By विनय मिश्रा नई दिल्ली : प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने अपने लोकप्रिय रेडियो कार्यक्रम ‘मन की बात’ की 139वीं कड़ी में खादी एवं ग्रामोद्योग क्षेत्र की बढ़ती बिक्री और उपलब्धियों का उल्लेख करते हुए देशवासियों से आगामी त्योहारों के दौरान स्थानीय कारीगरों और स्वदेशी उत्पादों को प्राथमिकता देने की अपील की। प्रधानमंत्री के इस संदेश को खादी जगत के लिए प्रोत्साहन के साथ-साथ ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल के रूप में देखा जा रहा है। इससे देशभर में खादी से जुड़े कारीगरों, बुनकरों, शिल्पकारों और ग्रामीण उद्यमियों को अपने उत्पादों की पहचान बढ़ाने का नया अवसर मिला है।
प्रधानमंत्री के संदेश से खादी परिवार में उत्साह, मनोज गोयल ने जताया आभार
खादी और ग्रामोद्योग आयोग (केवीआईसी), सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्रालय, भारत सरकार के अध्यक्ष मनोज गोयल ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि खादी एवं ग्रामोद्योग उत्पादों की बढ़ती बिक्री का उल्लेख लाखों कारीगरों के लिए सम्मान और नई ऊर्जा का स्रोत है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री का निरंतर प्रोत्साहन इस क्षेत्र से जुड़े लोगों के आत्मविश्वास को मजबूत करता है और उन्हें अपने पारंपरिक हुनर को नई पहचान दिलाने के लिए प्रेरित करता है। उनके अनुसार, खादी की बढ़ती लोकप्रियता केवल व्यापारिक सफलता नहीं, बल्कि देश के मेहनतकश कारीगरों की प्रतिभा और आत्मनिर्भरता की भावना का भी प्रतीक है।
‘मन की बात’ के 12 साल: खादी को नई पहचान दिलाने में अहम रही प्रधानमंत्री की अपील
‘मन की बात’ कार्यक्रम ने अक्टूबर 2026 में अपने 12 वर्ष पूरे कर लिए हैं। इसकी शुरुआत 3 अक्टूबर 2014 को विजयादशमी के अवसर पर हुई थी। गोयल ने कहा कि प्रधानमंत्री ने कार्यक्रम की पहली कड़ी से ही खादी को अपनाने और स्वदेशी उत्पादों को प्रोत्साहित करने का संदेश दिया। उनके मुताबिक, प्रधानमंत्री की अपील ने खादी को पारंपरिक वस्त्र की छवि से आगे बढ़ाकर राष्ट्रीय गौरव, स्थानीय रोजगार और आत्मनिर्भर भारत के संकल्प से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। समय के साथ खादी के प्रति उपभोक्ताओं का आकर्षण बढ़ा है और यह उत्पाद देश की सांस्कृतिक विरासत के साथ आधुनिक सोच का भी प्रतिनिधित्व करने लगा है।
गांधी जयंती पर रिकॉर्ड बिक्री, एक दिन में ₹28 करोड़ से अधिक की खरीदारी का उल्लेख
प्रधानमंत्री ने ‘मन की बात’ की 139वीं कड़ी में गांधी जयंती के अवसर पर एक ही दिन में खादी एवं ग्रामोद्योग उत्पादों की 28 करोड़ रुपये से अधिक की बिक्री का उल्लेख किया। यह उपलब्धि स्थानीय उत्पादों के प्रति उपभोक्ताओं के बढ़ते रुझान और स्वदेशी खरीदारी के संदेश की पहुंच को दर्शाती है। त्योहारों के दौरान स्थानीय कारीगरों के उत्पाद खरीदने की प्रधानमंत्री की अपील का उद्देश्य भी देश के भीतर उत्पादन, रोजगार और उद्यमिता को बढ़ावा देना है। यदि उपभोक्ता खरीदारी में स्थानीय उत्पादों को प्राथमिकता देते हैं, तो इसका लाभ छोटे कारोबारियों, ग्रामीण परिवारों और पारंपरिक शिल्प से जुड़े लोगों तक पहुंच सकता है।
2014 की अपील से कनॉट प्लेस के खादी भवन तक, बिक्री के आंकड़ों ने दिखाई बढ़ती लोकप्रियता
