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Inspiring Story: दिल्ली में Team Phatak बनी सहारा, अनाथ बेटियों के सामूहिक विवाह से बदली ज़िंदगी

By विनय मिश्रा नई दिल्ली“मैं तेरी बाहों के झूले में पली बाबुल… छोड़ के तेरी गली बाबुल…” यह गीत हर बेटी और पिता के रिश्ते की गहराई को बयां करता है। लेकिन ज़रा उन बेटियों के बारे में सोचिए, जिनके पास न पिता का साया है और न ही परिवार का सहारा। समाज की यही विडंबना है कि ऐसे बच्चों को अक्सर मुख्यधारा से अलग कर दिया जाता है।

Team Phatak द्वारा दिल्ली में अनाथ बेटियों का सामूहिक विवाह, खुशियों के साथ नई शुरुआत

जहां एक ओर बच्चे बेहतर शिक्षा और खुशहाल बचपन का आनंद लेते हैं, वहीं कई अनाथ बच्चे दान, भिक्षा या दिहाड़ी मजदूरी के सहारे अपना जीवन बिताने को मजबूर होते हैं। ऐसे में अगर कोई उनके जीवन में उम्मीद की एक किरण बनकर आता है, तो वह किसी फरिश्ते से कम नहीं होता।

इसी सोच को साकार करते हुए करीब दो दशक से पत्रकारिता कर रहे पवन मिश्रा ने समाजसेवी श्रवण चौबे के साथ मिलकर एक अनोखी पहल की। दोनों ने ‘टीम फाटक’ संस्था की स्थापना कर संकल्प लिया कि वे उन अनाथ और जरूरतमंद बेटियों का विवाह कराएंगे, जो बेहद कठिन परिस्थितियों में जीवन जी रही हैं।

इस पहल के तहत जगह-जगह पोस्टर लगाकर लोगों से अपील की गई। इस अपील के बाद 27 लड़कियों ने संपर्क किया, जिनमें से गहन जांच के बाद केवल 5 अनाथ बेटियों का चयन किया गया। प्राथमिकता स्पष्ट थी—सिर्फ उन बेटियों की मदद करना, जिनका इस दुनिया में कोई सहारा नहीं है।

इसके बाद सबसे बड़ी चुनौती योग्य वर की तलाश थी। लेकिन कहते हैं, नीयत साफ हो तो रास्ते अपने आप बन जाते हैं। सभी बेटियों के लिए अच्छे और जिम्मेदार वर मिल गए, जो स्थिर रोजगार और बेहतर जीवन से जुड़े थे। इसके बाद पूरे उत्साह के साथ विवाह की तैयारियां शुरू की गईं।

संवाददाता पवन मिश्रा द्वारा सहयोग की अपील किए जाने पर समाज के कई प्रतिष्ठित लोगों ने बढ़-चढ़कर इस नेक कार्य में योगदान दिया। मीडिया जगत से न्यूज़ 24 के वरिष्ठ संपादक अरुण चौबे, वरिष्ठ पत्रकार कुमार राजेश, नवभारत टाइम्स (हिंदी) के संपादक शमशेर सिंह, एशिया नेट के वरिष्ठ पत्रकार अनीश सिंह, दिनाकरन पेरी और रवि शंकर सहित कई गणमान्य लोग इस पहल से जुड़े।

इसके अलावा सुरक्षा बलों और प्रशासनिक सेवाओं से जुड़े अधिकारियों—सीआरपीएफ के डिप्टी कमांडेंट प्रिंस भारद्वाज, असिस्टेंट कमांडेंट राजबीर सिंह, बीएसएफ के असिस्टेंट कमांडेंट आशीष, विंग कमांडर रत्नाकर सिंह और मनीष कुमार—ने भी सहयोग दिया। चिकित्सा क्षेत्र से डॉक्टर प्रवीण और डॉक्टर गौरव पांडे का भी अहम योगदान रहा।

वहीं दिल्ली पुलिस के इंस्पेक्टर सत्या कुमार और इंस्पेक्टर फारुखी सहित कई अधिकारियों ने इस आयोजन को सफल बनाने में अपनी भूमिका निभाई। रक्षा संपदा विभाग के वरिष्ठ अधिकारी अलकेश शर्मा, मनोज रुड़कीवाल, पंजाब नेशनल बैंक के पूर्व चीफ मैनेजर डी.के. पोरवाल, एसबीआई के ब्रांच मैनेजर आनंद कुमार और पूर्वांचल एक्सप्रेस-वे के पीआरओ शिवम कुमार ने भी सहयोग प्रदान किया।

समाजसेवियों में बसंत उपाध्याय, रवि अरोड़ा, मजिंदर पुंढीर, हेमंत सिंह तोमर, अनुराग मिश्रा, दिलीप, राजेश, नीतू सिंह, विनीत वर्मा और सनराइज हाइट्स, जौनापुर (नई दिल्ली) के समाजसेवी नितिन जंगवाल सहित कई लोगों—रामेंद्र कुमार, संतलाल यादव, अनिल गर्ग, मनीष राय, सूरज प्रकाश, प्रभात कुमार, अंकज उपाध्याय, गोविंद पांडेय, मनीष मेहता, कमलकांत और रविंद्र मधेसिया—ने भी इस पुण्य कार्य में अपना महत्वपूर्ण योगदान दिया।

इस आयोजन का मुख्य उद्देश्य उन बेटियों के हाथ पीले करना था, जिनका इस दुनिया में कोई सहारा नहीं है। विवाह सादगीपूर्ण तरीके से संपन्न कराए गए और नवविवाहित जोड़ों को उनके गृहस्थ जीवन की शुरुआत के लिए आवश्यक सामग्री भी भेंट की गई।

पवन मिश्रा ने कहा:

इस तरह के सामूहिक प्रयास न केवल आर्थिक बोझ कम करते हैं, बल्कि समाज में एकजुटता और सहयोग का संदेश भी देते हैं। कल तक जो बेटियां बेसहारा थीं, आज वे अपने नए जीवन की नई शुरुआत कर रही हैं। उन्होंने आगे कहा, सामूहिक विवाह फिजूलखर्ची पर रोक लगाने के साथ-साथ बेटियों को वह सम्मान और अधिकार दिलाने का माध्यम भी है, जिसकी वे वास्तविक हकदार हैं।

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