्पिटिशंस।

इसके अलावा एक स्पेशलाइज़्ड इंस्ट्रूमेंटेशन वर्कशॉप भी आयोजित की जाएगी, जिसमें पार्टिसिपेंट्स को एडवांस्ड साइंटिफिक इक्विपमेंट और एनालिटिकल टेक्नीक्स का प्रैक्टिकल एक्सपीरियंस मिलेगा। *कॉन्फ्रेंस कन्वीनर प्रोफेसर रीना जैन* ने बताया कि देशभर से सैकड़ों सबमिशंस आए हैं, जिनमें से शॉर्टलिस्टेड पार्टिसिपेंट्स ओरल और पोस्टर प्रेज़ेंटेशंस के ज़रिए अपना काम पेश करेंगे। उन्होंने यह भी कहा कि सेलेक्टेड पेपर्स रिप्यूटेड स्कोपस-इंडेक्स्ड वाइली जर्नल्स में पब्लिश किए जाएंगे, जिससे यंग रिसर्चर्स को रिकग्निशन मिलेगा।

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