मनोज गोयल ने प्रधानमंत्री की खादी संबंधी अपीलों का उल्लेख करते हुए बताया कि 3 अक्टूबर 2014 को ‘मन की बात’ की पहली कड़ी में गांधी जयंती पर कम से कम एक खादी उत्पाद खरीदने का आह्वान किया गया था। इसके अगले दिन, 4 अक्टूबर 2014 को, केवीआईसी के प्रमुख आउटलेट पर रिकॉर्ड बिक्री दर्ज होने की बात कही गई। इसके बाद भी प्रधानमंत्री विभिन्न अवसरों पर खादी खरीदने और स्वदेशी अपनाने की अपील करते रहे। इन अपीलों के बाद कनॉट प्लेस स्थित खादी भवन में 2 अक्टूबर 2022 को लगभग 1.34 करोड़ रुपये और 2 अक्टूबर 2023 को 1.52 करोड़ रुपये से अधिक की बिक्री दर्ज की गई। ये आंकड़े खादी की बाजार में बढ़ती उपस्थिति और ग्राहकों के बीच इसके प्रति मजबूत होते आकर्षण को रेखांकित करते हैं।
‘वोकल फॉर लोकल’ से महिला सशक्तीकरण तक, खादी बन रही ग्रामीण बदलाव का माध्यम
केवीआईसी अध्यक्ष ने कहा कि खादी एवं ग्रामोद्योग क्षेत्र आज केवल पारंपरिक उत्पादन तक सीमित नहीं है, बल्कि रोजगार सृजन, महिला सशक्तीकरण और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने का महत्वपूर्ण माध्यम बन चुका है। इस क्षेत्र से जुड़े अनेक कारीगर और उद्यमी स्थानीय संसाधनों तथा अपने कौशल के आधार पर आजीविका अर्जित करते हैं। खादी की मांग बढ़ने से उत्पादन, विपणन और बिक्री से जुड़े कार्यों में नए अवसर पैदा हो सकते हैं। गोयल ने कहा कि गुणवत्ता में सुधार, नवाचार और नई पीढ़ी को खादी से जोड़ना समय की जरूरत है, ताकि स्वदेशी उत्पाद आधुनिक उपभोक्ताओं की अपेक्षाओं पर भी खरे उतर सकें।
₹1.87 लाख करोड़ से अधिक का कारोबार, 2.04 करोड़ लोगों को रोजगार
मनोज गोयल के अनुसार, वित्त वर्ष 2025-26 में खादी एवं ग्रामोद्योग क्षेत्र का कारोबार 1.87 लाख करोड़ रुपये से अधिक रहा, जबकि इस क्षेत्र के माध्यम से 2.04 करोड़ से अधिक लोगों को रोजगार प्राप्त हो रहा है। ये आंकड़े ग्रामीण उद्योगों के आर्थिक महत्व और रोजगार उपलब्ध कराने की उनकी क्षमता को सामने रखते हैं। उन्होंने विश्वास जताया कि निरंतर प्रोत्साहन, बेहतर गुणवत्ता, नवाचार और बाजार तक मजबूत पहुंच के जरिए यह क्षेत्र भविष्य में 2.51 लाख करोड़ रुपये के कारोबार के लक्ष्य को भी हासिल कर सकता है। इस दिशा में स्थानीय उत्पादों की मांग बढ़ाना और कारीगरों को व्यापक बाजार उपलब्ध कराना महत्वपूर्ण होगा।
त्योहारों पर स्वदेशी अपनाने की अपील, आत्मनिर्भर भारत के संकल्प को मजबूती
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने त्योहारों के दौरान स्थानीय उत्पादों को प्राथमिकता देने का संदेश देते हुए नागरिकों को देश के कारीगरों और छोटे उद्यमियों के योगदान की याद दिलाई। केवीआईसी अध्यक्ष मनोज गोयल ने कहा कि आयोग खादी की गुणवत्ता, नवाचार और नई पीढ़ी के बीच इसकी लोकप्रियता बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध है। खादी की खरीद केवल एक उत्पाद का चयन नहीं, बल्कि स्थानीय मेहनत, पारंपरिक कौशल और भारतीय उद्यमिता को प्रोत्साहित करने का अवसर भी है। ‘वोकल फॉर लोकल’ और ‘आत्मनिर्भर भारत’ के संदेश के साथ खादी एवं ग्रामोद्योग क्षेत्र देश की आर्थिक प्रगति और ग्रामीण सशक्तीकरण में अपनी भूमिका को और मजबूत करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।

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