By विनय मिश्रा नई दिल्ली: दिनांक 11 जनवरी 2026, दिल्ली की सर्द मौसम भी किताबों के दीवानों का जोश कम नहीं कर सका। भारत मंडपम में चल रहे 53वें नई दिल्ली विश्व पुस्तक मेला 2026 के दूसरे दिन साहित्य, इतिहास, सैन्य शौर्य और वैश्विक विचारों का ऐसा संगम देखने को मिला, जिसने मेले को एक जीवंत वैचारिक उत्सव में बदल दिया। हजारों पाठक, छात्र, शिक्षक और परिवार इस ज्ञान पर्व का हिस्सा बने।
लेखक संवाद, पुस्तक विमोचन, अंतरराष्ट्रीय पैनल चर्चा और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों से सजा यह दिन यह साबित करता नजर आया कि NDWBF केवल किताबों की बिक्री का मंच नहीं, बल्कि विचारों की सबसे बड़ी प्रयोगशाला है।
PM-YUVA 3.0: युवा लेखकों को मिला केंद्रीय शिक्षा मंत्री का संबल:
केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने प्रधानमंत्री संग्रहालय में PM-YUVA 3.0 के तहत चयनित 43 युवा लेखकों से संवाद किया। लेखकों ने अपनी प्रस्तावित पुस्तकों की रूपरेखा साझा की। मंत्री ने लेखकों को छह माह की मेंटरशिप योजना का अधिकतम लाभ उठाने और युवाओं को प्रेरित करने वाला साहित्य रचने का आह्वान किया। उन्होंने ‘वन नेशन-वन सब्सक्रिप्शन (ONOS)’ के माध्यम से शोध सामग्री की सुविधा और केंद्रीय विश्वविद्यालयों से संस्थागत सहयोग सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।
सैम और सगत: भारतीय सैन्य नेतृत्व की प्रेरक विरासत:
थीम पवेलियन में “Indian Military History: Valour and Wisdom” के अंतर्गत आयोजित सत्र “Sam and Sagat” मेले का प्रमुख आकर्षण रहा। लेफ्टिनेंट जनरल (से.नि.) अता हसनैन और राज शुक्ला ने फील्ड मार्शल सैम मानेकशॉ और लेफ्टिनेंट जनरल सगत सिंह के नेतृत्व, रणनीति और व्यक्तित्व पर विस्तार से प्रकाश डाला। “नज़रें आसमान पर, पैर ज़मीन पर” – यह वाक्य दोनों महान सैन्य नायकों की दूरदृष्टि और व्यावहारिकता को सार्थक रूप से परिभाषित करता दिखा।
भारत-जापान प्रकाशन सहयोग की ऐतिहासिक पहल:
अंतरराष्ट्रीय पवेलियन में पहली बार India–Japan Publishers’ Meet & Greet का आयोजन हुआ। जापान से आए 30 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल ने भारतीय प्रकाशकों और लेखकों के साथ संवाद कर साहित्यिक और प्रकाशन सहयोग की नई संभावनाओं पर चर्चा की। यह पहल भारत-जापान सांस्कृतिक रिश्तों को नई दिशा देने वाली मानी जा रही है।
आत्मविकास, महिला शक्ति और प्रेरणा की गूंज:
ऑथर्स कॉर्नर में खुशी, आत्मबोध, वेदांत दर्शन और महिला नेतृत्व जैसे विषयों पर गहन चर्चाएं हुईं। ‘Badass Begums’ सत्र में मुगलकालीन महिलाओं की राजनीतिक और कूटनीतिक शक्ति पर रोशनी डाली गई, वहीं प्रेरक लेखन पर आधारित चर्चाओं ने पाठकों और लेखकों के बीच भावनात्मक जुड़ाव को रेखांकित किया। तीन बार ग्रैमी पुरस्कार विजेता रिकी केज ने संगीत, पर्यावरण और मानसिक शांति को सामाजिक परिवर्तन से जोड़ते हुए श्रोताओं को गहराई से प्रभावित किया।
लेखक मंच से बच्चों की दुनिया तक साहित्य का उत्सव:
लेखक मंच पर भारत-मेक्सिको सभ्यताओं की समानताओं, प्रोफेशनल जीवन में खुशी और छात्रों की सफलता जैसे विषयों पर संवाद हुआ। वहीं बाल मंडप में कठपुतली कथा, लोकनृत्य, विज़ुअल स्टोरीटेलिंग और फिल्म स्क्रीनिंग ने बच्चों को ज्ञान और मनोरंजन का अनूठा अनुभव दिया। किड्ज़ एक्सप्रेस में 2,000 से अधिक बच्चों की सक्रिय भागीदारी ने माहौल को उत्सवमय बना दिया।
संगीत से सजी यादगार शाम:
एम्फीथिएटर में रिकी केज की लाइव म्यूज़िकल प्रस्तुति ने दूसरे दिन का समापन भावनात्मक और प्रेरक अंदाज़ में किया।

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