By विनय मिश्रा नई दिल्ली: तानसेन संगीत महाविद्यालय, कालकाजी द्वारा आयोजित दो दिवसीय वार्षिक समारोह ‘प्रोत्साहन’ का आयोजन लाजपत भवन सभागार में अत्यंत भव्य एवं उल्लासपूर्ण वातावरण में सम्पन्न हुआ। इस अवसर पर महाविद्यालय के विद्यार्थियों ने संगीत, नृत्य और वाद्य-प्रस्तुतियों के माध्यम से अपनी प्रतिभा का शानदार प्रदर्शन किया।
समारोह में नन्हे बच्चों से लेकर बुजुर्ग महिलाओं और पुरुषों तक ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। कार्यक्रम को तीन प्रमुख खंडों—वाद्य संगीत, गायन और नृत्य—में विभाजित किया गया था। वाद्य संगीत खंड में तबला, बाँसुरी, पियानो, गिटार, वायलिन और ड्रम्स जैसी विविध वाद्य प्रस्तुतियों ने श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। वहीं गायन सत्र में लोकप्रिय गीतों के साथ-साथ शास्त्रीय संगीत की मनमोहक प्रस्तुतियाँ रहीं।
नृत्य खंड में कथक, भरतनाट्यम, बॉलीवुड, वेस्टर्न और लोकनृत्य की रंगारंग प्रस्तुतियों ने सभागार को तालियों की गड़गड़ाहट से गूंजायमान कर दिया। समारोह के साथ-साथ चित्रकला की एक आकर्षक प्रदर्शनी एवं कार्यशाला का भी आयोजन किया गया, जिसे दर्शकों ने विशेष रूप से सराहा।
इस सांस्कृतिक संध्या को देखने-सुनने के लिए विद्यार्थियों के अभिभावकों एवं परिजनों के अतिरिक्त अनेक गणमान्य अतिथि और कला प्रेमी उपस्थित रहे। सभागार दिनभर खचाखच भरा रहा और हर प्रस्तुति को दर्शकों का भरपूर उत्साह और सराहना मिली।
उल्लेखनीय है कि तानसेन संगीत महाविद्यालय का नाम देश के प्रतिष्ठित संगीत संस्थानों में शुमार है। यह संस्थान लंबे समय से संगीत एवं नृत्य के क्षेत्र में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रदान करता आ रहा है। यहां विद्यार्थियों को न केवल शास्त्रीय और आधुनिक कलाओं का प्रशिक्षण दिया जाता है, बल्कि रियलिटी शो एवं टैलेंट हंट कार्यक्रमों के लिए भी तैयार किया जाता है। महाविद्यालय में प्रयाग संगीत समिति, प्रयागराज तथा ट्रिनिटी कॉलेज, लंदन की परीक्षाओं की सुविधा भी उपलब्ध है।
कोरोना काल में विद्यालय बंद रहने के बावजूद तानसेन संगीत महाविद्यालय ने अपने विद्यार्थियों, अभिभावकों और शिक्षकों से निरंतर संपर्क बनाए रखा, जिसका परिणाम है कि आज भी बड़ी संख्या में विद्यार्थी संस्थान से जुड़े हुए हैं। कई विद्यार्थी दूर-दराज़ क्षेत्रों से यहां शिक्षा ग्रहण करने आते हैं तथा अनेक परिवारों के एक से अधिक सदस्य यहां अध्ययनरत हैं। संस्थान में ‘स्पेशल बच्चे’ (डिफरेंटली एबल्ड) भी संगीत एवं नृत्य के माध्यम से सशक्तिकरण की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं।
महाविद्यालय के संचालक पी. एस. गुसाईं ने बताया कि तानसेन संगीत महाविद्यालय की विशेषता यह है कि यहां धनार्जन से अधिक संगीत सेवा और विद्यार्थियों की संख्या से अधिक शिक्षा की गुणवत्ता को प्राथमिकता दी जाती है। संस्थान का आदर्श वाक्य “सादा परिवेश, उच्च शिक्षा” इसकी कार्यशैली को स्पष्ट रूप से दर्शाता है। संस्थान की मालकिन राधा गुसाईं योग शिक्षिका हैं, जबकि संचालक पी. एस. गुसाईं भारतीय विदेश सेवा के सेवानिवृत्त अधिकारी हैं।
समग्र रूप से ‘प्रोत्साहन’ समारोह न केवल विद्यार्थियों की प्रतिभा को मंच प्रदान करने वाला रहा, बल्कि भारतीय कला, संगीत और संस्कृति के संरक्षण व संवर्धन का सशक्त उदाहरण भी बना।



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