By विनय मिश्रा नई दिल्ली: इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल दिल्ली 2026 में “Independent Films: Opportunities and Challenges” विषय पर आयोजित एक खास सत्र में इंडिपेंडेंट सिनेमा की हकीकत खुलकर सामने आई। इस पैनल में Vinta Nanda, Aranya Sahay, Tanmaya Shekhar, Molshri, Barnali Ray Shukla, Pubali Chaudhuri और Dimple Dugar जैसे फिल्मकारों ने अपने अनुभव साझा किए।
चर्चा का सबसे अहम मुद्दा रहा फंडिंग। फिल्मकारों ने बताया कि इंडिपेंडेंट फिल्मों के लिए फाइनेंस जुटाना आज भी सबसे बड़ी चुनौती है। बड़े बैनर और स्टूडियो सपोर्ट के बिना, ज्यादातर फिल्में पर्सनल इन्वेस्टमेंट या सीमित संसाधनों के सहारे बनती हैं, जिससे उनकी स्केल और पहुंच प्रभावित होती है।
डिस्ट्रीब्यूशन को लेकर भी गंभीर चिंताएं सामने आईं। पैनलिस्ट्स ने कहा कि फिल्म बन जाने के बाद उसे दर्शकों तक पहुंचाना आसान नहीं होता। थिएटर में जगह मिलना मुश्किल है और बड़े बजट की फिल्मों के बीच इंडी फिल्मों को स्क्रीन स्पेस कम मिलता है। हालांकि, OTT और डिजिटल प्लेटफॉर्म्स ने नए अवसर जरूर खोले हैं, जिससे इंडिपेंडेंट सिनेमा को नई पहचान मिल रही है।
रचनात्मक स्वतंत्रता को इंडी सिनेमा की सबसे बड़ी ताकत बताया गया। फिल्मकारों ने कहा कि बिना किसी कमर्शियल दबाव के वे अलग, बोल्ड और सामाजिक मुद्दों पर आधारित कहानियां कह पाते हैं, जो सीधे दर्शकों से जुड़ती हैं।
इस दौरान यह भी कहा गया कि इंडिपेंडेंट सिनेमा को आगे बढ़ाने के लिए सरकारी नीतियों, फिल्म फेस्टिवल्स और मजबूत सपोर्ट सिस्टम की जरूरत है। IFFD जैसे प्लेटफॉर्म्स नए फिल्मकारों को पहचान दिलाने में अहम भूमिका निभा रहे हैं।
सत्र के अंत में साफ संदेश मिला, इंडिपेंडेंट सिनेमा में दम है, जुनून है, लेकिन इसे आगे बढ़ाने के लिए मजबूत सपोर्ट और सही प्लेटफॉर्म की जरूरत है।

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