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Gandhi Jayanti पर Khadi का बड़ा धमाका! 20% तक Discount, ‘हर घर स्वदेशी’ अभियान को नई रफ्तार

By विनय मिश्रा नई दिल्ली : राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की जयंती के अवसर पर देशभर में स्वदेशी और खादी को बढ़ावा देने के उद्देश्य से खादी एवं ग्रामोद्योग आयोग (KVIC) ने विशेष छूट अभियान की शुरुआत की। नई दिल्ली के कनॉट प्लेस स्थित खादी ग्रामोद्योग भवन और ग्राम शिल्पा इम्पोरियम में आयोजित कार्यक्रम में केवीआईसी के अध्यक्ष मनोज गोयल ने खादी एवं ग्रामोद्योग उत्पादों की खरीदारी कर इस राष्ट्रव्यापी अभियान का शुभारंभ किया। गांधी जयंती के मौके पर शोरूम में खरीदारी करने पहुंचे लोगों के बीच भी खादी और स्वदेशी उत्पादों को लेकर खास उत्साह देखने को मिला।

गांधी जयंती पर खादी ग्रामोद्योग भवन में KVIC अध्यक्ष मनोज गोयल

2 अक्टूबर से 16 नवंबर तक मिलेगा विशेष डिस्काउंट

गांधी जयंती से शुरू हुआ यह विशेष अभियान 2 अक्टूबर से 16 नवंबर 2026 तक चलेगा। इस अवधि में देशभर में खादी एवं ग्रामोद्योग से जुड़े उत्पादों की खरीद पर ग्राहकों को विशेष छूट दी जाएगी। अभियान के तहत खादी वस्त्रों पर 20 प्रतिशत तक और ग्रामोद्योग उत्पादों पर 10 प्रतिशत तक की छूट उपलब्ध रहेगी। इसका उद्देश्य त्योहारों और बदलते फैशन ट्रेंड के बीच खादी को आम उपभोक्ताओं, युवाओं और नई पीढ़ी तक और अधिक मजबूती से पहुंचाना है।

कनॉट प्लेस के खादी भवन में दिखा खास उत्साह

गांधी जयंती के अवसर पर कनॉट प्लेस स्थित खादी ग्रामोद्योग भवन और ग्राम शिल्पा इम्पोरियम में दिनभर लोगों की आवाजाही रही। इस मौके पर कई गणमान्य लोगों ने भी खादी और ग्रामोद्योग उत्पादों की खरीदारी की। केवीआईसी अध्यक्ष मनोज गोयल ने स्वयं विभिन्न उत्पाद खरीदे और यूपीआई के माध्यम से डिजिटल भुगतान किया। उनके इस कदम को स्वदेशी उत्पादों के साथ-साथ डिजिटल लेनदेन को प्रोत्साहित करने के संदेश के तौर पर भी देखा गया।

‘हर घर स्वदेशी’ को जन-जन और Gen-Z तक पहुंचाने पर जोर

मीडिया से बातचीत के दौरान केवीआईसी अध्यक्ष मनोज गोयल ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘हर घर स्वदेशी, घर-घर स्वदेशी’ के आह्वान को देश के हर वर्ग और विशेष रूप से Gen-Z तक पहुंचाने के लिए केवीआईसी लगातार प्रयास कर रहा है। उन्होंने कहा कि आज की युवा पीढ़ी केवल कपड़ों की डिजाइन और स्टाइल ही नहीं देखती, बल्कि उत्पाद के पीछे की कहानी, उसकी गुणवत्ता, स्थानीय रोजगार और पर्यावरणीय प्रभाव को भी महत्व देती है। ऐसे में खादी को आधुनिक सोच और बदलती पसंद के साथ जोड़ने की दिशा में लगातार काम किया जा रहा है।

कनॉट प्लेस खादी भवन में खादी उत्पादों की खरीदारी करते KVIC अध्यक्ष

खादी अब सिर्फ कपड़ा नहीं, रोजगार और विरासत की पहचान

मनोज गोयल ने कहा कि खादी को केवल एक पारंपरिक कपड़े के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। इसके पीछे देश के करोड़ों कारीगरों और बुनकरों की मेहनत, उनकी आजीविका और भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत जुड़ी हुई है। खादी ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती देने, स्थानीय स्तर पर रोजगार पैदा करने और स्वदेशी उत्पादन को बढ़ावा देने का महत्वपूर्ण माध्यम बन रही है। यही वजह है कि खादी को आधुनिक बाजार की जरूरतों के अनुरूप आगे बढ़ाने पर भी जोर दिया जा रहा है।

