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Corporate India में Women Safety Issue | TCS Case के बाद VHP का सख्त रुख, Hiring Policies पर कड़ी नजर

By विनय मिश्रा नई दिल्ली: दिनांक 20 अप्रैल 2026 को विश्व हिंदू परिषद के महासचिव बजरंग बागड़ा ने व्यापार और उद्योग से जुड़े शीर्ष निकायों से कॉर्पोरेट जगत में काम कर रही महिलाओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने की अपील की है। उन्होंने फिक्की, सी आई आई, एसोचैम, आईसीसी, बीसीसी, पीएचडीसीआईआई, नैसकॉम जैसे संगठनों को पत्र लिख कर यह अपील की। उन्होंने कॉर्पोरेट जगत से अनुरोध किया है कि वह महिलाओं के लिए सुरक्षित कार्यस्थल का वातावरण बना कर राष्ट्र को प्रगति की नई ऊंचाइयों तक ले जाए।

VHP महासचिव बजरंग बागड़ा का बयान, TCS नासिक केस और महिलाओं की सुरक्षा पर चिंता

बागड़ा ने हाल ही में नासिक स्थित टीसीएस में हुए घटनाक्रम का हवाला देते हुए उद्योग संगठनों से महिलाओं की सुरक्षा के मामले में तुरंत उचित कार्रवाई करने की अपील की है। उन्होंने चेताया कि अगर कॉर्पोरेट जगत की नीतियों और उनके क्रियान्वयन में सुधारात्मक कदमों की कमी पाई गई, तो वीएचपी सभी उपलब्ध संवैधानिक उपायों को अपनाने के लिए विवश होगी। वीएचपी पूरी निष्पक्षता के साथ ऐसे मामलों पर पैनी नजर रखेगी कि क्या कदम उठाए गए हैं या नहीं उठाए गए हैं।

उन्होंने कहा कि भारत में व्यापार और उद्योग के शीर्ष निकायों को कार्यस्थलों पर महिलाओं की सुरक्षा जैसे अत्यंत संवेदनशील मामले पर ध्यान देकर उचित कदम उठाने चाहिए। बागड़ा ने उद्योग और व्यापार संगठनों का ध्यान टीसीएस में चल रहे धर्म-परिवर्तन के बड़े षड्यंत्र की ओर दिलाते हुए कहा कि ‘शिकारी’ की भूमिका में एक विशेष धार्मिक समुदाय से जुड़े कुछ पुरुष कर्मचारियों ने दूसरे समुदाय की महिला कर्मचारियों के साथ ही पुरुष कर्मचारियों को भी अपना निशाना बनाया।

बजरंग बागड़ा ने कहा कि ये किसी व्यक्तिगत कट्टरपंथी द्वारा किए गए अपराधों के अलग-थलग मामले नहीं हैं, बल्कि सुनियोजित, वित्तपोषित और पेशेवर ढंग से योजनाबद्ध तरीके से सामूहिक षड्यंत्र के मामले हैं। टीसीएस, नासिक मामले में उजागर हुए शुरुआती साक्ष्य कट्टरपंथियों और आतंकवादियों के साथ इन आरोपित कर्मियों की सांठगांठ की आशंका और विदेशी फंडिंग की संलिप्तता की ओर संकेत करते हैं। दूसरे मामलों की अभी ठीक से जांच होना बाकी है।

उनके अनुसार जांच से पता चलता है कि टीसीएस के कार्मिक अधिकारी इन अपराधों में शामिल गिरोहों को प्रश्रय देते थे। वे सुनिश्चित करते थे कि पुरुष 'शिकारियों' की भर्ती और नियुक्ति ऐसी जगहों पर हो, जहां वे महिला कर्मचारियों को प्रभावित कर उनका शोषण कर सकें। यह शोषण केवल उत्पीड़न तक ही सीमित नहीं था, बल्कि इसमें जबरन बीफ खिलाना, बलात्कार, ब्लैकमेल और अंततः धर्म-परिवर्तन कराना भी शामिल था।

