By विनय मिश्रा नई दिल्ली: दिनांक 17 मार्च 2026 को भारत की पहली दिव्यांगता संबंधी हैंडबुक ‘बियॉन्ड द विज़िबल: ए हैंडबुक ऑन डिसेबिलिटी इन्क्लूज़न फॉर पार्लियामेंटेरियंस’ के लोकार्पण के अवसर पर बोलते हुए सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता राज्य मंत्री रामदास अठावले ने मंगलवार को कहा कि आगामी जनगणना 2027 दिव्यांगजनों के लिए ऐतिहासिक अवसर है। दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम (RPwD Act), 2016 के लागू होने के बाद यह देश की पहली जनगणना होगी। इसके माध्यम से प्रशिक्षित गणनाकर्मियों और बेहतर डेटा संग्रह प्रणाली के जरिए दिव्यांगता की सभी 21 श्रेणियों को सही तरीके से पहचान और दर्ज किया जा सकेगा।
उन्होंने आगे कहा कि सटीक और वर्गीकृत आंकड़ों से सरकार को देशभर में दिव्यांगजनों के लिए अधिक लक्षित और प्रभावी योजनाएं बनाने में मदद मिलेगी। यह हैंडबुक नेशनल सेंटर फॉर प्रमोशन ऑफ एम्प्लॉयमेंट फॉर डिसेबल्ड पीपल (NCPEDP) द्वारा तैयार की गई है।
इस कार्यक्रम में समावेशी स्वास्थ्य कवरेज और राजनीतिक भागीदारी पर एक उच्चस्तरीय पैनल चर्चा भी आयोजित की गई। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में रामदास अठावले मौजूद रहे। वहीं विशिष्ट अतिथियों में सांसद ई.टी. मोहम्मद बशीर, लोकसभा सांसद ईटाला राजेंद्र, राज्यसभा सांसद डॉ. फौजिया खान, भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता डॉ. गुरु प्रकाश पासवान, बीजेवाईएम की उपाध्यक्ष नेहा जोशी और एनसीपी (एसपी) के राष्ट्रीय प्रवक्ता अनिश गावांदे शामिल थे।
एनसीपीईडीपी के कार्यकारी निदेशक अरमान अली ने कहा कि संसद सदस्य दिव्यांगजनों के सामने मौजूद हर बाधा को दूर करने में सक्रिय भागीदार बनें। यह हैंडबुक इसी प्रतिबद्धता दर्शाता है। यह पुस्तक दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम को वास्तविक विधायी कार्रवाई में बदलने और भारतीय लोकतंत्र में समावेशन को वास्तविकता बनाने में मदद करेगी।
अठावले ने अरमान अली, एनसीपीईडीपी टीम, नेशनल डिसेबिलिटी नेटवर्क और बजाज फिनसर्व सीएसआर को इस समयोचित और व्यावहारिक पहल के लिए बधाई दी। उन्होंने कहा कि यह हैंडबुक देशभर में समावेशी नीतिनिर्माण को मजबूत करने के लिए सांसदों के लिए एक महत्वपूर्ण मार्गदर्शिका साबित होगी।
उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व में भारत सरकार द्वारा उठाए गए महत्वपूर्ण कदमों का भी उल्लेख करते हुए कहा कि दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम, 2016 एक ऐतिहासिक सुधार था, जिसने 21 प्रकार की दिव्यांगताओं को मान्यता दी। कल्याण-आधारित दृष्टिकोण से अधिकार-आधारित दृष्टिकोण की ओर बदलाव किया और भारत को यूएनसीआरपीडी के अनुरूप बनाया। पहली बार इस कानून में दिव्यांगजनों के सामने आने वाली राजनीतिक बाधाओं को भी स्पष्ट रूप से एक बड़ी चुनौती के रूप में स्वीकार किया गया।
उन्होंने मोदी सरकार की कई प्रमुख पहलों का उल्लेख किया, जिनमें सुगम्य भारत अभियान, यूनिक डिसेबिलिटी आईडी (UDID) पोर्टल, पीएम-डक्ष (PM-DAKSH) के तहत कौशल विकास कार्यक्रम और आयुष्मान भारत के अंतर्गत किए जा रहे विशेष प्रयास शामिल हैं। इन पहलों के माध्यम से दिव्यांगजनों को राष्ट्रीय विकास की मुख्यधारा से जोड़ा जा रहा है।
अठावले ने कहा कि इस हैंडबुक का विमोचन और आज की गोलमेज चर्चा संसद और सार्वजनिक जीवन में दिव्यांग अधिकारों और समावेशी नीतिनिर्माण की चर्चा को और मजबूत करेगी। यह कार्यक्रम समावेशी और विकसित भारत की दिशा में भारत की यात्रा का एक महत्वपूर्ण पड़ाव है।
उन्होंने सरकार के दृष्टिकोण सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास को दोहराते हुए आश्वासन दिया कि हर पहल यह सुनिश्चित करेगी कि कोई भी नागरिक पीछे न छूटे।
अरमान अली ने स्वास्थ्य बीमा की मौजूदा स्थिति पर चिंता व्यक्त करते हुए बताया कि एनसीपीईडीपी के एक हालिया सर्वेक्षण के अनुसार 80 प्रतिशत से अधिक दिव्यांगजनों के पास कोई स्वास्थ्य बीमा नहीं है। इसका मुख्य कारण अधिक प्रीमियम, दिव्यांगता से संबंधित उपचारों को बीमा से बाहर रखा जाना और कवरेज से इनकार किया जाना है।

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