क्या है पूरा मामला?:
समिट के दौरान विश्वविद्यालय की ओर से एक रोबोटिक डॉग ‘ओरियन’ को उनके “सेंटर ऑफ एक्सीलेंस” द्वारा विकसित नवाचार के रूप में पेश किया गया। हालांकि, वीडियो सामने आने के बाद सोशल मीडिया यूजर्स ने दावा किया कि यह रोबोट दरअसल चीन की कंपनी Unitree Robotics का मॉडल है—विशेष रूप से Unitree Go2—जो वैश्विक स्तर पर रिसर्च और एजुकेशन में उपयोग होता है।
वीडियो के वायरल होते ही बहस छिड़ गई कि क्या इस उत्पाद को स्वदेशी नवाचार बताना भ्रामक था?
अब ‘थर्माकोल ड्रोन’ पर उठा बवाल:
रोबोट डॉग विवाद थमा भी नहीं था कि एक और वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया। इस वीडियो में दिख रहा ड्रोन देखने में साधारण स्कूल प्रोजेक्ट जैसा प्रतीत हो रहा है, जिसमें थर्माकोल और फॉइल जैसे हल्के मटेरियल का इस्तेमाल नजर आता है।
यूजर्स का कहना है कि इतने बड़े AI मंच पर ऐसे प्रोजेक्ट को हाई-टेक इनोवेशन के रूप में दिखाना इवेंट की गंभीरता पर सवाल खड़े करता है। कई लोगों ने इसे लेकर मीम्स बनाए, तो कुछ ने इसे “AI समिट का साइंस एग्जीबिशन मोमेंट” तक कह दिया।
सरकार और आयोजकों का रुख:
सूचना प्रौद्योगिकी सचिव S Krishnan ने स्पष्ट कहा कि सरकार ऐसे उत्पादों का प्रदर्शन नहीं चाहती जो प्रदर्शकों के स्वयं के विकसित न हों। सूत्रों के अनुसार, विवाद के बाद विश्वविद्यालय को एक्सपो एरिया में आवंटित स्टॉल खाली करने के निर्देश भी दिए गए।
यूनिवर्सिटी की सफाई और माफी:
विवाद बढ़ने पर विश्वविद्यालय के प्रवक्ता ने सार्वजनिक रूप से माफी मांगते हुए कहा कि पवेलियन में मौजूद प्रतिनिधि को उत्पाद की उत्पत्ति की सही जानकारी नहीं थी। कैमरे पर आने के उत्साह में गलत बयान दिया गया। संस्थान ने स्पष्ट किया कि नवाचार को गलत तरीके से प्रस्तुत करने की कोई मंशा नहीं थी।
बड़ी सीख: AI मंच पर ‘ट्रांसपेरेंसी’ क्यों जरूरी?:
AI Summit जैसे राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मंच भारत की तकनीकी विश्वसनीयता का प्रतीक होते हैं। यहां प्रस्तुत हर उत्पाद देश की छवि से जुड़ा होता है। ऐसे में पारदर्शिता, बौद्धिक ईमानदारी और तथ्यात्मक स्पष्टता अत्यंत महत्वपूर्ण हो जाती है।
यह विवाद केवल एक विश्वविद्यालय तक सीमित नहीं है, बल्कि यह सवाल उठाता है कि—
क्या टेक शोकेस में प्रोडक्ट सोर्सिंग की स्पष्ट जानकारी अनिवार्य होनी चाहिए?
क्या बड़े मंचों पर प्रोटोकॉल और मीडिया इंटरैक्शन को लेकर सख्ती जरूरी है?
सोशल मीडिया का रिएक्शन:
ट्विटर (X), इंस्टाग्राम और यूट्यूब पर इस मामले को लेकर जबरदस्त चर्चा हो रही है। जहां कुछ लोग इसे “ओवरएंथुजियाज़्म की गलती” बता रहे हैं, वहीं कई यूजर्स इसे “इनोवेशन की आड़ में ब्रांडिंग” कहकर आलोचना कर रहे हैं।
आगे क्या?:
अब निगाहें आयोजकों पर हैं कि भविष्य में ऐसे विवादों से बचने के लिए क्या नई गाइडलाइन या वेरिफिकेशन मैकेनिज्म लागू किया जाता है। क्योंकि AI जैसे संवेदनशील और रणनीतिक क्षेत्र में भरोसा ही सबसे बड़ी पूंजी है।

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