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गाजियाबाद में कानून का जंगलराज! नायब तहसीलदार व पुलिस पर महिला से मारपीट, घर से जबरन बेदखल करने का गंभीर आरोप

By विनय मिश्रा नई दिल्लीगाजियाबाद। उत्तर प्रदेश की कानून-व्यवस्था को लेकर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। वैशाली सेक्टर-9, रचना आवासीय कॉलोनी में रहने वाली एक पढ़ी-लिखी महिला ने पुलिस, प्रशासनिक अधिकारियों और अज्ञात लोगों पर घर में जबरन घुसकर मारपीट, अभद्रता, संपत्ति नष्ट करने और कड़ाके की ठंड में घर से बेदखल करने जैसे गंभीर आरोप लगाए हैं।

गाजियाबाद में कानून का जंगलराज! नायब तहसीलदार व पुलिस पर महिला से मारपीट, घर से जबरन बेदखल करने का गंभीर आरोप

पीड़िता के अनुसार, उसने 02 मार्च 2021 को वैशाली सेक्टर-9 स्थित ग्राउंड फ्लोर का फ्लैट पूरी तरह वैध रजिस्ट्री के माध्यम से खरीदा था। संपत्ति खरीदने से पहले बैंक से NOC ली गई थी और पूरी भुगतान राशि बैंक के माध्यम से अदा की गई थी। इसके बाद से वह उसी मकान में रह रही थी।

31 दिसंबर की शाम का आरोप: पुलिस और नायब तहसीलदार पर जबरन कार्रवाई का दावा:

पीड़िता का आरोप है कि 31 दिसंबर 2025 की शाम करीब 5 बजे अचानक 15–20 पुलिसकर्मी, कुछ बिना वर्दी और नकाबपोश लोग, तथा गाजियाबाद के एक नायब तहसीलदार उसके घर में जबरन घुस आए। आरोप है कि आते ही पीड़िता के पुत्र अमन चौहान, जो दिल्ली विश्वविद्यालय से लॉ की पढ़ाई कर रहे हैं, के साथ मारपीट शुरू कर दी गई और घर का सारा सामान बाहर फेंक दिया गया। विरोध करने पर कथित रूप से कहा गया — “सरकार हमारी है, हम जो चाहें कर सकते हैं।”

गाजियाबाद में कानून का जंगलराज! नायब तहसीलदार व पुलिस पर महिला से मारपीट, घर से जबरन बेदखल करने का गंभीर आरोप

रजिस्ट्री फाड़ने, महिला से हाथापाई और बेहोश होने का आरोप:

पीड़िता के अनुसार जब उसने अपनी वैध रजिस्ट्री दिखाकर विरोध किया तो कथित रूप से अधिकारियों ने रजिस्ट्री को फाड़ दिया, अभद्र टिप्पणियां कीं और हाथापाई शुरू कर दी। आरोप है कि धक्का लगने से महिला दीवार से टकरा गई, सिर में गंभीर चोट आई और वह बेहोश होकर गिर पड़ी। वहीं, उसके पुत्र को पकड़कर मारपीट की गई और झूठे मुकदमों में फंसाने की धमकी दी गई।

कड़ाके की ठंड में घर से बाहर निकालने का आरोप:

पीड़िता का कहना है कि भीषण ठंड के बावजूद उसे और उसके पुत्र को जबरन घर से बाहर निकाल दिया गया, जिससे उनकी जान और सुरक्षा पर सीधा खतरा उत्पन्न हो गया। आरोप है कि इसके बाद अज्ञात लोगों को मकान के अंदर बैठा दिया गया।

मुख्यमंत्री से शिकायत पर कथित धमकी:

पीड़िता का आरोप है कि जब उसने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से शिकायत करने की बात कही तो कथित रूप से कहा गया—“हम मोटी रकम देकर पोस्टिंग लेकर आते हैं, हमारा कोई कुछ नहीं बिगाड़ सकता।”

योगी मॉडल पर सवाल:

यह घटना ऐसे समय सामने आई है जब योगी मॉडल की कानून-व्यवस्था की प्रशंसा देश ही नहीं, विदेशों तक में की जाती रही है। ऐसे में यह मामला पूरे पुलिस प्रशासन और सरकार की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करता है।

यदि लगाए गए आरोप सही पाए जाते हैं, तो यह सवाल भी उठता है कि क्या योगी जी का चर्चित ‘बुलडोजर मॉडल’ इन कथित आरोपियों पर भी लागू होगा? या फिर कानून की सख्ती सिर्फ आम लोगों तक ही सीमित रह जाएगी?

पीड़िता की मांग: उदाहरणात्मक कार्रवाई हो:

पीड़िता ने मांग की है कि इस पूरे मामले में जो भी व्यक्ति या अधिकारी दोषी पाया जाए, उसके खिलाफ संविधान और कानून के दायरे में सख्त व उदाहरणात्मक कार्रवाई की जाए, ताकि यह स्पष्ट संदेश जाए कि—कानून अपने हाथ में लेने वाला कोई भी व्यक्ति बख्शा नहीं जाएगा चाहे वह अमीर हो या गरीब पुलिसकर्मी हो या सरकारी प्रतिनिधि नेता हो या कोई प्रभावशाली व्यक्ति पीड़िता का कहना है कि कार्रवाई ऐसी हो, जो एक मिसाल बने और भविष्य में कोई भी व्यक्ति वर्दी या पद की आड़ में आम नागरिक के अधिकारों को कुचलने का साहस न कर सके।

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