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Almora: Pleasant Valley Foundation केस में NGO पर संगठित साजिश, कई FIR दर्ज, CBI जांच की मांग

Published by : BST News Desk

दि प्लेज़ेंट वैली फाउंडेशन, जो सोसाइटीज़ रजिस्ट्रेशन एक्ट, 1860 के अंतर्गत विधिवत पंजीकृत एक गैर-लाभकारी संगठन है और जिसका पंजीकरण दिल्ली में है, पिछले लगभग दो दशकों से जनपद अल्मोड़ा के ग्राम डांडा-कांडा में अत्यंत निर्धन एवं वंचित वर्ग के बच्चों को निःशुल्क, गुणवत्तापूर्ण एवं सतत शिक्षा प्रदान कर रहा है। इस संस्था द्वारा संचालित विद्यालय एवं अनाथालय केवल एक शैक्षणिक केंद्र नहीं, बल्कि सैकड़ों बच्चों के भविष्य, सुरक्षा और जीवन-निर्माण का आधार हैं।

Pleasant Valley Foundation केस:अल्मोड़ा में NGO पर कथित साजिश, आगजनी और धमकियों के बीच जांच की मांग को लेकर सामने आया मामला

1. गंभीर आपराधिक घटनाओं पर FIR एवं विधिक कार्यवाही:

दिनांक 06.04.2026 को थाना गोविंदपुर, जनपद अल्मोड़ा में FIR संख्या 17/2026 विधिवत दर्ज की गई है। उक्त प्राथमिकी में नोएडा स्थित कपड़ा व्यापारी एवं पूर्व-दोषसिद्ध अपराधी अपूर्वा जोशी उर्फ भैयाजी जोशी, उसकी पत्नी गीतिका क्वीरा, उसके भाई अजय कुमार जोशी तथा अन्य सहयोगियों के विरुद्ध भारतीय न्याय संहिता, 2023 की धारा 61(2), 111, 356, 336, 318(4), 352, 353(2) तथा आईटी अधिनियम की धारा 66E एवं 67 के अंतर्गत अत्यंत गंभीर अपराधों में मामला पंजीकृत किया गया है।

यह प्राथमिकी किसी सामान्य विवाद का परिणाम नहीं, बल्कि एक विस्तृत एवं संगठित आपराधिक गतिविधि के साक्ष्यों पर आधारित है, जिसकी संपूर्ण न्यायालयीन आदेशों एवं दस्तावेजों से पुष्टि होती है, जिन्हें संलग्न किया गया है।

2. फाउंडेशन पर सुनियोजित संगठित आपराधिक हमला:

दि प्लेज़ेंट वैली फाउंडेशन, जो वर्ष 2008 से निरंतर शिक्षा एवं सामाजिक सेवा के क्षेत्र में कार्यरत है, वर्तमान में एक संगठित आपराधिक गिरोह द्वारा लक्षित हमलों का शिकार है।

मुख्य अभियुक्त अपूर्वा जोशी, जो पूर्व में भी गंभीर आपराधिक मामलों में दोषसिद्ध पाया जा चुका है, के विरुद्ध माननीय मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट, पिथौरागढ़ द्वारा वाद संख्या 771/2015 में दिनांक 29.07.2022 को 2 वर्ष के कठोर कारावास का निर्णय पारित किया गया था। उक्त निर्णय को माननीय जिला एवं सत्र न्यायाधीश द्वारा दिनांक 04.01.2025 को अपील में पूर्णतः बरकरार रखा गया तथा अभियुक्त को आत्मसमर्पण करने के स्पष्ट निर्देश दिए गए।

यह तथ्य अभियुक्त के आपराधिक इतिहास एवं गंभीर प्रवृत्ति को स्पष्ट रूप से स्थापित करता है। माननीय उच्च न्यायालय के समक्ष लंबित आपराधिक पुनरीक्षण याचिका में मात्र अंतरिम संरक्षण प्रदान किया गया है, जबकि दोषसिद्धि एवं सजा पर किसी प्रकार का स्थगन आदेश प्रभावी नहीं है।

3. भूमि एवं संपत्ति हड़पने की साजिश एवं पूर्व एफआईआर:

इस वर्तमान प्राथमिकी की पृष्ठभूमि में माननीय मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (CJM), अल्मोड़ा द्वारा दिनांक 29 जनवरी 2026 को पारित आदेश अत्यंत महत्वपूर्ण है, जिसमें अजय कुमार जोशी, बर्खास्त कर्मचारी गोपाल सिंह बिष्ट एवं अन्य सहयोगियों के विरुद्ध संस्था की भूमि एवं भवनों को अवैध रूप से बेचने हेतु आपराधिक षड्यंत्र रचने के गंभीर आरोपों में FIR दर्ज करने का निर्देश दिया गया था।

