By विनय मिश्रा नई दिल्ली: मध्य प्रदेश के छतरपुर में आस्था, सेवा और सामाजिक समर्पण का अद्भुत संगम उस समय देखने को मिला जब सप्तम कन्या विवाह महोत्सव के पावन अवसर पर दाती जी महाराज ने बागेश्वर धाम पहुंचकर सैकड़ों बेटियों को आशीर्वाद प्रदान किया। पूरे धाम परिसर में भक्ति, उत्साह और मंगल ध्वनियों का वातावरण छा गया।
यह आयोजन केवल विवाह संस्कार तक सीमित नहीं रहा, बल्कि समाज को एक मजबूत संदेश देने वाला महोत्सव बन गया “बेटी बोझ नहीं, सम्मान और संस्कार की पहचान है।”
आशीर्वाद के साथ सामाजिक संदेश:
दाती जी महाराज ने अपने उद्बोधन में कहा कि कन्याओं का सम्मान और संरक्षण प्रत्येक समाज की जिम्मेदारी है। उन्होंने नवविवाहित जोड़ों को सुखी दांपत्य जीवन का आशीर्वाद देते हुए कहा कि विवाह केवल दो व्यक्तियों का नहीं, बल्कि दो परिवारों और संस्कृतियों का पवित्र मिलन है।
उन्होंने विशेष रूप से बेटियों की शिक्षा, आत्मनिर्भरता और संस्कारों पर बल देते हुए कहा कि समाज को कन्या भ्रूण हत्या जैसी कुरीतियों से ऊपर उठकर बेटियों को समान अवसर देने होंगे।
भव्य आयोजन, दिव्य वातावरण:
सप्तम कन्या विवाह महोत्सव में हजारों श्रद्धालु उपस्थित रहे। वैदिक मंत्रोच्चार, पुष्पवर्षा और पारंपरिक रीति-रिवाजों के बीच सामूहिक विवाह संपन्न हुए। आयोजन समिति द्वारा प्रत्येक नवदंपत्ति को गृहस्थ जीवन की आवश्यक सामग्री भेंट की गई।
पूरा धाम ‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’ के संदेश से गूंजता रहा। सामाजिक समरसता और सहयोग की यह मिसाल लोगों के लिए प्रेरणा का केंद्र बनी।
समाज सेवा की मिसाल:
कन्या विवाह महोत्सव जैसे आयोजन जरूरतमंद परिवारों के लिए वरदान साबित हो रहे हैं। इससे आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों को सम्मानपूर्वक अपनी बेटियों का विवाह संपन्न कराने का अवसर मिलता है।
दाती जी महाराज के आशीर्वाद और मार्गदर्शन से यह आयोजन और भी दिव्य एवं ऐतिहासिक बन गया। श्रद्धालुओं का कहना था कि यह केवल विवाह नहीं, बल्कि सेवा, संस्कार और समर्पण का महाकुंभ है।

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