Published by : BST News Desk
जयपुर/राजस्थान : 4 दिसंबर 2025, “ज़िंदगी इस बात पर नहीं चलती कि आप कितनी बार गिरते हैं, बल्कि इस पर चलती है कि आप कितनी बार उठते हैं।” कलिंगा इंस्टीट्यूट ऑफ इंडस्ट्रियल टेक्नोलॉजी (KIIT) की महिला हॉकी टीम की कप्तान निकिता टोप्पो, अमेरिकी शिक्षक जेमी एस्कालांटे की इस सोच का सजीव उदाहरण हैं।
22 वर्षीय निकिता ने पांच साल की उम्र में अपने माता-पिता को खो दिया था। तीन साल पहले जब वे आयरलैंड में होने वाले यू-23 फाइव नेशंस कप में हिस्सा लेने जा रही थीं, तभी उनके बड़े भाई की एक दुर्घटना में मौत हो गई। एक वर्ष बाद उन्हें करियर को खत्म करने वाली चोट लगी और इसके तुरंत बाद उनके दूसरे भाई को भी एक दुर्घटना में गंभीर सिर की चोट लगी, जिससे वह आज तक पूरी तरह उबर नहीं पाया है।
लेकिन इन लगातार झटकों से टूटने के बजाय निकिता ने हॉकी को अपना सहारा बनाया और केआईआईटी को राजस्थान में आयोजित खेलो इंडिया यूनिवर्सिटी गेम्स (KIUG) 2025 में महिला हॉकी टीम स्पर्धा का पहला स्वर्ण पदक दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। यह केआईआईटी की केआईयूजी में पहली उपस्थिति भी थी।
निकिता ने साई मीडिया से कहा, “इसके पहले हम ज़ोन ही क्लियर नहीं कर पाते थे क्योंकि ओडिशा में कई मज़बूत यूनिवर्सिटी टीमें हैं। लेकिन पिछले साल से मैं और मेरे कोच मिलकर एक मजबूत टीम बनाने पर काम कर रहे थे। अच्छे खिलाड़ियों को यूनिवर्सिटी में एडमिशन दिलाया। जब यहां पहुंचे, तो गोल्ड जीतने का ही लक्ष्य था,”
फाइनल में निकिता ने डिफेंसिव मिडफील्डर की भूमिका में खेल की रफ़्तार नियंत्रित रखी और आईटीएम को गोल की तरफ़ बढ़ने का कोई मौका नहीं दिया। लेकिन निकिता को जो सबसे अलग बनाता है, वह सिर्फ़ उनकी हॉकी नहीं, बल्कि उनकी स्पष्ट सोच और अद्भुत धैर्य है।
निकिता ने कहा,” मेरा मानना है कि जो हो गया, उसे बदला नहीं जा सकता। मैं केवल वर्तमान पर ध्यान देती हूं और परिस्थिति को स्वीकार करती हूं। मैं अपनी टीम और अपने परिवार (जो भी अब बचा है) के लिए मजबूत रहती हूं। मैं आँसू नहीं बहाती क्योंकि मैं नहीं चाहती कि मेरी असुरक्षाएँ और बुरी घटनाएँ मेरे मन को धुंधला करें।”
निकिता ने कहा (जो अपने भाई के अंतिम संस्कार में भी शामिल नहीं हो सकीं) जो मेरे भाई के साथ (2022 में) हुआ, वह दिल तोड़ने वाला था। लेकिन मैंने खुद को टूटने नहीं दिया, और मैं नहीं चाहती थी कि मेरी वजह से टीम का प्रदर्शन प्रभावित हो। जितना भी मैं उन्हें याद करती हूं, वे वापस नहीं आएंगे।”
यू-23 फाइव नेशंस कप में भारतीय टीम ने रजत पदक जीता था। वर्ष 2016 में राउरकेला के पनपोष स्थित सरकारी स्पोर्ट्स हॉस्टल में हॉकी शुरू करने वाली निकिता 2023 में भारतीय यू-21 टीम का भी हिस्सा थीं, जिसने दक्षिण अफ्रीका दौरे में चार मैच जीते और एक ड्रॉ खेला।
लेकिन 2023 में खेलो इंडिया यूथ गेम्स के प्रशिक्षण शिविर के दौरान लगी लिगामेंट चोट और फिर उनके दूसरे भाई के साथ हुई दुर्घटना ने उन्हें मानसिक और शारीरिक तौर पर लगभग एक वर्ष मैदान से दूर रखा।
अब निकिता का अल्पकालिक लक्ष्य ओडिशा टीम से सीनियर नेशनल में खेलना और पदक जीतना है, जबकि दीर्घकालिक लक्ष्य भारत का प्रतिनिधित्व करना और एक स्थायी नौकरी हासिल करना है।
खेलो इंडिया स्कीम से मिलने वाली राशि वह दो हिस्सों में बांटती हैं—कुछ अपनी ट्रेनिंग पर खर्च होता है, और बाकी वह अपने सपनों का घर बनाने के लिए बचाती हैं, ताकि उनका भाई ठीक होते समय एक स्थायी जगह पर रह सके और वे उसकी बेहतर देखभाल कर सकें।
केआईआईटी में पढ़ाई करने वाली निकिता ने कहा, “एक ऐसा घर होना, जिसे मैं अपना कह सकूँ, यही मेरी सबसे बड़ी ख्वाहिश है।”


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