By विनय मिश्रा नई दिल्ली: हरियाणा के गुरुग्राम, में दिनांक 17 फरवरी, 2026 को फोर्टिस मेमोरियल रिसर्च इंस्टीट्यूट, गुरुग्राम ने अंतरराष्ट्रीय बाल कैंसर दिवस के मौके पर साहस, दृढ़ता और उम्मीद का जश्न मनाते हुए एक प्रेरणास्पद कार्यक्रम ‘लिटल वॉरियर्स, बिग विन – वॉक फॉर ए कॉज़’ का आयोजन किया। इस कार्यक्रम में 50 युवा कैंसर वॉरियर्स, उनके अभिभावकों, डॉक्टरों एवं नर्सों ने रैम्प वॉक समेत बॉलीवुड थीम पर आयोजित कई रोचक गतिविधियों में हिस्सा लिया।
कार्यक्रम का आयोजन बच्चों को अपना शिकार बनाने वाले कैंसर रोगों के बारे में जागरूकता बढ़ाना, शीघ्र डायग्नॉसिस और समय पर उपचार के महत्व को उजागर करना तथा इन रोगों से ग्रस्त बच्चों के साहस का जश्न मनाना था। इस कार्यक्रम ने एक बार फिर यह संदेश भी दिया कि बच्चों में कैंसर रोगों का उपचार संभव है, और यदि इसका शीघ्र निदान तथा मल्टीडिसीप्लीनरी टीम द्वारा समय पर उपचार किया जाए तो इससे मुक्त हुआ जा सकता है। अस्पताल की हेल्थकेयर टीमों ने रैम्प वॉक में बच्चों और उनके परिजनों के साथ हिस्सा लिया और इस संदेश को पुरजोर ढंग से दर्ज कराया कि कैंसर के खिलाफ लड़ाई में कोई बच्चा अकेला नहीं है। बॉलीवुड थीम आधारित गतिविधियों ने कार्यक्रम को रंगारंग बनाया और उसे संगीत तथा सकारात्मकता से भरा और इस विश्वास को दोहराया कि उपचार का ताना-बाना दवाओं से कहीं आगे भावनात्मक और मनोवैज्ञानिक समर्थन तक फैला है। कार्यक्रम में इंटरेक्टिव सत्रों के अलावा प्रस्तुतियां दी गई,
उम्मीद जगाने वाले कहानियों को साझा किया गया और इस दिन को सही मायने में ऐसे जश्न में बदल दिया गया जिसमें जिंदगी, साहस और सामूहिक प्रतिबद्धता का अद्भुत मेल समाया था।
इस अवसर पर, डॉ विकास दुआ, प्रिंसीपल डायरेक्टर एवं हेड, पिडियाट्रिक हेमेटोलॉजी, हेमेटो-ओंकोलॉजी एवं बोन मैरो ट्रांसप्लांट, फोर्टिस मेमोरियल रिसर्च इंस्टीट्यूट, गुरुग्राम ने कहा, “पिडियाट्रिक कैंसर आज दुनियाभर में स्वास्थ्य के लिए चुनौती बन चुका है, भारत में ही हर साल 50,000 बाल कैंसर के मामले दर्ज होते हैं। कैंसरग्रस्त बच्चों का जीवन बचाने के लिए इन रोगों का शीघ्र पता लगाना, निदान होना और समय पर उपचार शुरू होना बेहद महत्वपूर्ण है। यदि किसी बच्चे को लंबे समय तक बुखार, त्वचा में पीलापन, आलस, अकारण रक्तस्राव (जैसे कि पेशाब में खून जाना), आसानी से घाव होने, या लाल चकत्ते दिखायी देने जैसी समस्याएं हों तो अभिभावकों में ऐसे मे तत्काल मेडिकल सहायता लेनी चाहिए। भारत में डायग्नॉसिस में देरी काफी प्रमुख चुनौती है, और यही वजह है कि कई ऐसे कैंसर रोगों की तरफ समय पर ध्यान नहीं जाता जो उपचारयोग्य होते हैं। प्राथमिक स्वास्थ्य सेवा प्रदाताओं को भी बच्चों में कैंसर के शुरूआती संकेतों एवं लक्षणों के बारे में जागरूक बनाए जाने की जरूरत है।”
यश रावत, फैसिलिटी डायरेक्टर एवं सीनियर वाइस-प्रेसीडेंट, फोर्टिस मेमोरियल रिसर्च इंस्टीट्यूट, गुरुग्राम ने कहा, “लिटल वॉरियर्स, बिग विन वास्तव में, उम्मीद और मेल-जोल की भावना का जश्न है। हम इन युवा चैंपियंस को विश्वाास के साथ रैम्प वॉक करते देखकर बेहद खुशी महसूस कर रहे हैं, और इनके केयरगिवर्स और मेडिकल टीमों की उपस्थिति उस एकजुटता के जज़्बे की सूचक है जो फोर्टिस गुरुग्राम को परिभाषित करती है। अंतरराष्ट्रीय बाल कैंसर दिवस न सिर्फ जागरूकता बढ़ाने के लिए मनाया जाता है, बल्कि यह दिन इन बाल योद्धाओं के असाधारण साहस का उत्सव मनाने का भी दिन है। आज के इस आयोजन ने एक बार फिर इस बात को दोहराया है कि इन बच्चों को बीमारियां नहीं बल्कि इनकी ताकत, दृढ़ता और इनका उज्ज्वल भविष्य ही सही ढंग से परिभाषित करता है।”

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