विहिप के महासचिव के अनुसार पीड़ित महिला कर्मचारियों की शिकायतों की अनदेखी की गई। शायद ही कभी उनकी शिकायतों को गंभीरता और उचित तरीके से निपटाया गया। टीसीएस का वरिष्ठ प्रबंधन अपनी सुरक्षित कार्य -स्थल उपलब्ध कराने की जिम्मेदारियों को निभाने में पूरी तरह विफल रहा। प्रबंधन अपनी घोर लापरवाही और कुप्रबंधन के माध्यम से इन अपराधों में मौन भागीदार बन गया। कार्यस्थलों पर महिला कर्मचारियों के यौन उत्पीड़न की रोकथाम से संबंधित कानूनी प्रावधानों का उल्लंघन बड़े पैमाने पर किया गया।

बागड़ा ने कहा कि पूरा देश कॉर्पोरेट क्षेत्र पर गर्व करता है, जिसने अर्थव्यवस्था के विकास और रोजगार सृजन में भारी योगदान देकर राष्ट्र का गौरव बढ़ाया है। लेकिन किस कीमत पर! उन्होंने उम्मीद जताई कि कॉर्पोरेट नेतृत्व इस मामले की गंभीरता को समझेगा। इस मामले ने कार्यस्थलों पर महिलाओं की सुरक्षा और राष्ट्र की सामाजिक सौहार्द्र बनाए रखने के संबंध में कॉर्पोरेट जगत पर लोगों के सामाजिक विश्वास को हिलाकर रख दिया है।

उन्होंने उद्योग संगठनों से अपील की कि वे अपनी सदस्य फर्मों/कंपनियों को सलाह दें कि वे एक विशेष धार्मिक समुदाय से संबंधित उम्मीदवारों की भर्ती और नियुक्ति के समय बहुत सतर्कता बरतें। बागड़ा ने कहा कि विश्व हिंदू परिषद चाहती है कि टीसीएस में हुए निंदनीय घटनाक्रम को ध्यान में रखते हुए कॉर्पोरेट जगत की सभी कंपनियां विशेष रूप से कार्मिक विभाग में की गई भर्तियों की गंभीर समीक्षा करते हुए तत्काल सुधारात्मक कदम उठाएं।

बागड़ा ने स्पष्ट किया कि वीएचपी यह नहीं मानती है कि किसी विशेष समुदाय के सभी लोग ऐसे जघन्य अपराधों में शामिल है। लेकिन जिस तरह का पैटर्न और व्यापकता सामने आई है, वह निश्चित रूप से अतिरिक्त सावधानी और सतर्कता की मांग करती है। उनके अनुसार भर्ती से लेकर नियुक्ति तक और महिला कर्मचारियों के शोषण को रोकने के लिए सतत निगरानी बहुत आवश्यक है। केवल अपने आर्थिक लाभ को साधने की होड़ में अगर कॉर्पोरेट जगत की ओर से कोई भी ढुलमुल या लापरवाही भरा रवैया जारी रहता है, तो यह न केवल समाज और राष्ट्र के हित में नहीं होगा, बल्कि स्वयं उनके अपने दीर्घकालीन हित में भी नहीं होगा। इससे समाज का उन पर से विश्वास और आस्था डगमगाना निश्चित है। 

बागड़ा ने यह भी कहा कि विश्व हिंदू परिषद राष्ट्र, संस्कृति और समुदाय के हितों की रक्षा के लिए कटिबद्ध हैं। कॉर्पोरेट जगत की ऐसी गंभीर असावधानी, संलिप्तता और चूकों की अनदेखी नहीं की जा सकती। परिषद कार्मिक नीतियों, कार्यप्रणालियों और व्यवहार में तत्काल प्रभावी सुधार की अपेक्षा करती है।


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