‘Vocal for Local’ से ‘Local to Global’ तक खादी की नई पहचान

केवीआईसी अध्यक्ष ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन में खादी ने पिछले वर्षों में एक नया आयाम हासिल किया है। ‘आत्मनिर्भर भारत’, ‘वोकल फॉर लोकल’, ‘लोकल टू ग्लोबल’ और ‘विकसित भारत-2047’ जैसे लक्ष्यों के संदर्भ में खादी और ग्रामोद्योग क्षेत्र को महत्वपूर्ण भूमिका वाला क्षेत्र बताया गया। उनका कहना था कि स्थानीय स्तर पर तैयार होने वाले उत्पादों को देश के बड़े बाजार से जोड़ने के साथ-साथ उन्हें वैश्विक बाजार तक पहुंचाने की संभावनाओं पर भी काम किया जा रहा है।

कारोबार में भी दर्ज हुई बड़ी बढ़ोतरी

केवीआईसी अध्यक्ष के अनुसार, खादी एवं ग्रामोद्योग क्षेत्र ने आर्थिक गतिविधियों और रोजगार के स्तर पर भी उल्लेखनीय प्रगति दर्ज की है। उनके द्वारा साझा किए गए आंकड़ों के मुताबिक वित्त वर्ष 2025-26 में खादी और ग्रामोद्योग क्षेत्र का कारोबार 1.87 लाख करोड़ रुपये से अधिक रहा। यह आंकड़ा इस क्षेत्र के बढ़ते आर्थिक महत्व को दर्शाता है और ग्रामीण तथा कुटीर उद्योगों के लिए बाजार के विस्तार की संभावनाओं को भी सामने रखता है।

2.04 करोड़ से अधिक लोगों को रोजगार

मनोज गोयल ने बताया कि खादी और ग्रामोद्योग क्षेत्र के माध्यम से 2.04 करोड़ से अधिक लोगों को रोजगार मिल रहा है। इस क्षेत्र का विस्तार केवल कारोबार बढ़ाने तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका सीधा संबंध बड़ी संख्या में कारीगरों, बुनकरों, छोटे उद्यमियों और ग्रामीण परिवारों की आय से भी है। ऐसे में खादी की मांग बढ़ने का असर उत्पादन से जुड़े लोगों की आर्थिक गतिविधियों पर भी पड़ता है।

2.51 लाख करोड़ रुपये के कारोबार का लक्ष्य

केवीआईसी अध्यक्ष ने आने वाले वर्षों को लेकर भी विश्वास जताया। उन्होंने कहा कि खादी और ग्रामोद्योग क्षेत्र लगातार विस्तार की दिशा में आगे बढ़ रहा है और आने वाले समय में 2.51 लाख करोड़ रुपये के कारोबार के लक्ष्य को भी हासिल करने की उम्मीद है। इसके लिए उत्पादों की गुणवत्ता, डिजाइन, बाजार पहुंच, डिजिटल प्लेटफॉर्म और युवा उपभोक्ताओं के बीच खादी की स्वीकार्यता बढ़ाने जैसे पहलुओं पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।

गांधी जयंती पर स्वदेशी संदेश को मिली नई धार

गांधी जयंती पर शुरू किया गया यह विशेष छूट अभियान सिर्फ खरीदारी तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके जरिए स्वदेशी उत्पादों को दैनिक जीवन का हिस्सा बनाने का संदेश भी दिया गया। कनॉट प्लेस के खादी भवन से शुरू हुई यह पहल देशभर के खादी प्रेमियों और स्थानीय उत्पादों को बढ़ावा देने वाले उपभोक्ताओं के लिए खास अवसर लेकर आई है। 2 अक्टूबर से 16 नवंबर तक मिलने वाली विशेष छूट के चलते त्योहारी सीजन में खादी एवं ग्रामोद्योग उत्पादों की खरीदारी को भी बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।

खादी के साथ जुड़ी है भारत की आत्मनिर्भरता की कहानी

महात्मा गांधी ने स्वतंत्रता आंदोलन के दौर में खादी को स्वदेशी और आत्मनिर्भरता के प्रतीक के रूप में स्थापित किया था। आज बदलते दौर में यही खादी आधुनिक बाजार, फैशन और डिजिटल अर्थव्यवस्था के साथ कदम मिलाने की कोशिश कर रही है। गांधी जयंती के अवसर पर शुरू हुआ यह अभियान इसी विरासत को नई पीढ़ी से जोड़ने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल के रूप में सामने आया है। आने वाले समय में खादी किस तरह पारंपरिक पहचान के साथ आधुनिक भारत की नई जरूरतों को जोड़ती है, यह इस क्षेत्र के विस्तार की दिशा को भी तय करेगा।

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