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Purnia की Kathak Queen Rachna: Bollywood के बीच Classical Dance की Alakh

Published by : BST News Desk

पूर्णिया/बिहार:  जहाँ आज की युवा पीढ़ी बॉलीवुड गीतों पर थिरक रही है, वहीं पिछले पांच दशकों से रचना (प्रज्ञा प्रसाद) ने कथक की परंपरा को जीवित रखा है। जिले की इकलौती सक्रिय कथक कलाकार रचना ने न केवल शानदार प्रस्तुतियाँ दी हैं, बल्कि जिला, राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर जज के रूप में भी शास्त्रीय नृत्य के मानक स्थापित किए हैं।

"Purnia Kathak dancer Rachna in classical pose"

Childhood और प्रारंभिक प्रशिक्षण:

तीन वर्ष की आयु से कथक की साधना शुरू करने वाली रचना को उनकी माता प्रभा प्रसाद ने नृत्य के प्रति प्रेरित किया। उनकी चाची किरण गुप्ता ने उन्हें प्रारंभिक प्रशिक्षण दिया। इस दौरान रचना ने कथक के परन, कवित्त, तोड़े, तत्तकार और तराना की बारीकियों में महारत हासिल की।

उन्नत प्रशिक्षण और गुरुओं का योगदान:

आगे चलकर रचना ने पूर्णिया के सुप्रसिद्ध तबला वादक पंडित बीरेंद्र घोष से प्रशिक्षण प्राप्त किया। इसके अलावा उन्हें पद्मश्री सम्मानित पंडित शामता प्रसाद (गोदई महाराज) का मार्गदर्शन मिला। गोदई महाराज ने रचना को विभिन्न घरानों के बोल और ताल की गहन शिक्षा दी, जिससे उनकी कला और निखरी।

Pragnya Nritya Kala Kendra में Kathak शिक्षा:

पिछले 26 वर्षों से रचना अपने गुरुओं से प्राप्त ज्ञान को नई पीढ़ी तक पहुँचा रही हैं। शहर के इंदिरा गांधी स्टेडियम के समीप स्थित उनके आवास में “Pragnya Nritya Kala Kendra” संचालित है। इस संस्थान से अब तक हजारों छात्र-छात्राएँ कथक की विधिवत शिक्षा प्राप्त कर चुके हैं।

रचना अपने छात्रों को न केवल नृत्य की तकनीक सिखाती हैं, बल्कि उन्हें भारतीय सांस्कृतिक धरोहर और Classical Dance की महत्ता से भी जोड़ती हैं।

Performances और Awards:

रचना ने जिला, राज्य, राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कथक प्रस्तुतियाँ दी हैं। उन्होंने कई प्रतियोगिताओं और सांस्कृतिक कार्यक्रमों में निर्णायक (जज) के रूप में भी योगदान दिया। उनके प्रदर्शन में कथक की रूचीपूर्ण तकनीक, भाव और ताल का अद्भुत संगम दिखाई देता है।

Bollywood और Classical Dance के बीच रचना की Journey:

बॉलीवुड की चमक-दमक के बीच भी रचना ने शास्त्रीय नृत्य की अलख को जगा रखा है। वह नई पीढ़ी को बॉलीवुड और आधुनिक नृत्य के बीच Classical Dance की जड़ों से जोड़ती हैं। उनकी कड़ी मेहनत और समर्पण से Purnia और सीमांचल क्षेत्र में कथक की उपस्थिति और पहचान और मजबूत हुई है।

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