इसके अनुपालन में दिनांक 01.02.2026 को थाना गोविंदपुर में FIR संख्या 5/2026 दर्ज की गई, जिसमें भारतीय न्याय संहिता, 2023 की कठोर धाराएँ लगाई गईं।

इसके पश्चात ही एक और अधिक खतरनाक घटना सामने आई, जिसमें दिनांक 17 फरवरी 2026 की रात्रि में संस्था के विद्यालय को सुनियोजित ढंग से आगजनी कर नष्ट करने का प्रयास किया गया। इस घटना के संबंध में FIR संख्या 14/2026 दर्ज है। जांच में स्पष्ट हुआ है कि पेट्रोल डालकर जानबूझकर आग लगाई गई, जो एक अत्यंत गंभीर, संगठित एवं पूर्वनियोजित आपराधिक कृत्य है।

4. निरंतर साइबर, भौतिक एवं मनोवैज्ञानिक हमले:

एफआईआर दर्ज होने के पश्चात अभियुक्त अपूर्वा जोशी एवं उसके सहयोगी निरंतर डिजिटल एवं भौतिक माध्यमों से आपराधिक गतिविधियों को अंजाम दे रहे हैं।

इन गतिविधियों में शामिल हैं—

भड़काऊ पर्चों एवं बड़े पोस्टरों का प्रसार

फर्जी एवं भ्रामक यूट्यूब वीडियो का निर्माण एवं प्रसार

मॉर्फ्ड एवं झूठी डिजिटल सामग्री का उपयोग

संस्था एवं प्रबंधन के विरुद्ध निराधार एवं मानहानिकारक आरोप

खुलेआम हिंसा के लिए उकसाना

“मारो-पीटो”, “भगा दो”, “स्कूल पर बुलडोज़र चलाओ” जैसे नारे स्पष्ट रूप से दंगा भड़काने, भय उत्पन्न करने एवं संगठित आपराधिक साजिश को दर्शाते हैं।

इसके अतिरिक्त, रात्रि में विद्यालय परिसर में घुसपैठ, ग्रामीणों को उकसाने का प्रयास तथा “The Sunday Post, United Kingdom” जैसी प्रतिष्ठित अंतरराष्ट्रीय मीडिया संस्था के नाम का फर्जी उपयोग कर जनता को भ्रमित करना गंभीर साइबर अपराध, धोखाधड़ी एवं आपराधिक साजिश का स्पष्ट प्रमाण है।

5. संगठित अपराध एवं संस्थागत कब्जे का प्रयास:

उपरोक्त सभी घटनाक्रम यह स्पष्ट रूप से दर्शाते हैं कि यह कोई पृथक या आकस्मिक घटनाएँ नहीं हैं, बल्कि एक सुनियोजित, संगठित एवं बहु-स्तरीय आपराधिक षड्यंत्र है, जिसका एकमात्र उद्देश्य एक चैरिटेबल संस्था को अस्थिर करना, उसकी प्रतिष्ठा को धूमिल करना तथा उसकी संपत्ति पर अवैध कब्जा करना है।

मुख्य साजिशकर्ता अपूर्वा जोशी एवं उसके गिरोह द्वारा अपनाए गए तरीके गंभीर संगठित अपराध, साइबर अपराध, आपराधिक भयादोहन एवं विधि-व्यवस्था को चुनौती देने वाले कृत्यों की श्रेणी में आते हैं।

6. स्वतंत्र जांच की मांग एवं संस्थागत रुख:

दि प्लेज़ेंट वैली फाउंडेशन दृढ़ता से यह मांग करता है कि सभी संबंधित एफआईआरों एवं घटनाओं की जांच तत्काल प्रभाव से एक स्वतंत्र केंद्रीय एजेंसी CBI-SIT द्वारा कराई जाए, ताकि निष्पक्ष, पारदर्शी एवं त्वरित न्याय सुनिश्चित किया जा सके।

यदि शीघ्र एवं प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई, तो संस्था उच्चतम न्यायिक मंचों का रुख करने के लिए बाध्य होगी।

फाउंडेशन यह स्पष्ट करता है कि वह सत्य, न्याय एवं कानून के शासन की रक्षा हेतु पूर्णतः प्रतिबद्ध है तथा दोषियों के विरुद्ध कठोरतम कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित करने के लिए हर संभव कदम उठाएगा।


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